भारत में बनेगा डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड, जानें DPDP एक्ट के नए नियम

भारत सरकार ने DPDP एक्ट के नियम नोटिफाई किए। डेटा फिड्यूशरी, कंसेंट मैनेजर, माइनर यूजर्स सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड से यूजर्स के अधिकार मजबूत होंगे।

भारत सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP) के नियमों को नोटिफाई किया है, जिससे देश में डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी मजबूत होगी। नए नियम डेटा फिड्यूशरी, कंसेंट मैनेजर, माइनर यूजर्स की सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के गठन जैसी व्यवस्थाओं को स्पष्ट करते हैं। इन प्रावधानों से डेटा लीक रिपोर्टिंग और यूजर अधिकारों में पारदर्शिता बढ़ेगी।

Data Security Update: भारत सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP) के नियमों को शुक्रवार को नोटिफाई किया, जिससे पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग और प्राइवेसी पर कड़ा नियंत्रण संभव होगा। नए नियमों के तहत डेटा फिड्यूशरी और कंसेंट मैनेजर की व्यवस्था की गई है, माइनर यूजर्स के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड का गठन भी होगा। यह कदम देश में डेटा सुरक्षा की पारदर्शिता बढ़ाने और यूजर्स के अधिकारों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

डेटा फिड्यूशरी और कंसेंट मैनेजमेंट

नए नियमों के तहत, पर्सनल डेटा को प्रोसेस करने वाली कंपनियों और प्लेटफॉर्म को डेटा फिड्यूशरी माना जाएगा, जबकि यूजर को डेटा प्रिंसिपल कहा जाएगा। कंसेंट मैनेजर एक स्वतंत्र और ऑथोराइज्ड इंटरमीडियरी होगा, जो यूजर को डेटा पर कंट्रोल और परमिशन मैनेज करने में मदद करेगा। इससे यूजर्स को अपने डेटा पर बेहतर अधिकार और ट्रैकिंग की पारदर्शिता मिलेगी।

डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड और रिपोर्टिंग

सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, देश में डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें चार मेंबर्स होंगे। बोर्ड डेटा लीक और नियमों के पालन की निगरानी करेगा। सभी डेटा फिड्यूशरीज को पर्सनल डेटा लीक की जानकारी 72 घंटों के भीतर बोर्ड और प्रभावित यूजर्स को देनी होगी। इससे डेटा सुरक्षा और ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी।

माइनर यूजर्स का डेटा और अतिरिक्त नियम

बच्चों के डेटा की सुरक्षा को लेकर सख्ती बरती गई है। सभी प्लेटफॉर्म्स को माइनर यूजर्स के डेटा प्रोसेस करने के लिए पैरेंट्स से कंसेंट लेना अनिवार्य होगा। माइनर यूजर्स को ट्रैक करने या उनके डेटा के आधार पर एडवरटाइजिंग करने पर रोक है। इसके अलावा, सरकार किसी भी कंपनी से डेटा को संभालने के लिए जानकारी मांग सकती है और विशेष परिस्थितियों में यूजर को डेटा लीक की जानकारी देने से रोक सकती है।

इनएक्टिव यूजर्स का डेटा

नए नियमों के तहत, इनएक्टिव यूजर्स का पर्सनल डेटा तीन साल बाद डिलीट करना होगा। हालांकि, कानूनी जरूरत पड़ने पर डेटा को अधिक समय तक स्टोर किया जा सकता है। फिड्यूशरीज को एक साल तक डेटा लॉग्स रखना अनिवार्य होगा, जिसमें कंसेंट, डिस्क्लोजर और प्रोसेसिंग एक्टिविटी की जानकारी शामिल होगी।

DPDP एक्ट के नियमों के नोटिफिकेशन से भारत में डेटा सुरक्षा का ढांचा मजबूत होगा। माइनर यूजर्स की सुरक्षा, डेटा लीक की रिपोर्टिंग और यूजर के अधिकार अब और स्पष्ट हो गए हैं। सभी यूजर्स और कंपनियों के लिए यह जरूरी है कि वे नए नियमों के अनुसार अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं को अपडेट करें।

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