फरीदाबाद में स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रतिबंधित मांझे की बिक्री की शिकायतें सामने आई हैं। पिछले वर्ष इसके कारण कई लोग घायल हुए थे और एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी। प्रशासन से अभियान की मांग है।
फरीदाबाद: स्वतंत्रता दिवस से पहले शहर में पतंगबाजी का उत्साह बढ़ने के साथ प्रतिबंधित मांझे की बिक्री को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाजारों में सिंथेटिक और नायलोन धागे की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। पिछले वर्ष ऐसे मांझे से कई हादसे हुए थे, जिसके बाद प्रशासन से दुकानों की जांच, बिक्री पर रोक और लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की मांग की जा रही है।
पतंगबाजी के साथ बढ़ा प्रतिबंधित मांझे का खतरा
स्वतंत्रता दिवस के आसपास फरीदाबाद में पतंगबाजी बढ़ जाती है। इसी के साथ प्रतिबंधित मांझे की बिक्री को लेकर भी चिंता सामने आने लगी है। शहर के कुछ बाजारों में ऐसे धागे की बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं, जिन्हें प्रशासन की ओर से प्रतिबंधित किया गया है।

जिला प्रशासन पहले ही प्रतिबंधित मांझे और नायलोन से बने सिंथेटिक धागे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर रोक लगा चुका है। इसके बावजूद बाजारों में इसकी उपलब्धता की शिकायतें प्रशासन के लिए चुनौती बन रही हैं।
खासकर 15 अगस्त के दौरान बड़ी संख्या में लोग पतंग उड़ाते हैं। ऐसे में यदि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो राहगीरों, बाइक सवारों और पक्षियों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
पिछले साल हुए थे कई गंभीर हादसे
प्रतिबंधित मांझे से होने वाले हादसों का असर पिछले वर्ष भी देखने को मिला था। जुलाई 2025 में करीब 20 लोग मांझे की चपेट में आकर घायल हुए थे। इनमें डॉक्टर और पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
28 जुलाई को दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे के पलवल एलिवेटेड मार्ग पर मांझे से बचने की कोशिश के दौरान एक ऑटो पलट गया था। इस हादसे में फरीदाबाद की जवाहर कॉलोनी निवासी एक युवक की मौत हो गई थी।
अगस्त 2025 में भी ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया था। सेक्टर-62 के पास बाइक से जा रहे 36 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर जवाहर की गर्दन प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आ गई थी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। मांझे को हटाने की कोशिश में उनके हाथ की उंगलियां भी कट गई थीं।
दुकानों की जांच और सख्त कार्रवाई की जरूरत
पिछले वर्ष अगस्त में सीएम फ्लाइंग ने बल्लभगढ़ की पतंग दुकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान प्रतिबंधित चीनी मांझा बरामद किया गया था और तीन दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे।
इस बार स्वतंत्रता दिवस से पहले अभी तक बड़े स्तर पर कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में बाजारों में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग उठ रही है। प्रशासन और पुलिस के सामने दुकानों पर प्रतिबंधित धागे के स्टॉक की जांच करने के साथ बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चुनौती है।
प्रतिबंधित मांझा केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों के लिए भी गंभीर खतरा है। इसकी धार से पक्षियों के पंख और शरीर कटने की घटनाएं सामने आती रही हैं। सड़क पर यह दोपहिया वाहन चालकों की गर्दन या शरीर में उलझकर गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रशासन की ओर से बाजारों में निगरानी बढ़ाने, प्रतिबंधित मांझे की बिक्री रोकने और लोगों को सुरक्षित पतंगबाजी के लिए जागरूक करने की जरूरत है। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इस खतरे को रोकने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।












