भारत-चीन पंचशील समझौते की पृष्ठभूमि: CDS ने बताया कारण

देहरादून में CDS जनरल अनिल चौहान ने भारत-चीन पंचशील समझौते की पृष्ठभूमि और हिमालयी क्षेत्र में सुरक्षा रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी।

देहरादून में CDS जनरल अनिल चौहान ने भारत-चीन पंचशील समझौते की पृष्ठभूमि और उद्देश्य समझाया। उन्होंने सीमा सुरक्षा, मध्य सेक्टर की चुनौतियाँ और भीष्म थिंक टैंक के महत्व पर प्रकाश डाला।

New Delhi: देहरादून में आयोजित ‘भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच (भीष्म)’ के शुभारंभ के अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भारत-चीन पंचशील समझौते की पृष्ठभूमि और महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1954 में भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मानने के बाद यह सोचा कि उत्तरी सीमा का मुद्दा काफी हद तक सुलझ गया है। हालांकि, चीन ने इसे केवल व्यापार समझौता माना। इस व्याख्यान का उद्देश्य न केवल इतिहास को समझना था, बल्कि वर्तमान सीमा रणनीति और हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा पर भी प्रकाश डालना था।

भीष्म थिंक टैंक का शुभारंभ

शुक्रवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने लोक भवन में ‘भीष्म’ थिंक टैंक का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने थिंक टैंक का लोगो और वेबसाइट भी अनावरण की। भीष्म का उद्देश्य देहरादून स्थित बौद्धिक संसाधनों को एकत्रित कर उत्तराखंड राज्य को रणनीतिक चिंतन का केंद्र बनाना है। राज्यपाल ने कहा कि यह मंच राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सोच के क्षेत्र में प्रभावशाली थिंक टैंक के रूप में स्थापित होगा और उत्तराखंड तथा पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।

पंचशील समझौते के पीछे की रणनीति

CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा कि स्वतंत्र भारत को ब्रिटिश शासन के समाप्त होने के बाद अपनी सीमाओं की परिभाषा स्वयं तय करनी थी। उस समय भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पूर्व में मैकमोहन रेखा और लद्दाख क्षेत्र में भारतीय दावों का आभास रखते थे, लेकिन कई हिस्सों में स्थिति स्पष्ट नहीं थी। नेहरू का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता स्थापित करना था।

तिब्बत में चीन की मौजूदगी बढ़ने के बाद दोनों देशों ने इलाके में संतुलन बनाने और स्थिर संबंध स्थापित करने की दिशा में पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए। CDS ने बताया कि स्वतंत्र भारत पड़ोसी देश चीन के साथ सकारात्मक और शांतिपूर्ण संबंध विकसित करना चाहता था और पंचशील समझौता उसी नीति का हिस्सा था।

मध्य सेक्टर में सीमा

अपने व्याख्यान “Frontiers, Borders and LAC: The Middle Sector” में CDS ने हिमालयी सीमाओं और विशेष रूप से मध्य सेक्टर के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा रणनीति में इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और सरकार अवसंरचना विकास पर जोर दे रही है। इस विकास से न केवल सैनिक बलों की तैनाती आसान होगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं और रणनीतिक स्थिरता में भी सुधार होगा।

CDS ने कहा कि सीमाओं के स्पष्ट निर्धारण और अवसंरचना विकास से न केवल सुरक्षा बलों की तैनाती प्रभावी होगी, बल्कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना भी संभव होगा। यह नीति भारत की रणनीतिक दृष्टि को स्पष्ट करती है कि सीमाओं की सुरक्षा और विकास दोनों को संतुलित तरीके से सुनिश्चित किया जाए।

भीष्म थिंक टैंक का उद्देश्य

भीष्म थिंक टैंक उत्तराखंड में रणनीतिक चिंतन और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित है। इसके संस्थापक टीम का नेतृत्व CDS जनरल अनिल चौहान और उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह ने किया है। टीम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड से जुड़े विशेषज्ञ और विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान शामिल हैं।

भीष्म के प्रमुख सदस्यों में कर्नल (डॉ.) गिरिजा शंकर मुंगली, श्री संजीव चोपड़ा, आईएएस प्रो. दुर्गेश पंत, प्रो. दीवान सिंह रावत, प्रो. सुरेखा डंगवाल, नितिन गोखले और राजन आर्य शामिल हैं। इस थिंक टैंक का उद्देश्य उत्तराखंड को रणनीतिक सोच और सुरक्षा नीति के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।

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