Ajmer में पुलिस ने नेपाल के दो तस्करों को गिरफ्तार कर करीब 2 किलो चरस बरामद की है। इसकी कीमत लगभग 1 करोड़ रुपए बताई गई। आरोपी बस के जरिए मादक पदार्थ लाकर पुष्कर में सप्लाई करने वाले थे।
अजमेर: राजस्थान के अजमेर में पुलिस और एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की संयुक्त कार्रवाई में करीब 1 करोड़ रुपये मूल्य की चरस बरामद की गई है। इस मामले में नेपाल के दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो बस के जरिए मादक पदार्थ लेकर अजमेर पहुंचे थे।
पुलिस के अनुसार, जब्त की गई चरस का वजन लगभग 2 किलोग्राम है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह खेप राजस्थान के धार्मिक और पर्यटन केंद्र पुष्कर में सप्लाई की जानी थी।
ATS की सूचना पर अजमेर पुलिस ने की नाकाबंदी
राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) से मिली खुफिया सूचना के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पुलिस को जानकारी मिली थी कि दो संदिग्ध व्यक्ति नेपाल से चरस लेकर अजमेर पहुंचने वाले हैं।
सूचना के बाद पुलिस ने अजमेर के एमडीएस तिराहे पर नाकाबंदी की। इसी दौरान रोडवेज बस से उतरे दो युवकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। पूछताछ के दौरान दोनों घबराए हुए दिखाई दिए, जिसके बाद उनकी तलाशी ली गई।
तलाशी में दोनों आरोपियों के पास से अवैध मादक पदार्थ बरामद हुआ। पुलिस ने तुरंत दोनों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी नेपाल के निवासी
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान खेमकुमार और अजय राणा के रूप में की है। दोनों नेपाल के निवासी बताए जा रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी बस के जरिए नेपाल से भारत आए थे और अलग-अलग राज्यों में मादक पदार्थ की सप्लाई करते थे।
NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज
हिमांशु जांगिड़ ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि राजस्थान और अन्य राज्यों में इस गिरोह के संपर्क किन लोगों से थे और क्या इसमें कोई बड़ा अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क शामिल है।
पुष्कर और दिल्ली में सप्लाई की जानकारी
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी इससे पहले दिल्ली में भी मादक पदार्थ की डिलीवरी कर चुके हैं। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में भी इस नेटवर्क के जरिए चरस की सप्लाई की जा चुकी है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह धार्मिक और पर्यटन स्थलों को टारगेट बनाकर ड्रग्स की सप्लाई करता था। अजमेर और पुष्कर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, जिसके कारण ड्रग तस्कर इन इलाकों को संभावित बाजार के रूप में देखते हैं।
बस मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे तस्कर
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी मादक पदार्थों की तस्करी के लिए सार्वजनिक परिवहन, विशेष रूप से बस सेवाओं का उपयोग करते थे। अधिकारियों के अनुसार, इस तरीके से वे सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने की कोशिश करते थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराज्यीय बस नेटवर्क का इस्तेमाल ड्रग तस्करी के लिए बढ़ता जा रहा है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
राजस्थान में ड्रग तस्करी पर बढ़ती चिंता
हाल के वर्षों में राजस्थान में मादक पदार्थों की तस्करी के कई बड़े मामले सामने आए हैं। सीमावर्ती राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े नेटवर्क के कारण राजस्थान ड्रग ट्रांजिट रूट के रूप में उभर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों से आने वाली चरस और सिंथेटिक ड्रग्स का नेटवर्क लगातार फैल रहा है। ऐसे मामलों में स्थानीय एजेंसियों के साथ केंद्रीय जांच एजेंसियों का समन्वय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।










