AI Regulation India: एआई जोखिमों पर सरकार सख्त, एक महीने में आएगा रेगुलेशन पर कंसल्टेशन पेपर

AI Regulation India को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एक महीने में AI रेगुलेशन पर कंसल्टेशन पेपर आएगा, जिसमे

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को नई दिल्ली में ‘वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026’ जारी की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में ऐसे कई उदाहरण हैं, जो दिखाते हैं कि टेक्नोलॉजी किस तरह आम लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है।

नई दिल्ली: भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच इसके संभावित जोखिमों को लेकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार करीब एक महीने के भीतर AI Regulation पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सुरक्षा जोखिमों, डीपफेक, साइबर सिक्योरिटी, यूजर सेफ्टी और संभावित मनोवैज्ञानिक नुकसान जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

मंत्री ने नई दिल्ली में World Development Report 2026 जारी करने के दौरान AI के नियमन और तकनीक के सामाजिक प्रभाव पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अब ऐसा रेगुलेटरी मॉडल तैयार करने का समय आ गया है, जो तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे।

एक महीने में आएगा AI Regulation पर कंसल्टेशन पेपर

अश्विनी वैष्णव के अनुसार, प्रस्तावित कंसल्टेशन पेपर AI से जुड़े संभावित खतरों को समझने और उनके समाधान के लिए भविष्य की नीति का आधार बन सकता है। सरकार इसमें विशेष रूप से AI के सुरक्षित इस्तेमाल पर ध्यान देना चाहती है। उन्होंने संकेत दिया कि रेगुलेशन तैयार करने की प्रक्रिया में इंडस्ट्री, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल किया जाएगा। 

सरकार का उद्देश्य ऐसा ढांचा तैयार करना है जो AI की तेज प्रगति के साथ कदम मिलाकर चल सके और जरूरत पड़ने पर नए जोखिमों से निपटने में सक्षम हो।

Deepfake और साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौतियों में

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ Deepfake एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आया है। AI की मदद से तैयार किए गए नकली वीडियो, ऑडियो और तस्वीरें कई बार वास्तविक दिखाई देते हैं। इससे गलत सूचना फैलने, लोगों को गुमराह करने और किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने का खतरा बढ़ जाता है।वैष्णव ने कहा कि डीपफेक की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है। ऐसे में आम लोगों के लिए असली और नकली कंटेंट में अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे गलत सूचनाओं के आधार पर लोगों के निर्णय प्रभावित होने और समाज में गलत नैरेटिव बनने का खतरा पैदा होता है।

सरकार AI रेगुलेशन में साइबर सिक्योरिटी और यूजर सेफ्टी को भी महत्वपूर्ण मुद्दा मान रही है। इसके अलावा AI के कारण होने वाले संभावित मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।

'टेक्नो-लीगल' समाधान पर सरकार का जोर

अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि AI को केवल पारंपरिक कानूनों के जरिए नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि इसके लिए टेक्नोलॉजी और कानून के मेल से टेक्नो-लीगल समाधान विकसित करना होगा। AI तकनीक तेजी से बदल रही है और इसके नए उपयोग तथा जोखिम लगातार सामने आ रहे हैं। इसलिए सरकार ऐसा सिस्टम तैयार करना चाहती है जो कानूनी प्रावधानों के साथ तकनीकी उपायों को भी जोड़ सके।

मंत्री ने यह भी कहा कि AI से जुड़े रेगुलेशन में सभी स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी जरूरी होगी। वहीं, उन्होंने AI इंडस्ट्री की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, कंपनियों को अपने AI सिस्टम की सुरक्षा, साइबर जोखिमों और यूजर्स को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर प्रमुख जिम्मेदारी निभानी होगी।

AI विकास में इंसान को केंद्र में रखने पर जोर

सरकार के प्रस्तावित दृष्टिकोण में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि Human-Centric AI पर भी जोर दिया जाएगा। वैष्णव ने कहा कि तकनीकी बदलावों के बीच इंसान को केंद्र में रखना जरूरी है। कंसल्टेशन पेपर में स्किलिंग और यह सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे भी शामिल किए जा सकते हैं कि AI के कारण होने वाले बदलावों में समाज का कोई वर्ग पीछे न छूटे। AI के विस्तार से रोजगार और काम करने के तरीकों में बदलाव की संभावना को देखते हुए कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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