अरुणाचल प्रदेश के पांगिन स्थित संगम तिनाली में ILP जांच अभियान के दौरान 150 से ज्यादा लोग बिना वैध इनर लाइन परमिट पाए गए। ST बचाओ आंदोलन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नियमों के पालन और जनजातीय हितों की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में इनर लाइन परमिट (ILP) नियमों के पालन को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। राज्य के सियांग जिले के पांगिन क्षेत्र में शुक्रवार को चलाए गए एक विशेष जांच अभियान के दौरान 150 से अधिक लोग बिना वैध इनर लाइन परमिट के पाए गए। यह कार्रवाई सांगम तिनाली चेकपॉइंट पर की गई, जहां गैर-स्थानीय यात्रियों के दस्तावेजों की गहन जांच की गई।
इस अभियान का नेतृत्व ST बचाओ आंदोलन (ST Bachao Andolan) की सियांग जिला इकाई ने किया। अभियान में जिला पुलिस और पांगिन पुलिस ने भी सक्रिय सहयोग दिया। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान राज्य में प्रवेश करने वाले और यात्रा कर रहे लोगों के ILP दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई।
यह कार्रवाई अरुणाचल प्रदेश में बढ़ती अवैध आवाजाही और स्थानीय जनजातीय हितों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक सतर्कता का हिस्सा मानी जा रही है।
क्या है इनर लाइन परमिट (ILP)?
इनर लाइन परमिट यानी ILP एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जो भारत के कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में प्रवेश के लिए गैर-स्थानीय नागरिकों के लिए अनिवार्य होता है।
अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर जैसे राज्यों में यह व्यवस्था स्थानीय जनजातीय संस्कृति, सामाजिक पहचान और संसाधनों की सुरक्षा के उद्देश्य से लागू की गई है।
अरुणाचल प्रदेश में किसी भी गैर-स्थानीय व्यक्ति को राज्य में प्रवेश करने या कुछ समय तक रहने के लिए वैध ILP लेना जरूरी होता है। बिना परमिट के प्रवेश करना कानून का उल्लंघन माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ILP प्रणाली पूर्वोत्तर राज्यों की सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सांगम तिनाली चेकपॉइंट पर हुई व्यापक जांच
शुक्रवार को चलाए गए अभियान के दौरान जांच टीमों ने सांगम तिनाली से गुजरने वाले वाहनों और यात्रियों की जांच की।
गैर-स्थानीय यात्रियों से उनके पहचान पत्र, यात्रा दस्तावेज और ILP परमिट मांगे गए। जांच के दौरान 150 से अधिक लोग ऐसे पाए गए, जिनके पास वैध परमिट नहीं था या जिनके दस्तावेज अधूरे थे।
अधिकारियों ने बताया कि कई यात्रियों को नियमों की जानकारी नहीं थी, जबकि कुछ लोग बिना अनुमति राज्य में प्रवेश करते पाए गए।
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभियान शांतिपूर्ण तरीके से चलाया गया और पूरे दौरान कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही।

पुलिस ने दी सख्त चेतावनी
सियांग जिले के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) टोगुम गोंगो ने अभियान में सहयोग करने वाले स्वयंसेवकों और पुलिस टीम की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ILP नियमों का पालन करना सभी गैर-स्थानीय नागरिकों के लिए अनिवार्य है और भविष्य में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
DSP गोंगो ने कहा, “हम लोगों से अपील करते हैं कि वे राज्य के नियमों का सम्मान करें और बिना वैध दस्तावेज के यात्रा करने से बचें। यदि उल्लंघन जारी रहता है, तो आगे और सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन स्थानीय समुदायों के हितों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
ST बचाओ आंदोलन ने बताई कार्रवाई की वजह
ST बचाओ आंदोलन की सियांग जिला इकाई ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ILP नियमों के पालन को मजबूत करना और राज्य के आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा करना है।
संगठन के अध्यक्ष कामंग दुपाक के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में स्वयंसेवकों ने पुलिस के साथ मिलकर काम किया।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाहरी लोगों की अनियंत्रित आवाजाही से स्थानीय जनजातीय संस्कृति, संसाधनों और रोजगार पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि ILP व्यवस्था केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है।
अरुणाचल प्रदेश में ILP क्यों है महत्वपूर्ण?
अरुणाचल प्रदेश भारत के उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करते हैं। यहां की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक जीवनशैली को संरक्षित रखने के लिए ILP व्यवस्था लागू की गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर राज्यों में जनसंख्या संतुलन और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस तरह की व्यवस्थाएं बेहद जरूरी हैं।
स्थानीय संगठनों का कहना है कि यदि ILP नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया गया, तो भविष्य में सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
बढ़ रही है निगरानी और जांच
हाल के वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में ILP जांच अभियानों की संख्या बढ़ी है। प्रशासन और स्थानीय संगठन समय-समय पर विभिन्न चेकपॉइंट्स पर अभियान चलाते रहते हैं।
विशेष रूप से त्योहारों, पर्यटन सीजन और बड़े आयोजनों के दौरान गैर-स्थानीय लोगों की संख्या बढ़ने पर निगरानी और कड़ी कर दी जाती है।
सरकार डिजिटल ILP प्रणाली को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि परमिट जारी करने और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके।
स्थानीय लोगों ने किया समर्थन
पांगिन में चलाए गए इस अभियान को स्थानीय समुदायों का भी समर्थन मिला।
कई नागरिकों ने कहा कि राज्य की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए ILP नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि बाहरी लोगों के प्रवेश पर नियंत्रण से अवैध गतिविधियों और संसाधनों के दुरुपयोग को भी रोका जा सकता है।
हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि पर्यटकों और यात्रियों को ILP नियमों की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाने चाहिए, ताकि अनजाने में नियमों का उल्लंघन न हो।
पर्यटन और प्रशासन के बीच संतुलन की चुनौती
अरुणाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों, नदियों और जनजातीय संस्कृति के कारण तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन रहा है।
ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल परमिट सिस्टम, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए इस संतुलन को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
भविष्य में और सख्ती के संकेत
सियांग जिले में हुई इस कार्रवाई के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में ILP नियमों के उल्लंघन पर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रशासन ने साफ किया है कि बिना वैध परमिट राज्य में प्रवेश करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल, पांगिन में चलाया गया यह अभियान अरुणाचल प्रदेश में ILP व्यवस्था को लेकर प्रशासन और स्थानीय संगठनों की गंभीरता को दर्शाता है।
राज्य सरकार और स्थानीय समुदाय दोनों का मानना है कि सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और स्थानीय हितों की रक्षा के लिए ILP व्यवस्था का प्रभावी पालन बेहद जरूरी है।









