असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर: भूपेन बोरा ने कुछ ही घंटों में लिया यू-टर्न, जानिए पूरी कहानी

Bhupen Bora ने असम की राजनीतिक गलियारों में बड़ा उलटफेर करते हुए कुछ ही घंटों में यू-टर्न लिया। जानें उनके फैसले के पीछे की वजह, राजनीतिक असर और राज्य की सियासी

असम की राजनीति में आज एक तेज और चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला, जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने अपने पद से इस्तीफा दिया और कुछ ही घंटों में अपने फैसले को वापस ले लिया। 

Bhupen Borah Withdrawn Resignation: असम की राजनीति में आज एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों के भीतर अपना फैसला वापस ले लिया। दिन की शुरुआत में इस्तीफा और शाम तक वापसी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इस पूरे घटनाक्रम को असम कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान और नेतृत्व स्तर पर सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस्तीफे की शुरुआत

भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा। इस्तीफे में उन्होंने पार्टी में खुद को नजरअंदाज किए जाने और सम्मान न मिलने की बात उठाई। उन्होंने साफ किया कि संगठन में उनकी अहमियत को कम आंका गया। इस कदम को पार्टी के अंदर असंतोष और नेतृत्व पर सवाल उठाने वाला माना गया।

हालांकि, कुछ ही घंटों बाद एआईसीसी के राज्य प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि हाईकमान की दखलअंदाजी के बाद भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया। कई दौर की बातचीत, समझाइश और भरोसे के बाद यह यू-टर्न हुआ।

नेताओं की दौड़ और बैठकें

इस्तीफे की खबर के तुरंत बाद गुवाहाटी स्थित भूपेन बोरा के आवास पर कांग्रेस नेताओं का आना शुरू हो गया। प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई, वरिष्ठ नेता और सहयोगी दलों के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बोरा को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने का भरोसा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भूपेन बोरा ने साफ किया कि वह पार्टी में बने रहेंगे और संगठन के लिए काम जारी रखेंगे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस ने टूट की स्थिति को टालने और संगठन को एकजुट बनाए रखने के लिए त्वरित कदम उठाए।

इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बोरा का इस्तीफा पार्टी की अंदरूनी हालत का संकेत है। सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में आम परिवार से आने वाले नेता आगे नहीं बढ़ पाते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भूपेन बोरा ने भाजपा में शामिल होने के लिए उनसे संपर्क नहीं किया। सरमा ने कहा, "बोरा कांग्रेस के ऐसे आखिरी बड़े हिंदू नेता थे, जो न विधायक थे और न मंत्री। उनका इस्तीफा कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष को दिखाता है।

इस्तीफे के सियासी मायने

भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके इस्तीफे और लौटने से साफ है कि पार्टी के भीतर असंतोष तो है, लेकिन फिलहाल टूटने की स्थिति टल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व के प्रति भरोसे को परखने वाला संकेत है। 

भाजपा ने पहले ही दावा किया है कि आने वाले समय में कांग्रेस के कुछ विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। वहीं, कांग्रेस खेमे का कहना है कि संगठन एकजुट है और आगामी चुनाव में सभी नेता संगठन के साथ काम करेंगे।

Leave a comment