बर्लिन में एंडी बर्नहम और फ्रेडरिक मर्ज की मुलाकात, रूस से हाइब्रिड खतरों पर UK-जर्मनी की नई साझेदारी

बर्लिन में एंडी बर्नहम और फ्रेडरिक मर्ज ने साइबर हमलों, तोड़फोड़ और रूस से जुड़े हाइब्रिड खतरों पर चर्चा की। दोनों देशों ने नई सुरक्षा साझेदारी शुरू की।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बर्लिन में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात की। दोनों देशों ने साइबर हमलों, तोड़फोड़ और हाइब्रिड खतरों से निपटने के लिए नई साझेदारी शुरू की और Kensington Treaty को औपचारिक रूप से लागू किया।

बर्लिन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने गुरुवार को बर्लिन में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात की। अपनी पहली आधिकारिक जर्मनी यात्रा के दौरान बर्नहम का सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया। दोनों नेताओं की बातचीत के केंद्र में साइबर हमले, तोड़फोड़, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और रूस से जुड़े बढ़ते हाइब्रिड खतरों से निपटने के लिए सहयोग रहा।

ब्रिटिश सरकार के अनुसार, ब्रिटेन और जर्मनी ने हाइब्रिड खतरों का मुकाबला करने के लिए एक नई साझेदारी शुरू की है। इसके तहत दोनों देश खुफिया सूचनाएं साझा करने, संभावित खतरों की निगरानी करने और साइबर हमलों तथा तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई करेंगे।

दोनों नेताओं की बैठक ऐसे समय हुई है जब यूरोप में रूस से जुड़े संभावित साइबर और हाइब्रिड हमलों को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। ब्रिटेन और जर्मनी का कहना है कि ऐसे खतरे केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, कारोबार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं।

Kensington Treaty हुआ लागू

बर्लिन बैठक का एक महत्वपूर्ण परिणाम 2025 के Kensington Treaty को औपचारिक रूप से लागू करना रहा। यह समझौता ब्रिटेन और जर्मनी के बीच विज्ञान, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक विकास सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है।

जर्मन चांसलर कार्यालय के अनुसार, बर्नहम के स्वागत के दौरान दोनों देशों ने समझौते से जुड़े दस्तावेजों का औपचारिक आदान-प्रदान किया। इसके साथ ही यह द्विपक्षीय मैत्री संधि प्रभावी हो गई, जिसका उद्देश्य ब्रिटेन और जर्मनी के संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देना है।

ब्रिटिश सरकार ने भी कहा कि Kensington Treaty दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सहयोग को आगे बढ़ाता है। इसके तहत विज्ञान, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को व्यापक बनाने पर जोर दिया जाएगा।

रूस से जुड़े हाइब्रिड खतरों पर बढ़ी चिंता

बर्नहम और मर्ज की बातचीत का प्रमुख विषय यूरोप में बढ़ते हाइब्रिड खतरों का मुकाबला करना रहा। ब्रिटिश सरकार ने रूस को इस संदर्भ में प्रमुख संभावित खतरे के रूप में रेखांकित किया है।

हाइब्रिड खतरे का इस्तेमाल उन गतिविधियों के लिए किया जाता है जिनका उद्देश्य पारंपरिक युद्ध के बिना किसी देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था या राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करना होता है। इसमें साइबर हमले, जासूसी, तोड़फोड़, गलत सूचना फैलाना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शामिल हो सकता है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि बुनियादी ढांचे, कारोबार और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर होने वाले हमले दूर की संभावना नहीं हैं। उन्होंने ब्रिटेन और जर्मनी के एक साथ काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण ढांचे पर सहयोग

नई UK-जर्मनी साझेदारी में साइबर सुरक्षा को प्रमुख स्थान दिया गया है। दोनों देश संभावित खतरों से जुड़ी सूचनाओं को साझा करने और उनकी पहचान करने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे।

इसके अलावा, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों और तोड़फोड़ से सुरक्षित रखने के लिए भी संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। इसका दायरा ऊर्जा, परिवहन, संचार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों तक हो सकता है।

ब्रिटिश सरकार के अनुसार, दोनों देशों के बीच समन्वय का उद्देश्य संभावित हमलों को केवल रोकना ही नहीं, बल्कि उनकी पहचान कर हमलावरों की क्षमता को कमजोर करना भी है।

Leipzig/Halle एयरपोर्ट घटना ने बढ़ाई चिंता

यूरोप में हाइब्रिड खतरों को लेकर चर्चा के बीच अगस्त में जर्मनी के Leipzig/Halle Airport पर एक विस्फोटक से लैस ड्रोन मिलने की घटना ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया था।

जर्मन सरकार ने सितंबर में इस घटना के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया था। जर्मन अधिकारियों के मुताबिक, 4 अगस्त को एयरपोर्ट पर मिला ड्रोन विस्फोटक सामग्री से लैस था और जांच में मिले संकेत रूस की कथित हाइब्रिड गतिविधियों के पैटर्न से मेल खाते थे। मॉस्को ने इन आरोपों को खारिज किया है।

यह एयरपोर्ट यूक्रेन से संबंधित माल और गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। घटना के बाद जर्मनी ने रूस के खिलाफ अतिरिक्त कदम उठाने की घोषणा की थी।

इसी तरह की घटनाओं ने यूरोपीय देशों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और संभावित तोड़फोड़ से निपटने की क्षमता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है।

यूक्रेन और यूरोप की सुरक्षा भी एजेंडे में

बर्नहम और मर्ज के बीच बातचीत केवल साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं रही। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, दोनों नेताओं ने यूक्रेन को समर्थन, मध्य पूर्व में अस्थिरता और वैश्विक व्यापार मार्गों में व्यवधान जैसे व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा की।

विशेष रूप से यूरोप की सुरक्षा स्थिति पर यूक्रेन युद्ध का प्रभाव दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों की नीतियों और यूक्रेन के समर्थन के कारण यूरोपीय देशों में साइबर हमलों, जासूसी और संभावित तोड़फोड़ को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

ब्रिटेन और जर्मनी की नई साझेदारी इसी व्यापक सुरक्षा ढांचे का हिस्सा मानी जा रही है।

अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीक में भी साझेदारी

सुरक्षा के साथ-साथ विज्ञान और उन्नत तकनीक दोनों देशों के सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ब्रिटिश विदेश मंत्री स्टीफन डाउटी के अनुसार, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में भी नए सहयोग की संभावना है।

ब्रिटिश और जर्मन अंतरिक्ष कंपनियों के बीच सहयोग तथा स्कॉटलैंड के स्पेसपोर्ट से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की गई है। इसके अलावा क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों के शीर्ष शोधकर्ताओं के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना है।

क्वांटम कंप्यूटिंग को भविष्य की कंप्यूटिंग तकनीक का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है और इससे साइबर सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव की उम्मीद है।

यूरोपीय संघ के साथ ब्रिटेन के संबंध भी चर्चा में

बर्लिन यात्रा का एक व्यापक राजनीतिक पहलू ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के संबंधों से भी जुड़ा है। बर्नहम की सरकार ब्रिटेन और यूरोप के बीच संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने हाल में यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को और गहरा करने के विकल्पों पर चर्चा की है। इसी बीच जर्मनी ने ब्रिटेन के साथ करीबी संबंधों का समर्थन किया है।

फ्रांस के वित्त मंत्री रोलां लेस्क्यूर ने भी ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के साथ संबंध और गहरे करने का खुला संकेत दिया है। हालांकि, ब्रिटेन की भविष्य की EU नीति को लेकर अंतिम निर्णय देश की अपनी राजनीतिक प्रक्रिया और सरकार की नीति पर निर्भर करेगा।

आर्थिक सहयोग पर भी जोर

बर्लिन बैठक में सुरक्षा के अलावा आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों सरकारों ने क्षेत्रीय विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए UK-Germany Regional Growth Forum आयोजित करने की योजना बनाई।

इस मंच में दोनों देशों के कारोबारी नेता और कंपनियां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य निवेश बढ़ाना, औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करना और आर्थिक विकास का लाभ अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाना है।

ब्रिटेन और जर्मनी यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और दोनों के बीच व्यापार तथा निवेश संबंध पहले से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सुरक्षा के साथ आर्थिक सहयोग को जोड़ना दोनों सरकारों की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

आगे की रणनीतिक साझेदारी पर नजर

एंडी बर्नहम और फ्रेडरिक मर्ज की बैठक ब्रिटेन और जर्मनी के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखी जा रही है। Kensington Treaty के लागू होने और नई हाइब्रिड-थ्रेट साझेदारी के साथ दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग को अधिक संस्थागत रूप देने का संकेत दिया है।

आने वाले समय में साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, रक्षा, उन्नत तकनीक और आर्थिक निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है। रूस से जुड़े संभावित हाइब्रिड खतरों को लेकर यूरोप में चिंता बनी हुई है, ऐसे में ब्रिटेन-जर्मनी साझेदारी का महत्व भी बढ़ सकता है।

हालांकि, इस सहयोग की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश खुफिया सूचनाओं को कितनी तेजी से साझा करते हैं, संभावित खतरों की पहचान कैसे करते हैं और किसी हमले या तोड़फोड़ की स्थिति में कितनी प्रभावी संयुक्त कार्रवाई कर पाते हैं।

Leave a comment