अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री पर CCPA ने Meta, Amazon, Flipkart और Meesho समेत आठ कंपनियों पर ₹44 लाख का जुर्माना लगाया है। बिना ETA और गलत फ्रीक्वेंसी जानकारी को उपभोक्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया।
New Delhi: देश में ई-कॉमर्स के जरिए बिना मंजूरी और गलत जानकारी के वॉकी-टॉकी (Walkie-Talkie) बेचे जाने के मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। प्राधिकरण ने Meta, Amazon, Flipkart और Meesho जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ₹10-10 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा Chimiya, JioMart, Talk Pro और Maskman Toys पर ₹1-1 लाख का जुर्माना ठोका गया है। कुल मिलाकर आठ कंपनियों पर ₹44 लाख का आर्थिक दंड लगाया गया है। यह कार्रवाई उपभोक्ता सुरक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
कैसे सामने आया Illegal Walkie-Talkie Sale मामला
CCPA ने इस पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे थे, जिनके पास न तो जरूरी ETA यानी Equipment Type Approval सर्टिफिकेट था और न ही उनकी फ्रीक्वेंसी से जुड़ी सही जानकारी दी जा रही थी। कई मामलों में फ्रीक्वेंसी की जानकारी पूरी तरह गायब थी, जबकि कुछ प्रोडक्ट्स तय मानकों से बाहर काम कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कुल 16,970 से ज्यादा ऐसे प्रोडक्ट लिस्ट किए गए थे, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इसके बाद CCPA ने कुल 13 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए, जिनमें Meta Platforms Inc (Facebook Marketplace), Amazon, Flipkart, Meesho, JioMart, Chimiya, Talk Pro, Maskman Toys, TradeIndia, IndiaMART, Antariksh Technologies, VardaanMart और Krishna Mart शामिल थे।
कानून क्या कहता है और कहां हुआ उल्लंघन
भारतीय कानून के अनुसार, बिना लाइसेंस के सिर्फ वही वॉकी-टॉकी इस्तेमाल किए जा सकते हैं जो 446.0 से 446.2 MHz की निर्धारित फ्रीक्वेंसी बैंड में काम करते हों। इन्हें Personal Mobile Radio यानी PMR डिवाइस कहा जाता है। इसके अलावा किसी भी रेडियो फ्रीक्वेंसी डिवाइस को बेचने या आयात करने से पहले ETA सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है।
CCPA की जांच में पाया गया कि कई वॉकी-टॉकी इस तय फ्रीक्वेंसी रेंज से बाहर ऑपरेट कर रहे थे। कुछ प्रोडक्ट्स पर लाइसेंस की जरूरत से जुड़ी जानकारी ही नहीं दी गई थी, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते थे। यही नहीं, कई लिस्टिंग में भ्रामक दावे किए गए थे, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का सीधा उल्लंघन है।
बड़े प्लेटफॉर्म्स पर क्या खामियां मिलीं
जांच में अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स की भूमिका भी सामने आई। Flipkart पर हजारों ऐसे वॉकी-टॉकी लिस्ट थे, जिनकी फ्रीक्वेंसी की जानकारी या तो गलत थी या दी ही नहीं गई थी। Amazon पर भी कई लिस्टिंग बिना सही सर्टिफिकेशन के पाई गईं।
Meesho के मामले में CCPA ने पाया कि एक ही विक्रेता ने हजारों यूनिट बेच दीं, लेकिन जरूरी तकनीकी जानकारी साझा नहीं की गई। Facebook Marketplace पर बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाली लिस्टिंग सामने आईं। कुछ प्लेटफॉर्म्स ने नोटिस मिलने के बाद लिस्टिंग हटाईं, लेकिन CCPA ने साफ कहा कि सिर्फ प्रोडक्ट हटाना पर्याप्त नहीं है, भविष्य में ऐसी बिक्री रोकने के लिए मजबूत सिस्टम भी जरूरी है।
“हम सिर्फ इंटरमीडियरी हैं” वाला तर्क क्यों खारिज हुआ
कार्रवाई के दौरान कई कंपनियों ने यह दलील दी कि वे केवल एक प्लेटफॉर्म या इंटरमीडियरी हैं और प्रोडक्ट बेचने की जिम्मेदारी विक्रेताओं की है। लेकिन CCPA ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
प्राधिकरण ने कहा कि अगर कोई प्लेटफॉर्म बिक्री को बढ़ावा देता है, पेमेंट और डिलीवरी की सुविधा देता है और लिस्टिंग को प्रमोट करता है, तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह नियमों का पालन सुनिश्चित करे। केवल “प्लेटफॉर्म” होने का दावा करके जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।
नए दिशानिर्देश क्या कहते हैं
इस पूरे मामले के बाद CCPA ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए नए और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के तहत अब रेडियो उपकरणों की बिक्री से पहले फ्रीक्वेंसी और ETA सर्टिफिकेट की जांच अनिवार्य होगी।
इसके अलावा किसी भी तरह के गलत या भ्रामक विज्ञापन पर पूरी तरह रोक लगानी होगी। प्लेटफॉर्म्स को ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना होगा, ताकि नियम तोड़ने वाली लिस्टिंग तुरंत पहचानी जा सके। साथ ही, कंपनियों को समय-समय पर खुद का ऑडिट भी करना होगा, जिससे भविष्य में इस तरह की चूक न हो।
राष्ट्रीय सुरक्षा से क्यों जुड़ा है यह मामला
CCPA ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि बिना मंजूरी वाले वॉकी-टॉकी केवल उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ गंभीर मामला है। ऐसे डिवाइस पुलिस, आपदा प्रबंधन और आपात सेवाओं की संचार व्यवस्था में बाधा डाल सकते हैं।
गलत फ्रीक्वेंसी पर चलने वाले रेडियो उपकरण जरूरी सरकारी नेटवर्क में इंटरफेरेंस पैदा कर सकते हैं, जिससे आपात स्थिति में संचार प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि सरकार ने Short Range Radio Frequency Devices Rules, 2018 के तहत ETA को अनिवार्य बनाया है।










