अमेरिका-चीन व्यापारिक तनाव में राहत, ट्रंप ने पोर्ट फीस किया निलंबित, जानें वजह

अमेरिका-चीन व्यापारिक तनाव में राहत, ट्रंप ने पोर्ट फीस किया निलंबित, जानें वजह

अमेरिका और चीन ने व्यापारिक तनाव कम किया। ट्रंप ने पोर्ट फीस निलंबित कर जहाजों पर शुल्क हटाया। इससे शिपिंग लागत घटेगी और सप्लाई चेन सुधरेगी। विपक्ष और ट्रेड यूनियनों ने इस कदम की आलोचना की।

World News: अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में बढ़ते व्यापारिक तनाव में राहत की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी जहाजों पर लगाए गए पोर्ट फीस को निलंबित कर दिया है। यह फैसला दक्षिण कोरिया में हाल ही में हुई ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद लिया गया। दोनों देशों ने व्यापारिक तनाव को कम करने और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है। पोर्ट फीस हटाने के बाद अमेरिका और चीन दोनों ने अपने जहाजों पर शुल्क न लगाने का फैसला किया है।

ट्रंप के कदम पर विरोध

हालांकि, अमेरिका में इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का कहना है कि ट्रंप चीन के सामने नरम पड़ गए हैं। अमेरिका के कई ट्रेड यूनियनों ने भी पोर्ट फीस निलंबन को गलत कदम बताया है। उनका कहना है कि यह अमेरिका के समुद्री हितों के लिए खतरा है और चीन को गलत संदेश जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अमेरिकी व्यापारिक रणनीति और नौसैनिक शक्ति कमजोर हो सकती है।

पोर्ट फीस निलंबन से व्यापार और लागत पर असर

जहाज मालिकों का मानना है कि पोर्ट फीस के निलंबन से शिपिंग लागत घटेगी और व्यापार में सुधार आएगा। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन स्थिर होगी और दोनों देशों के व्यापारिक हितों को लाभ मिलेगा। इसके बावजूद ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी कि इससे अमेरिका की समुद्री ताकत कमजोर होगी और चीन को यह दिखाएगा कि अमेरिका अपने वादों पर कायम नहीं है।

अमेरिकी विपक्षी सांसदों का रुख

अमेरिकी कांग्रेस में विपक्षी सांसदों ने भी इस फैसले पर आलोचना की है। इलिनॉय से डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति और कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट जॉन गरमेंडी ने कहा कि पोर्ट फीस हटाना अमेरिका के समुद्री उद्योग के पुनर्निर्माण में बाधा डाल सकता है। उन्होंने लिखा कि सेक्शन 301 के तहत लगाए गए शुल्क अमेरिका के हित में थे और इसे रोकने या घटाने से लंबी अवधि में अमेरिका की स्थिति कमजोर होगी।

क्या है पोर्ट फीस का इतिहास 

अमेरिका ने चीन में बने, चीनी स्वामित्व वाले या चीन से जुड़े जहाजों के अमेरिकी बंदरगाह पर रुकने के लिए 50 डॉलर प्रति टन का पोर्ट फीस लगाया था। यह शुल्क 14 अक्टूबर से लागू हुआ था। इसे अमेरिका की जांच और चीन की सब्सिडी तथा संरक्षणवादी नीतियों के आधार पर लगाया गया था। इसका मकसद चीन को वैश्विक जहाज निर्माण में असत्य लाभ लेने से रोकना था।

ट्रेड यूनियनों की चेतावनी

अमेरिका के ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त बयान जारी किया कि पोर्ट फीस का निलंबन चीन को उसकी शिकारी नीतियों के लिए छूट देगा। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी समुद्री क्षेत्र के पुनर्निर्माण और शिपयार्ड्स को नुकसान पहुंचेगा। यूनियनों ने चेताया कि यह मजदूरों और राष्ट्रीय हितों को अल्पकालिक राजनीतिक हितों के लिए खतरे में डालता है।

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