बैंकिंग सेक्टर में लौट रही रफ्तार, निवेशकों के लिए फिर बन रहे मौके

बैंकिंग सेक्टर में लौट रही रफ्तार, निवेशकों के लिए फिर बन रहे मौके

पहली छमाही की सुस्ती के बाद बैंकिंग सेक्टर में रफ्तार लौटती दिख रही है। कर्ज की मांग सुधरने से Q3FY26 में बैंकों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है, जबकि NPA और मार्जिन फिलहाल नियंत्रण में बने हुए हैं।

Banking Sector: कमजोर शुरुआत और सुस्त पहली छमाही के बाद अब बैंकिंग सेक्टर में धीरे-धीरे रफ्तार लौटती नजर आ रही है। लोगों और कंपनियों की ओर से कर्ज लेने की मांग में सुधार हो रहा है, जिससे बैंकों की आमदनी पर बना दबाव कम होता दिख रहा है। इसके साथ ही फंसे कर्ज यानी NPA की स्थिति भी फिलहाल ज्यादा नहीं बिगड़ी है। ऐसे माहौल में वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही बैंकिंग सेक्टर के लिए कुछ राहत लेकर आ सकती है। ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि तीसरी तिमाही में बैंकों की कमाई में सुधार के साफ संकेत मिल रहे हैं।

पहली छमाही के बाद बदला माहौल

वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही बैंकिंग सेक्टर के लिए आसान नहीं रही। कर्ज की रफ्तार सुस्त रही और मार्जिन पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। कॉरपोरेट और रिटेल दोनों सेगमेंट में लोन डिमांड में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। इससे बैंकों की ब्याज से होने वाली आमदनी में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है।

हालांकि खेती और ग्रामीण इलाकों से जुड़े कुछ मामलों में जोखिम बना रह सकता है, लेकिन कुल मिलाकर सेक्टर की स्थिति पहले से बेहतर होती दिख रही है।

Q3FY26 में कमाई में सुधार की उम्मीद

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में बैंकिंग सेक्टर की कुल कमाई में सालाना आधार पर करीब 5.3 फीसदी की बढ़त हो सकती है। वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले कमाई में लगभग 1 फीसदी का इजाफा होने की संभावना जताई गई है।

ब्रोकरेज का कहना है कि पहली छमाही में हालात कमजोर थे, लेकिन अब कर्ज देने की रफ्तार बढ़ रही है। इसका सीधा फायदा बैंकों की आय पर पड़ सकता है और तीसरी तिमाही के नतीजों में यह असर दिख सकता है।

प्राइवेट बैंकों की कमाई में सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, 3QFY26 में प्राइवेट बैंकों की कमाई सालाना आधार पर करीब 3 फीसदी बढ़ सकती है। वहीं, तिमाही आधार पर इसमें लगभग 4 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है।

प्राइवेट बैंकों में बेहतर लोन मिक्स, मजबूत बैलेंस शीट और कंट्रोल्ड NPA की वजह से प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है। खासतौर पर बड़े और मिड साइज प्राइवेट बैंक इस माहौल का फायदा उठा सकते हैं।

क्या कहती है सरकारी बैंकों की स्थिति

सरकारी बैंकों की कमाई में सालाना आधार पर करीब 8 फीसदी की बढ़त का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, पिछली तिमाही में मिले एक बार के खास फायदे के कारण तिमाही आधार पर सरकारी बैंकों की कमाई में लगभग 3 फीसदी की गिरावट आ सकती है।

इसके बावजूद सरकारी बैंकों की कुल स्थिति स्थिर बनी हुई है और बड़े झटके के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।

कर्ज में तेजी, डिपॉजिट बना चुनौती

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के मुताबिक, तीसरी तिमाही में बैंकों का कर्ज सालाना आधार पर बढ़कर करीब 11.3 फीसदी तक पहुंच सकता है। वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले कर्ज में लगभग 3.7 फीसदी की बढ़त हो सकती है।

इसके उलट बैंकों में जमा होने वाला पैसा यानी डिपॉजिट उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, डिपॉजिट ग्रोथ सालाना आधार पर करीब 10 फीसदी और तिमाही आधार पर लगभग 2.4 फीसदी रह सकती है।

कर्ज की तेज रफ्तार और डिपॉजिट की धीमी बढ़त आगे चलकर बैंकों के लिए एक अहम चुनौती बन सकती है, क्योंकि इससे फंडिंग कॉस्ट बढ़ने का खतरा रहता है।

मार्जिन पर ज्यादा दबाव नहीं

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तीसरी तिमाही में बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। कुछ बैंकों में तो हल्का सुधार भी देखने को मिल सकता है।

खासतौर पर HDFC बैंक, फेडरल बैंक और सिटी यूनियन बैंक में मार्जिन सुधार की उम्मीद जताई गई है। वहीं, सरकारी बैंकों के मार्जिन में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है और वे लगभग स्थिर बने रह सकते हैं।

मुनाफे का स्तर रहेगा स्थिर

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि पूरे बैंकिंग सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिलेगा। मुनाफे के प्रमुख पैमाने फिलहाल स्थिर बने रह सकते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि सेक्टर में संतुलन बना हुआ है और अचानक किसी बड़े जोखिम की स्थिति नहीं है।

बॉन्ड यील्ड से ट्रेजरी इनकम पर असर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते तीसरी तिमाही में बैंकों की ट्रेजरी से होने वाली कमाई पिछली तिमाही के मुकाबले कम हो सकती है।

इसका असर बैंकों की अन्य आय पर पड़ सकता है और इसका दबाव खासतौर पर सरकारी बैंकों पर ज्यादा दिखने की आशंका है।

इन संकेतों पर रहेगी निवेशकों की नजर

आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक कितनी तेजी से डिपॉजिट जुटा पाते हैं। इसके साथ ही बिना गारंटी वाले कर्ज यानी unsecured loans को लेकर बैंकों का रुख भी अहम रहेगा।

अगर डिपॉजिट ग्रोथ कमजोर रहती है, तो बैंकों की लागत बढ़ सकती है। वहीं, unsecured loans में ज्यादा जोखिम लेने से एसेट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है।

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की पसंदीदा Bank Stocks

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने बैंकिंग सेक्टर में कुछ चुनिंदा शेयरों को अपनी टॉप पिक्स बताया है। प्राइवेट बैंकों में ब्रोकरेज की पसंद ICICI बैंक, HDFC बैंक, करूर वैश्य बैंक और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक हैं।

सरकारी बैंकों की बात करें तो एंटीक की पहली पसंद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि इन बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत है और मौजूदा माहौल में ये बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

Leave a comment