Ajmer Dargah Chadarposhi Controversy: कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, हिंदू सेना की याचिका पर 10 दिसंबर को होगी सुनवाई

Ajmer Dargah Chadarposhi विवाद में कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हिंदू सेना की याचिका पर सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। जानें पूरे मामले की डिटेल।

अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर हर साल आयोजित होने वाली चादरपोशी को लेकर विवाद बढ़ गया है। हिंदू सेना द्वारा दायर याचिका के बाद अजमेर जिला अदालत ने अब केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। 

Ajmer Chadar Poshi Controversy: अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर हर साल होने वाली चादरपोशी को लेकर विवाद बढ़ गया है। हिंदू सेना द्वारा दायर याचिका पर जिला अदालत ने अब केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय को नोटिस जारी किया है और मंत्रालय से 10 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने को कहा है।

जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार, हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अदालत में अर्जी दाखिल की थी। इसमें उन्होंने दावा किया कि अजमेर दरगाह मूल रूप से भगवान शिव का प्राचीन मंदिर था और इस दावे पर आधारित सिविल मामला पहले से अदालत में लंबित है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री समेत संवैधानिक पदों पर बैठे लोग उर्स के अवसर पर चादर भेजते हैं, जिससे गलत संदेश जाता है, और मुस्लिम पक्ष इस चादरपोशी को अपने समर्थन में अदालत में पेश करता है।

याचिका का आधार

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने अदालत में दायर अर्जी में कहा है कि अजमेर दरगाह मूल रूप से भगवान शिव का प्राचीन मंदिर था। इसके आधार पर संबंधित सिविल मामला पहले ही अदालत में लंबित है। गुप्ता का दावा है कि प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी उर्स के अवसर पर चादर भेजते हैं, जो मुस्लिम पक्ष द्वारा अदालत में अपनी ओर से समर्थन के रूप में पेश किया जा सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस परंपरा की शुरुआत देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। हिंदू सेना इसे ‘मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति’ का हिस्सा मानती है और उनका कहना है कि यह परंपरा अब धीरे-धीरे कुप्रथा का रूप ले चुकी है। इसलिए, जब तक मूल मुकदमे में निर्णय नहीं आता, इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

पीएम कार्यालय को भेजा गया ज्ञापन

हिंदू सेना ने प्रधानमंत्री कार्यालय समेत अन्य संबंधित विभागों को ज्ञापन भेजकर चादर न भेजने का अनुरोध किया था। लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर संगठन ने न्यायालय का रुख किया। अर्जी में अदालत से यह भी मांग की गई कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा चादरपोशी पर रोक लगाई जाए। इस साल अजमेर दरगाह का सालाना उर्स 16 दिसंबर से शुरू होने वाला है। परंपरागत रूप से इस अवसर पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पदाधिकारी दरगाह पर चादर भेजते हैं। हिंदू सेना का कहना है कि चादर चढ़ाने की यह प्रथा इस्लामी परंपरा का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसे जारी रखने का कोई धार्मिक औचित्य नहीं बनता।

अदालत ने हिंदू सेना की याचिका पर 10 दिसंबर को सुनवाई तय की है। वहीं, संगठन की मूल याचिका पर अगली सुनवाई 3 जनवरी को होगी। इस बीच उर्स की तैयारियां अजमेर में पूरी तेजी से चल रही हैं।

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