भारत के एल्युमिनियम बाजार में आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। कारोबारी जगत में चर्चा है कि गौतम अदाणी और मुकेश अंबानी इस सेक्टर में एंट्री कर सकते हैं। इन अटकलों के बीच वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का भी बयान चर्चा में है।
बिजनेस न्यूज़: भारत के एल्युमिनियम उद्योग में आने वाले समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। दिग्गज कारोबारी समूहों अदाणी और रिलायंस की इस क्षेत्र में संभावित गतिविधियों के बीच वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि उनकी कंपनी नए प्रतिस्पर्धियों का स्वागत करती है। उनका कहना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा से कंपनियों को अपनी क्षमता और दक्षता बेहतर करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में भारतीय एल्युमिनियम बाजार की मौजूदा स्थिति और वेदांता की भविष्य की विस्तार योजनाओं पर बात की। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में कंपनियों के बीच मुकाबला और तेज हो सकता है। उनके मुताबिक, अंततः वही कंपनियां बाजार में टिकेंगी जो लागत, उत्पादन और संचालन के मामले में अधिक कुशल होंगी।
एल्युमिनियम सेक्टर में कौन-कौन से बड़े खिलाड़ी?
भारतीय एल्युमिनियम उद्योग में फिलहाल वेदांता, हिंडाल्को और नाल्को प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं। अग्रवाल के अनुसार, घरेलू बाजार के बड़े हिस्से पर वेदांता और हिंडाल्को की मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में यदि अदाणी समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं, तो प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदल सकता है।
अग्रवाल ने कहा कि प्रतिस्पर्धा किसी भी उद्योग के लिए चुनौती होने के साथ-साथ कंपनियों को अधिक प्रभावी बनाने का जरिया भी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उद्योग में कंसोलिडेशन यानी कंपनियों के विलय जैसी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
अदाणी समूह की एल्युमिनियम योजना क्या है?
अदाणी एंटरप्राइजेज ने यूएई की इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग के साथ मिलकर ओडिशा में एक बड़े इंटीग्रेटेड एल्युमिनियम प्रोजेक्ट की योजना का ऐलान किया है। इस प्रस्तावित परियोजना का अनुमानित निवेश करीब 11.5 अरब डॉलर बताया गया है। इस परियोजना में एल्युमिनियम उत्पादन से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों को एकीकृत करने की योजना है।
अगर यह प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो भारत के एल्युमिनियम उत्पादन और कच्चे माल की सप्लाई चेन में इसका असर देखने को मिल सकता है।
रिलायंस की भी ओडिशा में नजर
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी ओडिशा के कर्लापट बॉक्साइट ब्लॉक से जुड़ी प्रक्रिया में रुचि दिखाई है। कंपनी द्वारा टेंडर डॉक्यूमेंट खरीदने को एल्युमिनियम और बॉक्साइट कारोबार में संभावित प्रवेश के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी भी परियोजना के अंतिम आकार, निवेश और उत्पादन क्षमता को लेकर आगे की प्रक्रियाओं और आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा।
वेदांता का 25 अरब डॉलर का निवेश प्लान
नए संभावित प्रतिस्पर्धियों के बीच वेदांता भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अनिल अग्रवाल के अनुसार, कंपनी अगले तीन वर्षों में एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर करीब 6 मिलियन टन करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। लंबी अवधि में इसे 10 मिलियन टन तक ले जाने की योजना बताई गई है।
वेदांता अगले तीन से पांच वर्षों में अपने विभिन्न कारोबारों में करीब 25 अरब डॉलर निवेश करने की योजना पर भी काम कर रही है। इस निवेश का फोकस एल्युमिनियम के अलावा तेल और गैस, जिंक, स्टील और पावर जैसे क्षेत्रों पर रहेगा।
तेल और पावर कारोबार पर भी बड़ा फोकस
कंपनी तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाने के लिए करीब 4 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बना रही है। लक्ष्य उत्पादन क्षमता को 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाना है। पावर सेक्टर में भी क्षमता विस्तार की योजना है। वेदांता मौजूदा करीब 4,000 मेगावाट क्षमता को बढ़ाकर 12,000 मेगावाट करने पर विचार कर रही है। इसके अलावा कंपनी न्यूक्लियर पावर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रही है।











