बेंगलुरु में नम्मा मेट्रो के किरायों में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक लग गई है, क्योंकि भारी जनविरोध और तीखी प्रतिक्रिया के बाद बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने अपने फैसले को टालने का निर्णय लिया है।
नई दिल्ली: बेंगलुरु मेट्रो (नम्मा मेट्रो) के प्रस्तावित किराया बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक लग गई है। तीखे जनविरोध और राजनीतिक बयानबाजी के बीच बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने अपने फैसले को टालने का निर्णय लिया है। 5 फरवरी को घोषित नए किरायों को 9 फरवरी से लागू किया जाना था, लेकिन अब BMRCL बोर्ड इस पूरे मामले की समीक्षा करेगा। इस कदम को यात्रियों और विपक्षी नेताओं की जीत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि मेट्रो प्रशासन ने इसे “पुनर्विचार की प्रक्रिया” बताया है।
क्यों टाली गई किराया बढ़ोतरी?
BMRCL के मुताबिक, व्यापक सार्वजनिक प्रतिक्रिया और हितधारकों की चिंताओं को देखते हुए बोर्ड ने प्रस्तावित किराया संशोधन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। निगम ने कहा है कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब बेंगलुरु के लाखों मेट्रो यात्री बढ़े हुए किरायों को लेकर नाराज थे और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध तेज हो चुका था।
क्या था प्रस्तावित किराया प्लान?
BMRCL ने 96.10 किलोमीटर लंबे नम्मा मेट्रो नेटवर्क को 10 जोन में विभाजित करते हुए किरायों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत दूरी के आधार पर 1 रुपये से लेकर 5 रुपये तक की वृद्धि तय की गई थी। प्रमुख बदलाव इस प्रकार थे:
- 0–2 किमी: किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये
- 15–20 किमी: किराया 70 रुपये से बढ़ाकर 74 रुपये
- 30 किमी से अधिक: किराया 90 रुपये से बढ़ाकर 95 रुपये
इसके अलावा, टूरिस्ट पास और ग्रुप टिकटों में भी 5% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। हालांकि, स्मार्ट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए मौजूदा छूट (पीक ऑवर्स में 5% और नॉन-पीक ऑवर्स में 10%) जारी रखने की बात कही गई थी।

राजनीतिक घमासान: बीजेपी बनाम कांग्रेस
किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव ने कर्नाटक की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी आमने-सामने आ गए। राज्य मंत्री प्रियांक खड़गे ने बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो विस्तार का श्रेय लेते हैं, लेकिन किराया बढ़ोतरी के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाता है। खड़गे ने यह भी स्पष्ट किया कि किराया निर्धारण वित्तीय व्यवहार्यता समिति (FFFC) केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त की जाती है और उसके फैसले राज्य पर बाध्यकारी होते हैं।
वहीं, बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने किराया बढ़ोतरी पर रोक को “जनता की जीत” बताया। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि सब्सिडी बंद करने के कारण बेंगलुरु मेट्रो देश की सबसे महंगी मेट्रो बन गई है। सूर्या ने वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से किराया तय करने के लिए नई समिति बनाने की मांग भी की।
BMRCL ने क्यों बढ़ाना चाहा किराया?
BMRCL का तर्क था कि परिचालन लागत, बिजली खर्च, रखरखाव और विस्तार परियोजनाओं के कारण वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। निगम के अनुसार, चरणबद्ध तरीके से किराया बढ़ाना इसलिए जरूरी था ताकि यात्रियों पर अचानक बड़ा आर्थिक बोझ न पड़े। हालांकि, परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार की घटती सब्सिडी और बढ़ते कर्ज ने भी BMRCL को किराया बढ़ाने के लिए मजबूर किया। फिलहाल, मेट्रो का परिचालन घाटे में चल रहा है और सरकार को हर साल बड़ी राशि सब्सिडी के रूप में देनी पड़ती है।












