हाल ही में निर्वाचन आयोग को सौंपी गई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के पास करीब 10,000 करोड़ रुपये की नकदी और जमा राशि है।
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वित्तीय स्थिति को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। निर्वाचन आयोग को सौंपी गई पार्टी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के पास लगभग 10,000 करोड़ रुपये की नकदी और जमा राशि उपलब्ध है। यह रिपोर्ट वित्त वर्ष 2024-25 से संबंधित है और इसमें पार्टी की आय, खर्च और फंड में हुई बढ़ोतरी का विस्तृत विवरण दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में भाजपा के खातों में 2,882.32 करोड़ रुपये की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई है। 31 मार्च 2025 तक पार्टी के जनरल फंड में मौजूद कुल राशि बढ़कर 12,164 करोड़ रुपये हो गई, जो इससे पिछले वर्ष 9,169 करोड़ रुपये थी। यह आंकड़े भाजपा को भारत की सबसे आर्थिक रूप से मजबूत राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित करते हैं।
नए अध्यक्ष को मिलेगा फंड के उपयोग का अधिकार
मंगलवार को भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुने गए नितिन नबीन को अब पार्टी के इस विशाल कोष के उपयोग और प्रबंधन का अधिकार प्राप्त होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों और संगठनात्मक विस्तार में इस फंड की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा को वित्त वर्ष 2024-25 में 6,125 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ, जबकि इससे पिछले वर्ष यह आंकड़ा 3,967 करोड़ रुपये था। यानी पार्टी की दान आय में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब देश में लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न हुए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा के पास 9,390 करोड़ रुपये की सावधि जमा (Fixed Deposits) हैं। इन जमाओं से पार्टी को वर्ष 2024-25 में 634 करोड़ रुपये का ब्याज प्राप्त हुआ। इसके अलावा, पार्टी ने 65.92 करोड़ रुपये का आयकर रिफंड दावा किया, जिस पर उसे 4.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज भी मिला।

चुनावी खर्च में लगभग दोगुनी वृद्धि
वित्त वर्ष 2024-25 में भाजपा का चुनावी खर्च पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना हो गया। जहां वर्ष 2023-24 में पार्टी ने 1,754.06 करोड़ रुपये चुनाव प्रचार पर खर्च किए थे, वहीं 2024-25 में यह खर्च बढ़कर 3,335.36 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह खर्च ऐसे समय में बढ़ा जब पार्टी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) को सत्ता से बाहर कर महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत दर्ज की।
रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा का 88.36 प्रतिशत कुल खर्च चुनावी गतिविधियों पर हुआ। यह आंकड़ा बताता है कि पार्टी ने चुनावी रणनीति, प्रचार और संसाधनों पर अत्यधिक निवेश किया।
कहां-कहां हुआ खर्च
ऑडिट रिपोर्ट में चुनावी खर्च का विस्तृत ब्योरा भी दिया गया है:
- 312.9 करोड़ रुपये उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के रूप में
- 583 करोड़ रुपये हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर यात्राओं पर
- 1,125 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रचार पर
- 897 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर
- 107 करोड़ रुपये कटआउट, होर्डिंग्स और बैनरों पर
- 90.93 करोड़ रुपये रैलियों और अभियानों पर
- 51.72 करोड़ रुपये बैठकों और संगठनात्मक कार्यक्रमों पर
विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा की यह वित्तीय ताकत भारतीय राजनीति में संसाधनों की भूमिका को रेखांकित करती है। साथ ही, यह रिपोर्ट राजनीतिक दलों की पारदर्शिता और चुनावी खर्च पर सार्वजनिक बहस को भी नई दिशा देती है।











