Aye Finance IPO अगले हफ्ते ओपन, NSE-BSE पर होगी लिस्टिंग

Aye Finance IPO अगले हफ्ते खुलेगा। ₹1,010 करोड़ के इस NBFC इश्यू का प्राइस बैंड ₹122–₹129 तय हुआ है। जानें इश्यू साइज, तारीखें, लॉट साइज और GMP डिटेल।

Aye Finance IPO अगले हफ्ते खुलेगा, जिसके जरिए कंपनी ₹1,010 करोड़ जुटाएगी। NBFC ने इसका प्राइस बैंड ₹122 से ₹129 रखा है। इश्यू में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल दोनों शामिल हैं।

IPO Update: नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी आय फाइनेंस का आईपीओ अगले हफ्ते शेयर बाजार में दस्तक देने जा रहा है। मिड और स्मॉल बिजनेस को फाइनेंस देने वाली यह कंपनी लंबे समय से बाजार में मौजूद है और अब पब्लिक इश्यू के जरिए पूंजी जुटाने की तैयारी में है। कंपनी ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹122 से ₹129 प्रति शेयर तय किया है। इस इश्यू के जरिए आय फाइनेंस कुल ₹1,010 करोड़ जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिस पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

इश्यू साइज और स्ट्रक्चर की पूरी जानकारी

आय फाइनेंस का आईपीओ दो हिस्सों में बांटा गया है। इसमें ₹710 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है, जिसके तहत करीब 5.5 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसके अलावा ₹300 करोड़ तक का ऑफर फॉर सेल (OFS) भी रखा गया है, जिसमें करीब 2.33 करोड़ शेयर मौजूदा शेयरधारकों द्वारा बेचे जाएंगे। फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम सीधे कंपनी के पास जाएगी, जबकि OFS से आने वाली राशि बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी।

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के मुताबिक, अल्फा वेव इंडिया, MAJ Invest Financial Inclusion Fund II, CapitalG और LGT Capital Invest Mauritius PCC Corporate जैसे बड़े निवेशक OFS के तहत शेयर बेच रहे हैं। इसके अलावा विक्रम जेटली व्यक्तिगत शेयरधारक के रूप में ऑफर फॉर सेल में शामिल हैं। इससे यह साफ होता है कि शुरुआती निवेशक आंशिक एग्जिट ले रहे हैं, जबकि कंपनी ग्रोथ के अगले चरण के लिए बाजार से पूंजी जुटाना चाहती है।

कंपनी का बिजनेस मॉडल क्या है

आय फाइनेंस एक NBFC है, जो देशभर में छोटे और मझोले कारोबारियों को लोन उपलब्ध कराती है। कंपनी का फोकस उन उद्यमियों पर है, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से आसानी से कर्ज नहीं मिल पाता। आय फाइनेंस मुख्य रूप से बिजनेस को चलाने और बढ़ाने के लिए लोन देती है। ये लोन मशीनरी, स्टॉक और अन्य कामकाजी संपत्तियों की गारंटी पर या प्रॉपर्टी को गिरवी रखकर दिए जाते हैं।

कंपनी मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और इससे जुड़े एग्रीकल्चर से जुड़े व्यवसायों को फाइनेंस देती है। इस डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो की वजह से कंपनी का रिस्क एक सेक्टर पर निर्भर नहीं रहता। 30 सितंबर 2025 तक आय फाइनेंस के पास 18 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 5.86 लाख से ज्यादा एक्टिव कस्टमर थे। इसी अवधि में कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹6,027.62 करोड़ तक पहुंच गया था, जो इसके मजबूत ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड को दिखाता है।

आईपीओ की टाइमलाइन और जरूरी तारीखें

आय फाइनेंस का आईपीओ सोमवार 9 फरवरी 2026 को निवेश के लिए खुलेगा और बुधवार 11 फरवरी 2026 को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया इश्यू खुलने से एक दिन पहले यानी शुक्रवार 6 फरवरी 2026 को रखी गई है। शेयरों का अलॉटमेंट गुरुवार 12 फरवरी को फाइनल होने की संभावना है। इसके बाद कंपनी के शेयर सोमवार 16 फरवरी 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बीएसई पर लिस्ट हो सकते हैं।

यह टाइमलाइन उन निवेशकों के लिए अहम है, जो लिस्टिंग गेन या लॉन्ग टर्म निवेश की रणनीति के साथ आईपीओ में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं।

लॉट साइज और रिटेल निवेश की जरूरत

आय फाइनेंस के आईपीओ में निवेशक न्यूनतम एक लॉट के लिए बोली लगा सकते हैं। एक लॉट में 116 शेयर रखे गए हैं। अपर प्राइस बैंड ₹129 के हिसाब से एक लॉट के लिए रिटेल निवेशक को कम से कम ₹14,964 का निवेश करना होगा। इसके बाद निवेश इसी के मल्टिपल में किया जा सकता है।

कंपनी ने आईपीओ में शेयरों का आवंटन भी तय कैटेगरी के हिसाब से किया है। नेट ऑफर का 75 प्रतिशत हिस्सा योग्य संस्थागत निवेशकों (QIBs) के लिए रिजर्व है। वहीं 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NIIs) और 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रखा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी को बड़े संस्थागत निवेशकों से मजबूत सपोर्ट की उम्मीद है।

ग्रे मार्केट में Aye Finance IPO GMP

आय फाइनेंस आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में भी हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को कंपनी के नॉन लिस्टेड शेयर ग्रे मार्केट में ₹134 के आसपास ट्रेड करते दिखे। यह आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से करीब ₹5 ज्यादा है, यानी लगभग 4 प्रतिशत का प्रीमियम। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी भी आईपीओ की आधिकारिक सफलता की गारंटी नहीं होता, लेकिन यह निवेशकों की शुरुआती धारणा को जरूर दिखाता है।

GMP में उतार चढ़ाव लिस्टिंग से पहले भी देखने को मिल सकता है, इसलिए निवेशकों को केवल इसी आधार पर फैसला लेने से बचना चाहिए।

कंपनी फंड का इस्तेमाल कैसे करेगी

रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अपनी कैपिटल बेस को मजबूत करने में करेगी। इस पूंजी का उपयोग भविष्य में बिजनेस विस्तार, बढ़ते एसेट्स और लोन बुक को सपोर्ट करने के लिए किया जाएगा। मजबूत पूंजी से कंपनी को ज्यादा लोन देने और नए बाजारों में पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी को ब्रांड विजिबिलिटी का भी फायदा मिलने की उम्मीद है। एक पब्लिकली लिस्टेड कंपनी बनने से आय फाइनेंस की पहचान और भरोसा दोनों बढ़ सकते हैं। इससे कंपनी के शेयरों के लिए भारत में एक सार्वजनिक बाजार बनेगा, जो भविष्य में पूंजी जुटाने को आसान बना सकता है।

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