उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर हुए आंदोलन के बाद अब विश्वविद्यालय के सहायक प्रॉक्टर को कथित तौर पर फोन पर धमकी देने का मामला सामने आया है। सहायक प्रॉक्टर डॉ. मोहम्मद नैयर रहमान की शिकायत पर पुलिस ने आरिज खान और सकलैन नाम के दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फोन पर बातचीत के दौरान उन्हें जान-माल के नुकसान की धमकी दी गई। इसके अलावा बातचीत की रिकॉर्डिंग बनाकर इंस्टाग्राम पर साझा करने का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर कई दिनों तक प्रदर्शन चला था और आंदोलन के दौरान आरिज खान को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
शिकायत के मुताबिक, डॉ. मोहम्मद नैयर रहमान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कॉमर्स विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं और सहायक प्रॉक्टर के पद पर भी कार्यरत रहे हैं। उन्होंने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि 9 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:30 बजे उनके मोबाइल फोन पर एक कॉल आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान सकलैन के रूप में बताई। आरोप है कि उसने बातचीत के दौरान कहा कि वह आरिज खान के साथ उनसे मिलने आएगा। इसके बाद सरकारी कार्यों के निर्वहन को लेकर उनसे हिसाब बराबर करने जैसी बात कही गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें भविष्य में नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई। डॉ. रहमान ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए पुलिस से कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की।
शिकायत में फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग का भी उल्लेख किया गया है। सहायक प्रॉक्टर का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना बातचीत रिकॉर्ड की गई और बाद में उसे इंस्टाग्राम पर साझा कर दिया गया। उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधि से उनके और उनके परिवार के बीच असुरक्षा की स्थिति पैदा हो सकती है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सकलैन और आरिज खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित धमकी और रिकॉर्डिंग साझा करने के मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं।
इस मामले में आरिज खान का नाम इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद सुर्खियों में आए थे। छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में कई दिनों तक प्रदर्शन हुआ था। छात्रों की मांग थी कि लंबे समय से नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं और छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को फिर से सक्रिय किया जाए। इसी आंदोलन के दौरान कुछ युवकों को पूछताछ के लिए प्रॉक्टर कार्यालय लाया गया था। पुलिस रिकॉर्ड में आरिज खान के खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमों का जिक्र सामने आने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। इसके बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने उनकी रिहाई की मांग भी उठाई थी। हालांकि, मौजूदा मामले में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। चुनाव के जरिए छात्र अपनी समस्याओं को उठाने और प्रशासन के सामने अपनी बात रखने के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। जब चुनाव लंबे समय तक नहीं होते, तो छात्रों के बीच प्रतिनिधित्व और संवाद को लेकर सवाल उठते हैं। AMU में भी छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाया और अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाई। आंदोलन के दौरान परिसर में तनाव की स्थिति भी बनी और कुछ मौकों पर विश्वविद्यालय के गेट बंद किए जाने तथा उन्हें खुलवाने को लेकर विवाद सामने आया था।
इस आंदोलन के बीच आरिज खान की हिरासत का मामला भी प्रदर्शन का एक अहम मुद्दा बन गया था। छात्रों ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए प्रॉक्टर कार्यालय के बाहर विरोध जताया था। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र नेताओं, प्रशासन और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति पर चर्चा हुई। हालांकि, छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का अंत प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के बाद हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव कराने की घोषणा की और प्रॉक्टर के पद पर भी बदलाव किया। चुनाव की घोषणा के बाद प्रदर्शन समाप्त होने की खबर सामने आई थी। अब इसी घटनाक्रम के बाद सहायक प्रॉक्टर को कथित धमकी देने की शिकायत दर्ज होने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए छात्र आंदोलन और परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर सकते हैं, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारियां निभाने और संस्थान की व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है। लेकिन किसी भी पक्ष के बीच विवाद होने पर धमकी, दबाव या हिंसा के आरोपों की जांच कानून के मुताबिक की जानी चाहिए। इस मामले में भी पुलिस की भूमिका शिकायत के आधार पर तथ्यों की जांच करना, संबंधित लोगों के बयान लेना और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करना है। केवल एफआईआर दर्ज होने से आरोप साबित नहीं हो जाते। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर होगी।
फोन कॉल और सोशल मीडिया पर रिकॉर्डिंग साझा किए जाने के आरोपों ने इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। पुलिस यह जांच कर सकती है कि कथित कॉल किस नंबर से की गई, बातचीत की रिकॉर्डिंग कहां और किस तरह साझा हुई तथा सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री शिकायत में लगाए गए आरोपों से मेल खाती है या नहीं। ऐसे मामलों में मूल रिकॉर्डिंग, कॉल संबंधी विवरण और सोशल मीडिया पोस्ट की प्रमाणिकता की जांच अहम होती है। किसी बातचीत का छोटा हिस्सा सामने आने पर उसके पूरे संदर्भ को समझना भी जरूरी होता है। इसलिए जांच एजेंसी को उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही निष्कर्ष तक पहुंचना होगा।
सहायक प्रॉक्टर ने अपनी शिकायत में खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। किसी सरकारी या शैक्षणिक संस्थान में जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारी को यदि धमकी मिलने की शिकायत होती है, तो पुलिस के लिए उसकी गंभीरता का आकलन करना जरूरी होता है। साथ ही, शिकायत में नामजद लोगों के पक्ष और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करना भी निष्पक्ष कार्रवाई का हिस्सा है। इस मामले में पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच उपनिरीक्षक विक्रम सिंह को सौंपी है। क्षेत्राधिकारी सर्वम सिंह के अनुसार, केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
फिलहाल इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतकर्ता ने फोन पर धमकी देने और रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। आरिज खान का नाम छात्रसंघ आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में भी सामने आया था। अब सहायक प्रॉक्टर की शिकायत के बाद उनके खिलाफ दर्ज नए मुकदमे में जांच के नतीजों पर नजर रहेगी। पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि फोन पर हुई बातचीत में क्या कहा गया, रिकॉर्डिंग किसने साझा की और शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं।










