तब बिजेंद्र यादव की जगह मैं होता डिप्टी कम RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने बताई 22 विधायकों के समय की कहानी

RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने पुराने 22 विधायकों के घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि अगर तब पार्टी नहीं छोड़ी होती तो आज बिजेंद्र यादव की जगह वे डिप्टी CM होते।
तब बिजेंद्र यादव की जगह मैं होता डिप्टी कम RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने बताई 22 विधायकों के समय की कहानी
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बिहार की राजनीति में पुराने सियासी घटनाक्रमों को याद करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब पार्टी के 22 विधायकों को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक स्थिति बनी थी। भाई वीरेंद्र के मुताबिक, अगर उस दौर में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल का साथ नहीं छोड़ा होता और राजनीतिक समीकरण उनके पक्ष में रहता, तो आज बिहार के उपमुख्यमंत्री पद पर बिजेंद्र प्रसाद यादव की जगह वे खुद होते। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार तेज है।

भाई वीरेंद्र ने अपने राजनीतिक सफर और उस समय के घटनाक्रम को याद करते हुए यह बात कही। उनके बयान में पुराने राजनीतिक समीकरणों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने संकेत दिया कि उस समय विधायकों की संख्या और पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों का असर आगे की राजनीति पर पड़ा था। उनके मुताबिक, परिस्थितियां कुछ अलग होतीं तो उनकी राजनीतिक भूमिका भी आज अलग होती।

भाई वीरेंद्र राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेताओं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े विधायकों में शामिल हैं। विधानसभा में वे कई मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं। उनके बयानों में अक्सर बिहार की राजनीति, सरकार और सत्ता पक्ष पर तीखी टिप्पणी देखने को मिलती है। ऐसे में उनका यह दावा भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

भाई वीरेंद्र ने जिस पुराने '22 विधायक' वाले घटनाक्रम का जिक्र किया, वह बिहार की राजनीति में उस दौर के राजनीतिक जोड़-तोड़ और सत्ता समीकरणों से जुड़ा हुआ था। बिहार में अलग-अलग समय पर विधायकों के पाला बदलने और दलों के भीतर टूट की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे घटनाक्रमों का सीधा असर सरकार की स्थिरता और नेताओं की राजनीतिक हैसियत पर पड़ता है।

अपने बयान में भाई वीरेंद्र ने यह भी संकेत दिया कि राजनीति में किसी समय लिया गया फैसला भविष्य की भूमिका को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि यदि उस समय परिस्थितियां उनके मुताबिक होतीं तो आज वे उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर होते। उनका यह बयान सीधे तौर पर मौजूदा डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव के राजनीतिक पद से जुड़ता है।

बिजेंद्र प्रसाद यादव को अप्रैल 2026 में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वे सुपौल से लगातार कई बार विधायक चुने जा चुके हैं और बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। 1990 से वे सुपौल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और कई सरकारों में मंत्री रह चुके हैं।

बिजेंद्र यादव को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद बिहार की राजनीति में उनके लंबे राजनीतिक अनुभव की चर्चा हुई थी। वे जदयू के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और कई महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं। ऐसे में भाई वीरेंद्र का यह कहना कि उनकी जगह वे खुद उपमुख्यमंत्री होते, मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर एक दिलचस्प टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है।

भाई वीरेंद्र के बयान को केवल व्यक्तिगत राजनीतिक दावा मानकर नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रहे सत्ता समीकरणों की कहानी भी जुड़ी हुई है। बिहार में आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी के बीच राजनीतिक रिश्ते समय-समय पर बदलते रहे हैं। गठबंधन बदलने के साथ कई नेताओं की भूमिका भी बदलती रही है।

राजनीति में विधायकों की संख्या किसी भी पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण ताकत होती है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर ही सरकार बनाने, समर्थन देने या विपक्ष में मजबूत भूमिका निभाने की स्थिति तय होती है। इसलिए 22 विधायकों से जुड़े पुराने घटनाक्रम को याद करना भी मौजूदा राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाई वीरेंद्र ने अपने बयान के जरिए यह बताने की कोशिश की कि उस समय उनकी राजनीतिक स्थिति ऐसी थी कि वे आगे चलकर बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते थे। हालांकि उनका यह दावा एक राजनीतिक बयान है और इसे उस समय के वास्तविक राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

बिहार की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं के पुराने किस्से अक्सर वर्तमान राजनीति में भी चर्चा का विषय बन जाते हैं। खासकर जब किसी नेता का पुराना दावा वर्तमान सत्ता में मौजूद किसी बड़े पद से जुड़ता हो। भाई वीरेंद्र का बयान भी इसी वजह से चर्चा में आया है।

इस बयान का एक दूसरा पहलू यह भी है कि भाई वीरेंद्र अभी भी आरजेडी में सक्रिय हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरों में अपनी राजनीतिक पहचान बनाए हुए हैं। हाल के दिनों में भी वे बिहार की राजनीतिक गतिविधियों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। ताजा रिपोर्टिंग में उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति और पार्टी के भीतर अपने खिलाफ संभावित साजिश को लेकर भी बयान दिया है।

कुछ समय पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ भाई वीरेंद्र की एक तस्वीर को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई थी। इस पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री सभी के होते हैं और उनसे मुलाकात करना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ लोग उन्हें बदनाम करने और पार्टी से तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में 'बिजेंद्र यादव की जगह मैं होता डिप्टी CM' वाला बयान उनके पुराने राजनीतिक अनुभव और वर्तमान राजनीतिक सक्रियता दोनों को जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार की राजनीति में नेताओं के बीच व्यक्तिगत समीकरण और दलगत रणनीति दोनों का बड़ा महत्व है।

भाई वीरेंद्र के बयान के बाद यह सवाल भी उठ सकता है कि उन्होंने जिस 22 विधायकों वाले समय की बात की, उस दौरान वास्तव में क्या राजनीतिक घटनाक्रम हुआ था और उसमें उनकी भूमिका क्या थी। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वह दौर उनके राजनीतिक जीवन में काफी महत्वपूर्ण था।

बिहार विधानसभा में लंबे समय से सक्रिय रहने वाले भाई वीरेंद्र की पहचान बेबाक नेता के रूप में रही है। वे अक्सर सत्ता पक्ष पर हमलावर रहते हैं और विधानसभा के भीतर तथा बाहर अपने बयानों के जरिए राजनीतिक मुद्दों को उठाते हैं। यही वजह है कि उनके किसी भी बड़े बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना बनी रहती है।

वहीं दूसरी ओर बिजेंद्र प्रसाद यादव बिहार सरकार में लंबे अनुभव वाले नेता हैं। उनके उपमुख्यमंत्री बनने के बाद जदयू के वरिष्ठ नेतृत्व और सरकार में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हुई है। उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार के महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल किया जाता है।

भाई वीरेंद्र का दावा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर मौजूदा उपमुख्यमंत्री की जगह खुद के होने की बात कही है। हालांकि राजनीति में 'अगर ऐसा होता तो...' वाली परिस्थितियों का कोई निश्चित आकलन नहीं किया जा सकता। यह एक नेता की अपनी राजनीतिक व्याख्या और पुराने घटनाक्रम की उनकी स्मृति है।

इस बयान से आरजेडी और जेडीयू के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो सकती है। विपक्षी दल अक्सर सरकार के नेताओं की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हैं, जबकि सत्ता पक्ष अपने वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और योगदान को सामने रखता है।

बिहार की मौजूदा राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार और विपक्षी आरजेडी के बीच लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में भाई वीरेंद्र जैसे वरिष्ठ नेता का अपने पुराने राजनीतिक अनुभव को सामने रखना पार्टी की राजनीतिक रणनीति और विपक्षी राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

भाई वीरेंद्र के बयान में व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा की झलक भी देखी जा सकती है, लेकिन इसे सीधे तौर पर वर्तमान पद की मांग मानना उचित नहीं होगा। उन्होंने पुराने घटनाक्रम को याद करते हुए एक संभावित राजनीतिक स्थिति का जिक्र किया है। उनके बयान का मुख्य संदेश यही है कि अगर उस समय परिस्थितियां अलग होतीं तो उनके राजनीतिक जीवन की दिशा भी अलग हो सकती थी।

वर्तमान में बिजेंद्र प्रसाद यादव बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं। वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और जदयू के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। अप्रैल 2026 में उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिहार की राजनीति में पुराने राजनीतिक फैसलों को आज भी नेता अपनी वर्तमान स्थिति के संदर्भ में याद करते हैं। भाई वीरेंद्र ने भी अपने अतीत के एक ऐसे ही दौर का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय अगर परिस्थितियां उनके पक्ष में रहतीं तो आज उनकी राजनीतिक कुर्सी और जिम्मेदारी अलग होती।

आने वाले दिनों में भाई वीरेंद्र के इस बयान पर जेडीयू या सत्ता पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह भी देखने वाली बात होगी। खासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर मौजूदा उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव का नाम लेकर अपनी संभावित राजनीतिक भूमिका की बात कही है।

कुल मिलाकर, RJD विधायक भाई वीरेंद्र ने पुराने 22 विधायकों वाले राजनीतिक घटनाक्रम को याद करते हुए दावा किया है कि अगर उस समय उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी होती और परिस्थितियां अलग रहतीं तो आज बिहार के उपमुख्यमंत्री पद पर बिजेंद्र प्रसाद यादव की जगह वे खुद होते। उनका यह बयान बिहार की मौजूदा सियासत में पुराने राजनीतिक समीकरणों और नेताओं के बदलते कद की कहानी को फिर चर्चा में ले आया है।

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