ब्रिटिश-भारतीय कारोबारी अमित भाटिया जेफ बेजोस और अन्य निवेशकों के साथ लिवरपूल फुटबॉल क्लब की करीब 30% हिस्सेदारी खरीदने के लिए लगभग 17 हजार करोड़ रुपये की बोली लगा रहे हैं। सौदा पूरा होने पर FSG की हिस्सेदारी घटकर करीब 67% रह सकती है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: ब्रिटिश-भारतीय कारोबारी अमित भाटिया इंग्लिश प्रीमियर लीग के दिग्गज फुटबॉल क्लब लिवरपूल में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भाटिया ने अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और अन्य निवेशकों के साथ मिलकर क्लब की करीब 30% हिस्सेदारी के लिए लगभग 17 हजार करोड़ रुपये की बोली लगाई है। अगर यह सौदा पूरा होता है, तो लिवरपूल के स्वामित्व ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
लिवरपूल में 30% हिस्सेदारी पर नजर
लिवरपूल फुटबॉल क्लब का मौजूदा नियंत्रण फेनवे स्पोर्ट्स ग्रुप यानी FSG के पास है। FSG के पास क्लब की लगभग 97% हिस्सेदारी बताई जाती है, जबकि शेष करीब 3% हिस्सा डायनेस्टी इक्विटी के पास है। प्रस्तावित सौदे के बाद FSG की हिस्सेदारी घटकर लगभग 67% रह सकती है। वहीं अमित भाटिया और उनके सहयोगियों के कंसोर्टियम के पास करीब 30% हिस्सेदारी आ सकती है।
इस प्रस्तावित निवेश से लिवरपूल के स्वामित्व में कोई तत्काल नियंत्रण परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन क्लब में नए बड़े निवेशकों की एंट्री जरूर होगी। प्रीमियर लीग क्लबों की लगातार बढ़ती कारोबारी कीमत के बीच इस संभावित सौदे को फुटबॉल जगत की एक महत्वपूर्ण डील के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन हैं अमित भाटिया?
अमित भाटिया ब्रिटिश-भारतीय कारोबारी और निवेश बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। वह भारत के प्रमुख स्टील कारोबारी लक्ष्मी मित्तल के दामाद हैं। भाटिया ने 2004 में लक्ष्मी मित्तल की बेटी वनिषा मित्तल से शादी की थी।
फुटबॉल से उनका जुड़ाव नया नहीं है। वह लंबे समय से इंग्लैंड के क्लब फुटबॉल से जुड़े रहे हैं और खास तौर पर क्वींस पार्क रेंजर्स यानी QPR के साथ उनका महत्वपूर्ण संबंध रहा है। मित्तल परिवार ने 2007 में लंदन स्थित QPR में हिस्सेदारी खरीदी थी और इसके बाद अमित भाटिया क्लब के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका में आए।
QPR में निभा चुके हैं अहम भूमिका
अमित भाटिया 2007 में QPR के वाइस चेयरमैन बने थे। इसके बाद 2018 से 2023 तक उन्होंने क्लब के चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान वह क्लब के प्रशासन, कारोबारी रणनीति और फुटबॉल से जुड़े फैसलों में सक्रिय रहे।
लिवरपूल में संभावित निवेश पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भाटिया ने 2026 में करीब 19 साल तक QPR के साथ जुड़े रहने के बाद डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया। बताया गया है कि उन्होंने QPR में अपनी हिस्सेदारी मौजूदा मालिक रुबेन ग्नानालिंगम को ट्रांसफर कर दी। इससे संकेत मिलता है कि उनका ध्यान अब एक बड़े और वैश्विक स्तर के फुटबॉल निवेश की ओर है।
जेफ बेजोस भी कंसोर्टियम में शामिल
प्रस्तावित लिवरपूल निवेश की सबसे बड़ी खासियत इसमें शामिल बड़े नाम हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस इस कंसोर्टियम का हिस्सा बताए जा रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी और तकनीकी उद्यमियों में शामिल बेजोस के लिए खेल क्षेत्र में निवेश कोई नया विचार नहीं है।
कंसोर्टियम में फेसबुक के सह-संस्थापक एडुआर्डो सेवरिन का नाम भी शामिल बताया गया है। इसके अलावा लक्ष्मी मित्तल इस सौदे को वित्तीय समर्थन देने वाले प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल हैं।
इस तरह प्रस्तावित समूह में टेक्नोलॉजी, निवेश, उद्योग और फुटबॉल के क्षेत्र से जुड़े बेहद प्रभावशाली नाम एक साथ दिखाई दे रहे हैं। हालांकि किसी भी बड़े अधिग्रहण या हिस्सेदारी सौदे को अंतिम रूप दिए जाने से पहले संबंधित पक्षों और नियामकीय प्रक्रियाओं से मंजूरी जरूरी होगी।

16 साल में कई गुना बढ़ी लिवरपूल की कीमत
लिवरपूल की कारोबारी वैल्यू में पिछले डेढ़ दशक में जबरदस्त वृद्धि हुई है। FSG ने अक्टूबर 2010 में लिवरपूल को टॉम हिक्स और जॉर्ज गिलेट से करीब 30 करोड़ पाउंड में खरीदा था। भारतीय मुद्रा में उस समय की तुलना में यह राशि आज के हिसाब से करीब 3,800 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है।
FSG के स्वामित्व में लिवरपूल ने मैदान पर भी बड़ी सफलता हासिल की। क्लब ने प्रीमियर लीग का खिताब जीता और UEFA चैंपियंस लीग में भी सफलता हासिल की। इन उपलब्धियों के साथ क्लब की वैश्विक लोकप्रियता, कमर्शियल कमाई और ब्रांड वैल्यू में बड़ा इजाफा हुआ।
इसी वजह से आज लिवरपूल की कीमत 2010 के मुकाबले कई गुना अधिक मानी जाती है। प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री FSG के लिए अपने निवेश से बड़ा रिटर्न हासिल करने का अवसर भी हो सकती है।
पहले भी लिवरपूल में बाहरी निवेश आया
लिवरपूल में FSG का दबदबा बरकरार रहने के बावजूद पिछले कुछ वर्षों में क्लब के स्वामित्व ढांचे में बाहरी निवेशकों की एंट्री हुई है। 2023 में डायनेस्टी इक्विटी ने लिवरपूल में अल्पसंख्यक हिस्सेदारी खरीदी थी।
उस समय क्लब की वैल्यू करीब 3.3 अरब पाउंड बताई गई थी। प्रस्तावित नई डील इससे कहीं बड़े मूल्यांकन की ओर संकेत करती है। अगर 30% हिस्सेदारी के लिए करीब 17 हजार करोड़ रुपये का सौदा तय होता है, तो यह क्लब के बढ़ते वैश्विक कारोबारी महत्व को दर्शाएगा।
प्रीमियर लीग क्लबों की कीमत में तेज उछाल
इंग्लिश प्रीमियर लीग में पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्लबों की वैल्यूएशन में तेजी देखी गई है। 2022 में चेल्सी की बिक्री करीब 4.25 अरब पाउंड में हुई थी। इसके बाद 2024 में ब्रिटिश कारोबारी जिम रैटक्लिफ ने मैनचेस्टर यूनाइटेड में 25% हिस्सेदारी खरीदी। उस सौदे में क्लब का मूल्यांकन करीब 4.3 अरब पाउंड आंका गया था।
प्रीमियर लीग की वैश्विक लोकप्रियता, टीवी अधिकारों से होने वाली कमाई, स्पॉन्सरशिप, डिजिटल दर्शक और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्लबों की मजबूत पकड़ ने उनकी कीमत को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही कारण है कि दुनिया के बड़े कारोबारी और निवेशक अब फुटबॉल क्लबों को सिर्फ खेल संस्थान नहीं, बल्कि वैश्विक मनोरंजन और बिजनेस ब्रांड के रूप में देख रहे हैं।
लिवरपूल के लिए क्या मायने रखता है यह निवेश?
अगर अमित भाटिया, जेफ बेजोस और उनके सहयोगियों की प्रस्तावित डील पूरी होती है, तो लिवरपूल को नए पूंजी निवेश और वैश्विक कारोबारी नेटवर्क का लाभ मिल सकता है। बेजोस की तकनीकी और कारोबारी पृष्ठभूमि तथा भाटिया का फुटबॉल प्रशासन का अनुभव इस साझेदारी को खास बनाता है।
हालांकि, अल्पसंख्यक हिस्सेदारी खरीदने का मतलब क्लब का नियंत्रण बदलना नहीं होगा। FSG के पास बहुमत हिस्सेदारी बनी रहने की स्थिति में रणनीतिक नियंत्रण उसी के हाथ में रहेगा। फिर भी इतने बड़े निवेशकों का शामिल होना भविष्य में क्लब के कारोबारी विस्तार, वैश्विक साझेदारियों और निवेश रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित सौदा अंतिम रूप लेता है या नहीं। अगर 30% हिस्सेदारी की करीब 17 हजार करोड़ रुपये की डील पूरी होती है, तो यह लिवरपूल के इतिहास में सबसे चर्चित निवेश सौदों में शामिल हो सकती है। साथ ही यह भी दिखाएगी कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय फुटबॉल क्लबों में से एक की कारोबारी कीमत पिछले डेढ़ दशक में किस स्तर तक पहुंच चुकी है।











