असम सरकार के अनुसार राज्य के लगभग 3,000 किलोमीटर तटबंध कमजोर हो चुके हैं और उन्हें जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत है। सरकार का कहना है कि मजबूत तटबंध ही हर साल आने वाली बाढ़ से लोगों और कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
गुवाहाटी: असम में हर साल आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए बनाए गए तटबंधों (Embankments) की स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। राज्य के जल संसाधन मंत्री सुसांत बोरगोहाईं ने विधानसभा में जानकारी दी कि असम में बने कुल लगभग 4,800 किलोमीटर तटबंधों में से करीब 3,000 किलोमीटर हिस्से की बाढ़ से सुरक्षा क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। इन तटबंधों को जल्द मरम्मत या पूर्ण पुनर्निर्माण की आवश्यकता है ताकि भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तटबंधों के पुनर्वास और मजबूती के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है, क्योंकि असम हर वर्ष मानसून के दौरान गंभीर बाढ़ की चुनौती का सामना करता है।
विधानसभा में मंत्री ने दी अहम जानकारी
बुधवार को असम विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भूपेन रॉय के प्रश्न का जवाब देते हुए जल संसाधन मंत्री सुसांत बोरगोहाईं ने राज्य के तटबंधों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बाढ़ नियंत्रण और नदी कटाव को रोकने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग ने वर्षों के दौरान राज्यभर में लगभग 4,800 किलोमीटर लंबे तटबंधों का निर्माण किया है। हालांकि, समय के साथ इन संरचनाओं का एक बड़ा हिस्सा कमजोर हो गया है और अब उन्हें मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
3,000 किलोमीटर तटबंधों की क्षमता घटी
मंत्री के अनुसार, कुल 4,800 किलोमीटर तटबंधों में से लगभग 1,800 किलोमीटर तटबंधों को समय-समय पर मजबूत किया गया है, जिससे वे अभी भी प्रभावी रूप से बाढ़ से सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। लेकिन शेष करीब 3,000 किलोमीटर तटबंधों की बाढ़ रोकने की क्षमता काफी कम हो चुकी है। लगातार बारिश, नदी के तेज बहाव, मिट्टी के कटाव और लंबे समय से रखरखाव की कमी के कारण इन तटबंधों में कई स्थानों पर कमजोरी आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया तो भारी वर्षा और नदी के जलस्तर बढ़ने की स्थिति में इनके टूटने का खतरा बढ़ सकता है।
हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है असम
असम भारत के उन राज्यों में शामिल है, जहां लगभग हर वर्ष मानसून के दौरान व्यापक बाढ़ आती है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ने से हजारों गांव प्रभावित होते हैं। बाढ़ के कारण लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ता है और कृषि भूमि, सड़कें, पुल तथा सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचता है। राज्य सरकार के लिए तटबंध बाढ़ नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण साधन हैं, इसलिए उनकी मजबूती बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

क्यों कमजोर हो जाते हैं तटबंध?
विशेषज्ञों के अनुसार तटबंधों के कमजोर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लगातार बाढ़, तेज जल प्रवाह, नदी का कटाव, मिट्टी का क्षरण और वर्षों तक नियमित रखरखाव न होना प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा और अचानक बाढ़ की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, जिससे पुराने तटबंधों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी वजह से कई तटबंध अब अपनी मूल क्षमता के अनुरूप सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकता होगी पुनर्वास और मजबूती
जल संसाधन मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार कमजोर तटबंधों की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से मजबूत करने और आवश्यक स्थानों पर पुनर्निर्माण करने की दिशा में काम करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मरम्मत ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और बेहतर निर्माण सामग्री का उपयोग भी जरूरी होगा, ताकि भविष्य में आने वाली बाढ़ का प्रभाव कम किया जा सके।
किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों पर सबसे अधिक असर
असम की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। बाढ़ आने पर सबसे अधिक नुकसान किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को होता है। तटबंध टूटने की स्थिति में खेतों में पानी भर जाता है, जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं। कई बार गांवों का संपर्क भी कट जाता है और लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ती है। इसी कारण मजबूत तटबंध केवल बाढ़ नियंत्रण का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
जलवायु परिवर्तन के दौर में नई रणनीति की जरूरत
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा और अचानक बाढ़ की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक हो रही हैं। ऐसी स्थिति में केवल पुराने तटबंधों पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। इसमें तटबंधों का आधुनिकीकरण, नदी प्रबंधन, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और समय रहते चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना भी शामिल होना चाहिए।
भविष्य की तैयारी पर रहेगा फोकस
असम सरकार का मानना है कि तटबंधों की समय पर मरम्मत और पुनर्निर्माण से बाढ़ के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि यदि कमजोर तटबंधों को जल्द मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में भारी वर्षा के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है। राज्य सरकार अब तटबंधों के पुनर्वास और बाढ़ प्रबंधन को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।











