बीजेपी अध्यक्ष बनते ही नितिन नवीन का एक्शन प्लान, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का निर्देश

बीजेपी अध्यक्ष बनते ही नितिन नवीन का एक्शन प्लान, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का निर्देश

बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कमान संभालते ही संगठन को चुनावी मोड में डाल दिया। दिल्ली में हुई लंबी बैठक में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की रणनीति और बूथ स्तर तैयारी पर फोकस किया गया।

New Delhi: बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कमान संभालते ही संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में ले जाने का संकेत दे दिया है। दिल्ली मुख्यालय में हुई आठ घंटे लंबी रणनीतिक बैठक में उन्होंने पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—के विधानसभा चुनावों पर विशेष फोकस किया। बैठक का उद्देश्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और पार्टी अभियानों को जमीन पर प्रभावी बनाना था।

मुख्यालय में आठ घंटे का मैराथन मंथन

बैठक में पांच राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री और चुनाव प्रभारी मौजूद थे। नितिन नवीन ने हर राज्य से चुनावी तैयारियों की रिपोर्ट ली और संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले बूथ स्तर तक संगठन की मजबूती सबसे जरूरी है। इस दौरान उन्होंने राज्यों में अलग-अलग रणनीतियों और मुद्दों पर भी चर्चा की।

सरकार और विपक्ष वाले राज्यों में अलग रणनीति

बैठक में नितिन नवीन ने कहा कि जिन राज्यों में बीजेपी सत्ता में नहीं है, वहां लगातार संघर्ष और मेहनत से सरकार बनानी होगी। वहीं, जहां पार्टी सत्ता में है, वहां संगठन को और सशक्त करना प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि संगठनात्मक अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें बल्कि उन्हें जमीन पर भी प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

SIR, विकसित भारत और ‘मन की बात’ पर जोर

नितिन नवीन ने SIR, विकसित भारत, जी राम जी योजना और ‘मन की बात’ जैसे अभियानों को तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ये केवल योजनाएं नहीं हैं, बल्कि जनता से संवाद और संपर्क का माध्यम हैं। इन अभियानों के जरिए पार्टी को बूथ स्तर तक अपनी बात पहुंचानी है और जनता में विश्वास बढ़ाना है।

जेपी नड्डा का संदेश

बैठक में पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी सभी नेताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व बदलता है, लेकिन पार्टी के आदर्श और मूल विचार नहीं बदलते। उन्होंने सभी नेताओं से नए उत्साह और अधिक मेहनत के साथ पार्टी को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

बंगाल को सबसे बड़ा सियासी रणक्षेत्र माना

बैठक का सबसे बड़ा फोकस पश्चिम बंगाल पर था। नितिन नवीन ने संकेत दिए कि बंगाल बीजेपी के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन निर्णायक मोर्चा है। बैठक में राज्य की आर्थिक स्थिति, कम प्रति व्यक्ति आय और कथित प्रशासनिक विफलताओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

स्वास्थ्य और शिक्षा को चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा

बीजेपी नेताओं ने बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह असफल बताया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी को चुनावी मुद्दा बनाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था में भर्ती घोटाले और स्कूल-कॉलेजों की स्थिति को भी प्रमुख मुद्दा बनाने पर सहमति बनी।

बीजेपी की रणनीति

नितिन नवीन ने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव पार्टी के लिए चुनौती जरूर हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की मेहनत और नेतृत्व की मजबूती से इसका सामना किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि बीजेपी इन राज्यों में प्रभावी विकल्प बनकर उभरेगी।

27–28 जनवरी को बंगाल दौरा

बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का पहला बड़ा दौरा पश्चिम बंगाल का होगा। 27 और 28 जनवरी को वे वहां कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान पिछली जीती गई सीटों को दोहराने और नई सीटों पर जीत की रणनीति तैयार की जाएगी।

असम और दक्षिण के राज्यों में तैयारी

बैठक में पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने बताया कि असम में सरकार दोहराने का भरोसा है। वहीं तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भी सकारात्मक आकलन किया गया। केरल और महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में मिली सफलता ने पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ाया है।

जी राम जी योजना पर आक्रामक अभियान

कांग्रेस के विरोध के बावजूद बीजेपी जी राम जी योजना को लेकर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि यह योजना श्रमिकों के लिए अधिक लाभकारी है। चुनावी राज्यों में विशेष अभियान चलाकर इसे जनता तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।

नितिन नवीन के नेतृत्व में तेज

कुल मिलाकर, यह बैठक संकेत देती है कि नितिन नवीन के नेतृत्व में बीजेपी अब चुनावों को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई के मूड में नहीं है। रणनीति, संगठन और मुद्दों तीनों मोर्चों पर पार्टी ने अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। आने वाले महीनों में इसका असर सियासी जमीन पर स्पष्ट दिखाई देगा।

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