केंद्र सरकार ने तीन साल बाद गेहूं और इसके उत्पादों का निर्यात खोला। कुल 25 लाख टन गेहूं, 5 लाख टन गेहूं उत्पाद और 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी के निर्यात की मंजूरी दी गई। यह किसानों और बाजार के लिए लाभकारी कदम है।
New Delhi: केंद्र सरकार ने लंबे समय बाद गेहूं और इसके उत्पादों का निर्यात खोलने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कुल 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है। इसके अलावा मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 में 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी के निर्यात को भी मंजूरी दी गई है। यह कदम घरेलू बाजारों में स्थिरता लाने और किसानों को बेहतर कीमत दिलाने के मकसद से उठाया गया है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है। घरेलू उपलब्धता, स्टॉक स्तर और बाजार की स्थिति का पूरा आकलन करने के बाद निर्यात की मंजूरी दी गई है। इससे किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे और बाजार में तरलता बढ़ेगी।
गेहूं निर्यात की अनुमति के पीछे तर्क
सरकार ने इस फैसले के पीछे कुछ ठोस कारण बताए हैं। 2025-26 में निजी कंपनियों के पास गेहूं का स्टॉक लगभग 75 लाख टन होगा, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में 32 लाख टन ज्यादा है। साल-दर-साल यह बढ़ोतरी देश में सप्लाई की मजबूत स्थिति दिखाती है। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2026 तक केंद्रीय पूल में एफसीआई के पास लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। इससे साफ है कि निर्यात की मंजूरी से घरेलू खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सरकार का मानना है कि उत्पादन में वृद्धि, मौजूदा स्टॉक की पर्याप्त उपलब्धता और कीमतों में संतुलन बनाए रखना निर्यात की मंजूरी का बड़ा कारण है। इससे बाजार में स्टॉक रोटेशन बेहतर होगा और पीक आवक के समय कीमतों में अस्थिरता नहीं आएगी।
उत्पादन में बढ़ोतरी

रबी 2026 में गेहूं का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह किसानों के मजबूत भरोसे और MSP व सरकारी खरीद समर्थन का संकेत है। अधिक उत्पादन की उम्मीद और कीमतों में स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम किसानों की आय बढ़ाने, घरेलू कीमतों को स्थिर करने और स्टॉक रोटेशन को बेहतर बनाने में मदद करेगा। साथ ही यह खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायक रहेगा।
चीनी निर्यात पर भी मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने गेहूं के साथ ही चीनी निर्यात को भी बढ़ावा देने का फैसला किया है। मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 में इच्छुक चीनी मिलों को 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई है। इससे पहले 14 नवंबर 2025 के आदेश के तहत 15 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी गई थी।
सरकार ने यह तय किया है कि अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी का निर्यात उन मिलों को दिया जाएगा जो निर्धारित मात्रा का कम से कम 70 प्रतिशत 30 जून 2026 तक निर्यात करेंगी। यह कोटा प्रो-राटा बेसिस (pro-rata basis) पर बांटा जाएगा और मिलों को 15 दिनों के भीतर अपनी क्षमता बतानी होगी। इस व्यवस्था से निर्यात प्रक्रिया में पारदर्शिता रहेगी और सरप्लस चीनी की उपलब्धता पर नियंत्रण रखा जा सकेगा।
निर्यात से किसानों को लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं और चीनी के निर्यात को खोलने से किसानों और उद्योग दोनों को लाभ मिलेगा। गेहूं और इसके उत्पादों का निर्यात बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतों में स्थिरता आएगी और किसानों को MSP से बेहतर आय प्राप्त होगी। वहीं, चीनी निर्यात से मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उत्पादकों को वैश्विक बाजार में अवसर मिलेंगे।
सरकार के इस कदम से यह भी स्पष्ट होता है कि किसानों के हितों और घरेलू खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना प्राथमिकता है। कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने से देश की वैश्विक व्यापार क्षमता भी मजबूत होगी।










