'कांग्रेस और कॉकरोच एक ही, दोनों अंधेरे में पनपते हैं', जमशेदपुर हिंसा पर बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला

जमशेदपुर में भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं की झड़प के बाद बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस की तुलना कॉकरोच से की। जेएनयू मामले को लेकर नारेबाजी और पत्थरबाजी हुई।
'कांग्रेस और कॉकरोच एक ही, दोनों अंधेरे में पनपते हैं', जमशेदपुर हिंसा पर बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला
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झारखंड के जमशेदपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस घटना को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की तुलना कॉकरोच से करते हुए कहा कि दोनों अंधेरे में पनपते हैं। उनका यह बयान जमशेदपुर में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई नारेबाजी, मारपीट और पत्थरबाजी के बाद सामने आया है। घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रहे हैं।जमशेदपुर में यह विवाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न प्रकरण को लेकर शुरू हुआ था। भाजपा महिला मोर्चा की ओर से विरोध मार्च निकाला गया था। जब यह मार्च बिष्टुपुर स्थित कांग्रेस के पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय तिलक पुस्तकालय के पास पहुंचा, तो दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। शुरुआत में नारेबाजी और कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और दोनों पक्षों के बीच लाठी-पत्थर चलने लगे।

 

भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हुई इस झड़प में कई लोग घायल हुए। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में घायलों की संख्या को लेकर अंतर है। कुछ रिपोर्टों में चार लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई, जबकि अन्य में 10 से अधिक लोगों के चोटिल होने की बात सामने आई। घायलों में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार का नाम भी बताया गया है। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ाई, ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े

विवाद की पृष्ठभूमि जेएनयू से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले से जुड़ी है। भाजपा महिला मोर्चा के विरोध मार्च में कांग्रेस के एक सांसद की गिरफ्तारी की मांग उठाई गई थी। मार्च जब कांग्रेस कार्यालय के पास पहुंचा, तो दोनों पक्षों की नारेबाजी तेज हो गई। इसके बाद स्थिति हिंसक हो गई। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, जुलूस में कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से पत्थर फेंके जाने के बाद टकराव बढ़ा। हालांकि, दोनों दलों ने एक-दूसरे पर माहौल बिगाड़ने के आरोप लगाए हैं।

घटना के बाद कांग्रेस की ओर से भी विरोध दर्ज कराया गया। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस विधायक पूर्णिमा साहू धरने पर बैठीं। इस पूरे घटनाक्रम ने जमशेदपुर में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। पुलिस के सामने अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह पता लगाने की चुनौती है कि झड़प की शुरुआत कैसे हुई, किन लोगों ने हिंसा की और सार्वजनिक शांति भंग करने में किसकी क्या भूमिका रही। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही

बाबूलाल मरांडी की टिप्पणी ने इस विवाद को राजनीतिक बयानबाजी के एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। उनका बयान कांग्रेस के प्रति तीखे विरोध को दर्शाता है, लेकिन घटना के मूल मुद्दे—जेएनयू प्रकरण, विरोध मार्च और कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा—का समाधान जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही निकल सकता है। राजनीतिक दलों के लिए भी यह जरूरी है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं को संयम बरतने और कानून का पालन करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि राजनीतिक मतभेद हिंसक टकराव में न बदलें।

फिलहाल जमशेदपुर की घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है, जबकि कांग्रेस की ओर से भी विरोध दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में हिंसा की शुरुआत और उसमें शामिल लोगों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

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