मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और सिस्टम को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि व्यवस्था को सवाल पूछने वाले छात्रों की जगह ‘अंधभक्त’ चाहिए।
Rahul Gandhi in Indore: मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर 2026 को आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद करते हुए शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और सरकारी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मौजूदा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि सिस्टम को सवाल पूछने वाले छात्र नहीं, बल्कि “अंधभक्त” चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी ताकत उनकी जिज्ञासा और सवाल पूछने की क्षमता है।
राहुल गांधी बोले- सवाल पूछता है छात्र
राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता क्योंकि उसे ऐसा बताया गया है। वह उसके पीछे की वजह जानना चाहता है। उनके मुताबिक, यही सवाल पूछने की प्रवृत्ति व्यवस्था के लिए चुनौती बनती है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, स्कूल-कॉलेजों की स्थिति, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों को इन सवालों के जवाब मिलने चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में छात्र और “अंधभक्त” के बीच अंतर बताते हुए कहा कि छात्र जिज्ञासु और ईमानदार होता है, जबकि उनके अनुसार अंधभक्त सवाल नहीं करता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि व्यवस्था ऐसे लोगों को आगे बढ़ाती है जो सवाल करने के बजाय हर बात को स्वीकार कर लेते हैं। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप और उनकी व्याख्या हैं; कार्यक्रम में उन्होंने इन्हें मौजूदा सिस्टम पर अपनी आलोचना के आधार के तौर पर पेश किया।
शिक्षा और रोजगार को लेकर उठाए सवाल

इंदौर के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं से जुड़े कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए शिक्षा से लेकर रोजगार तक का रास्ता मजबूत होना जरूरी है। उनके भाषण में पेपर लीक, सरकारी भर्तियों में देरी, छात्रवृत्ति, स्कूलों की स्थिति और हॉस्टल जैसी समस्याओं का उल्लेख भी आया। राहुल गांधी ने शिक्षा बजट और सरकारी स्कूलों की संख्या को लेकर भी आंकड़े पेश किए।
उन्होंने दावा किया कि शिक्षा पर सरकारी खर्च का हिस्सा कम हुआ है और बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। इन आंकड़ों को उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया। उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों और उनके राजनीतिक निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
छात्रों ने बताई भर्ती और परीक्षा से जुड़ी परेशानियां
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी अपनी समस्याएं राहुल गांधी के सामने रखीं। एक छात्रा ने सरकारी परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति में आ रही अड़चनों का मुद्दा उठाया। उसके मुताबिक, कुछ नियुक्तियां कानूनी विवाद के कारण प्रभावित हुई हैं। वहीं, देवास के एक छात्र ने MPPSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के बाद अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और जेल जाने की बात बताई।
कार्यक्रम में छात्रों की ओर से रोजगार, लंबित परीक्षा परिणाम, भर्ती प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित समस्याएं भी सामने रखी गईं। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों ने शिक्षा और नौकरी के अलावा हॉस्टल तथा छात्रवृत्ति से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी चिंताएं साझा कीं।
'छात्रों की गूंज' का पांचवां संस्करण
इंदौर में आयोजित यह 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम श्रृंखला का पांचवां संस्करण था। इससे पहले राहुल गांधी ने इसी तरह के छात्र संवाद कार्यक्रम कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में किए थे। इस पहल का फोकस छात्रों के साथ सीधे संवाद और शिक्षा, रोजगार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा रहा है। इंदौर के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों को देश के भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए सवाल पूछने और अपनी समस्याओं को सामने रखने की बात कही।
उनका संदेश मुख्य रूप से शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम के दौरान भाजपा और केंद्र सरकार पर की गई उनकी टिप्पणियां कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आईं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष की प्रतिक्रियाएं इन दावों के संदर्भ को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगी।











