असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। पार्टी ने प्रियंका गांधी को असम स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिससे पार्टी के भीतर से उठ रही पुरानी मांग को पूरा किया गया है।
असम चुनाव 2026: कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष नियुक्त कर पार्टी के भीतर लंबे समय से उठ रही मांग को पूरा किया है। पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रियंका गांधी को अधिक जिम्मेदारी मिलने से और अगर वह जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम करें, तो कांग्रेस को चुनावी मोर्चे पर बेहतर लाभ हो सकता है।
प्रियंका गांधी पर पार्टी का भरोसा
असम में इस साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। यह राज्य उन कुछ जगहों में से एक है, जहां कांग्रेस अभी भी संगठन के स्तर पर मजबूत स्थिति में है। 10 साल पहले तक कांग्रेस असम में सत्ता में थी और आज भी यह मुख्य विपक्षी ताकत बनी हुई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रियंका गांधी की नियुक्ति असम के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी को वहां जमीनी स्तर पर मजबूत और संगठित रणनीति की आवश्यकता है। राज्य में कांग्रेस के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वह पुराने संगठनात्मक कमजोरियों को दूर कर विधानसभा चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन कर सके।
प्रियंका गांधी भले ही नवंबर 2024 में वायनाड उपचुनाव के माध्यम से लोकसभा पहुंची हों, लेकिन उनके राजनीतिक अनुभव को कम आंकना गलत होगा। राहुल गांधी के राजनीति में कदम रखने के समय प्रियंका ही चुनावी रणनीति की कमान संभालती थीं। उनके नेतृत्व और कुशल वक्तव्य के कारण कांग्रेस को कई मौकों पर फायदा हुआ।
कांग्रेस के भीतर यह भरोसा है कि प्रियंका अगर पूरी तरह असम में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, तो पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिलने के साथ-साथ चुनावी रणनीति में भी सुधार होगा।

यूपी का अनुभव और असम की चुनौती
प्रियंका गांधी को 2019 लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाया गया था, और पूर्वी यूपी के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी उन पर थी। हालांकि उस समय पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर पर नहीं रहा। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि यूपी में कांग्रेस का संगठन कमजोर था, और उस दौरान प्रियंका के पास जमीनी समर्थन कम था।
असम में स्थिति यूपी से बेहतर है। पार्टी की स्थानीय इकाइयों का असर और कांग्रेस का सक्रिय गठबंधन वहां चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में प्रियंका की जिम्मेदारी केवल उम्मीदवारों के नाम तय करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें संगठन समन्वय और गठबंधन संतुलन बनाए रखना होगा।
स्क्रीनिंग कमिटी का मुख्य काम उम्मीदवारों के नामों का चयन करना होता है। लेकिन प्रियंका गांधी के नेतृत्व में, असम में यह भूमिका अधिक रणनीतिक और निर्णायक बन सकती है। कांग्रेस पार्टी असम में गठबंधन में उतरने वाली है और पार्टी नेतृत्व इस बार सुनिश्चित करना चाहता है कि बिहार जैसी organizational गड़बड़ी यहां न हो। प्रियंका गांधी का राजनीतिक कद और संगठनात्मक अनुभव असंतोष को कम करने और टीम में समन्वय बैठाने में मदद करेगा।










