हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ में रहने वाले लोगों, रोजाना सफर करने वाले कामगारों और उद्योग जगत के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से अधर में लटके पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ फोरलेन निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। करीब डेढ़ साल से रुके इस महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट पर 15 अक्टूबर से फिर काम शुरू होने की योजना है। राजस्थान की निर्माण कंपनी गणपति भारत प्राइवेट लिमिटेड को शेष निर्माण कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने परियोजना को अक्टूबर 2028 तक पूरा करने की समयसीमा तय की है। निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें रोजाना सड़क पर लगने वाले लंबे जाम, धीमी आवाजाही और औद्योगिक वाहनों की भीड़ के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है।
इस परियोजना की सबसे अहम बात यह है कि इस बार निर्माण के दौरान उन स्थानों को प्राथमिकता देने की योजना है, जहां यातायात का दबाव अधिक रहता है और अक्सर जाम की स्थिति बनती है। बद्दी और नालागढ़ क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में उद्योग, फैक्ट्रियां और उत्पादन इकाइयां संचालित होती हैं। इन उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारी रोजाना इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। इसके अलावा कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में ट्रक और अन्य मालवाहक वाहन भी इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़क पर लगने वाला जाम केवल आम यात्रियों की परेशानी नहीं है, बल्कि इसका असर औद्योगिक गतिविधियों और माल की आवाजाही पर भी पड़ता है।
निर्माण कंपनी की ओर से परियोजना को दोबारा शुरू करने के लिए तैयारियां की गई हैं। परियोजना प्रबंधक प्रहलाद के अनुसार, किशनपुरा में कंपनी ने अपना सेटअप तैयार कर लिया है और पिंजौर से नालागढ़ तक निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी भी तैनात कर दी गई है। NHAI से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद काम विधिवत शुरू किया जाएगा। कंपनी की योजना है कि पहले उन हिस्सों पर काम को गति दी जाए, जहां यातायात की समस्या अधिक गंभीर है। इससे उम्मीद की जा रही है कि परियोजना का लाभ लोगों को केवल फोरलेन पूरी होने के बाद ही नहीं, बल्कि निर्माण के दौरान भी चरणबद्ध तरीके से मिल सकेगा। हालांकि, वास्तविक राहत काम की गति, निर्माण व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर निर्भर करेगी।
पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ फोरलेन परियोजना लंबे समय से देरी का सामना कर रही है। इसे क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी सुधारने और औद्योगिक परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। लेकिन जमीन अधिग्रहण, सड़क निर्माण के लिए आवश्यक जगह उपलब्ध कराने और बिजली-पानी जैसी सुविधाओं से जुड़े ढांचे को दूसरी जगह स्थानांतरित करने में हुई देरी के कारण काम प्रभावित होता रहा। शुरुआती ठेकेदार के परियोजना से हटने के बाद निर्माण कार्य ठप पड़ गया था। इससे सड़क के अधूरे हिस्सों को लेकर लोगों की परेशानी बनी रही और परियोजना को पूरा करने के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनानी पड़ी।
NHAI ने शेष निर्माण कार्य के लिए नई निविदा प्रक्रिया पूरी करने के बाद राजस्थान की गणपति भारत प्राइवेट लिमिटेड की बोली स्वीकार की। कंपनी को करीब 378.48 करोड़ रुपये में बाकी काम पूरा करना है। शेष कार्य के लिए अनुमानित लागत लगभग 594 करोड़ रुपये रखी गई थी। इसके मुकाबले कंपनी की बोली करीब 215.52 करोड़ रुपये कम रही, जो अनुमानित लागत से लगभग 36.28 प्रतिशत कम है। नई कंपनी को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब मुख्य चुनौती यह होगी कि निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किए बिना काम को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। कम लागत पर ठेका मिलने के कारण परियोजना के खर्च पर भी ध्यान रहेगा, लेकिन आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि निर्माण कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और जाम की समस्या कब कम होती है।
इससे पहले गुजरात की पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को सितंबर 2021 में करीब 469 करोड़ रुपये में परियोजना का ठेका दिया गया था। निर्माण कार्य अप्रैल 2022 में शुरू हुआ था और इसे मूल रूप से 30 सितंबर 2024 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, भूमि अधिग्रहण, राइट ऑफ वे यानी सड़क निर्माण के लिए जरूरी जमीन पर निर्बाध पहुंच और विभिन्न उपयोगिताओं को स्थानांतरित करने में हुई देरी के चलते काम निर्धारित गति से आगे नहीं बढ़ सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 45 प्रतिशत काम पूरा करने के बाद पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने जून 2025 में परियोजना से हाथ खींच लिया। इसके बाद निर्माण कार्य रुक गया और फोरलेन को पूरा करने के लिए नए ठेकेदार की तलाश शुरू की गई। जुलाई 2025 में सड़क के रखरखाव और गड्ढों की मरम्मत के लिए अंतरिम व्यवस्था की गई थी, ताकि निर्माण बंद रहने के दौरान सड़क की स्थिति को संभाला जा सके।
फोरलेन का काम रुकने का असर बद्दी और नालागढ़ के बीच आने-जाने वाले लोगों पर पड़ा। औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट के हिसाब से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समय पर फैक्ट्री पहुंचना कई बार चुनौती बन जाता है। जाम में फंसने से यात्रा का समय बढ़ता है और मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी धीमी पड़ती है। उद्योगों के लिए परिवहन में देरी का मतलब आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव हो सकता है। इस कारण स्थानीय उद्योग जगत और आम यात्रियों की लंबे समय से मांग रही है कि सड़क परियोजना को जल्द पूरा किया जाए। अब नए ठेकेदार के काम शुरू करने की तैयारी से इस दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद बनी है।
पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ मार्ग हिमाचल प्रदेश को हरियाणा और पंजाब की ओर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह सड़क बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ के औद्योगिक क्षेत्र के लिए खास महत्व रखती है। इसके अलावा इस मार्ग से ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और मनाली की ओर जाने वाले यातायात को भी संपर्क मिलता है। सड़क का फोरलेन में विस्तार होने से वाहनों की आवाजाही के लिए अधिक जगह उपलब्ध होने, यातायात का दबाव व्यवस्थित होने और सफर के समय में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, इन लाभों का पूरा असर परियोजना के शेष हिस्से के निर्माण और संबंधित सड़क सुविधाओं के तैयार होने के बाद ही सामने आएगा।
निर्माण के दौरान जाम प्रभावित इलाकों को प्राथमिकता देना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि काम शुरू होने पर मशीनरी, निर्माण सामग्री और अस्थायी यातायात व्यवस्था के कारण कुछ हिस्सों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में निर्माण कंपनी और संबंधित अधिकारियों के सामने दोहरी चुनौती होगी। एक ओर परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाना होगा, वहीं दूसरी ओर मौजूदा सड़क से गुजरने वाले लोगों और औद्योगिक वाहनों की आवाजाही भी यथासंभव सुचारु रखनी होगी। यदि काम को अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाता है और यातायात प्रबंधन पर लगातार ध्यान दिया जाता है, तो निर्माण के दौरान होने वाली परेशानी को कम रखने में मदद मिल सकती है।
परियोजना के लिए अक्टूबर 2028 की समयसीमा निर्धारित की गई है। कंपनी ने निर्धारित अवधि से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य रखने की बात कही है, लेकिन इसके लिए जरूरी मंजूरियों, निर्माण सामग्री की उपलब्धता, मशीनरी और श्रमिकों की तैनाती तथा जमीन से जुड़े शेष मुद्दों का समय पर समाधान होना जरूरी होगा। पिछले अनुभव को देखते हुए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद उसकी गति लगातार बनी रहे और किसी कारण से दोबारा लंबा व्यवधान न आए।
करीब डेढ़ साल से रुके फोरलेन निर्माण के फिर शुरू होने की खबर ने स्थानीय लोगों और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ाई हैं। अब सभी की नजर 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले काम और उन हिस्सों पर रहेगी, जहां रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है। यदि निर्माण तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो बद्दी-नालागढ़ क्षेत्र में सड़क संपर्क बेहतर होने, औद्योगिक वाहनों की आवाजाही सुगम होने और यात्रियों के समय की बचत होने की संभावना है। फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत यह सुनिश्चित करना है कि इस बार परियोजना लगातार आगे बढ़े और अक्टूबर 2028 तक फोरलेन को पूरा करने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।











