जयपुर में अमायरा की संदिग्ध मौत मामले में नया मोड़ सामने आया है। डिप्टी सीएम दिया कुमारी खुद अमायरा के माता-पिता से मिलने पहुंचीं और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। इस मुलाकात के दौरान पिता ने मोबाइल में मौजूद अहम सबूत और घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी डिप्टी सीएम को दिखाईं।
जयपुर। राजधानी के चर्चित अमायरा केस में दस दिन बाद भी पुलिस की कार्रवाई धीमी होने पर परिजनों में आक्रोश है। बुधवार को डिप्टी सीएम दिया कुमारी अमायरा के माता-पिता से मिलने पहुंचीं और पूरे मामले में उचित व त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान अमायरा के पिता ने अपने मोबाइल फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, संदेश और अन्य डिजिटल सबूत डिप्टी सीएम को दिखाए।
उन्होंने स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और घटना के दिन हुए घटनाक्रम की पूरी जानकारी साझा की। अमायरा की मां ने भी स्कूल प्रशासन की भूमिका पर कई गंभीर सवाल उठाए। इससे पहले मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी परिवार से मुलाकात कर चुके हैं। फिलहाल मानसरोवर थाना पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।
स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर दी जान
राजधानी जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में हुई नौ साल की अमायरा की मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। कक्षा चार की छात्रा अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

घटना के बाद मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने जरूरी सबूत जुटाए थे। पुलिस ने स्कूल के सीसीटीवी फुटेज और मौके से मिले अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि घटना से पहले अमायरा कुछ साथियों के व्यवहार से परेशान थी, हालांकि अब तक पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
बुलिंग और ऑडियो क्लिप्स से बढ़े सवाल
घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी वीडियो और ऑडियो क्लिप्स ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। परिवार द्वारा जारी एक ऑडियो में अमायरा स्कूल नहीं जाने की जिद करती सुनाई दे रही है, जिससे संकेत मिलता है कि वह मानसिक दबाव में थी।
कक्षा के कुछ बच्चों पर बुलिंग के आरोप भी लगे हैं, लेकिन जांच की रफ्तार सुस्त दिख रही है। दस दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी गंभीर घटना के बावजूद जांच ठोस दिशा में क्यों नहीं बढ़ रही है।











