मंगलुरु फिशिंग हार्बर पहुंचे डीके शिवकुमार, मछुआरों की समस्याएं सुनीं

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने मंगलुरु फिशिंग हार्बर का निरीक्षण किया। मछुआरों की समस्याएं सुनीं और ड्रेजिंग, नाव पार्किंग व सुविधाओं पर कार्रवाई का भरोसा दिया।

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने शनिवार सुबह मंगलुरु फिशिंग हार्बर का निरीक्षण किया और मछुआरों व कारोबारियों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अल्वे बागिलु की ड्रेजिंग, नाव पार्किंग, महिलाओं की सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी मांगों पर समाधान का आश्वासन दिया।

मंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार सुबह मंगलुरु के फिशिंग हार्बर का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं और मछली कारोबार की स्थिति का जायजा लिया। करीब सुबह 5 बजे हार्बर पहुंचे मुख्यमंत्री ने जेटी और डॉकिंग क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा मछुआरों, मछली कारोबारियों और स्थानीय व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।

मछली पकड़ने और कारोबार से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली

मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य मंत्री और दक्षिण कन्नड़ जिले के प्रभारी मंत्री यूटी खाडर, स्थानीय नेता तथा दक्षिण कन्नड़ ट्रॉल बोट फिशरमैन एसोसिएशन के प्रतिनिधि मौजूद थे। शिवकुमार ने हार्बर में पहुंचकर उस दिन की मछली पकड़ने की गतिविधियों को देखा और मछुआरों तथा अधिकारियों से सुविधाओं, जेटी, नावों की पार्किंग और मछली कारोबार से जुड़े मुद्दों की जानकारी ली।

उन्होंने मछुआरों से सीधे बातचीत कर यह समझने की कोशिश की कि हार्बर में रोजमर्रा के कामकाज के दौरान उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मछुआरा संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के सामने बुनियादी ढांचे और आजीविका से जुड़े कई मुद्दे रखे तथा अपनी मांगों की सूची भी सौंपी।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार मछुआरों की मांगों की जांच करेगी और स्थायी समाधान खोजने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने विशेष रूप से हार्बर से जुड़े बुनियादी ढांचे और मछली पकड़ने वाली नौकाओं के संचालन से संबंधित समस्याओं पर अधिकारियों से जानकारी ली।

अल्वे बागिलु की ड्रेजिंग और नाव पार्किंग पर जोर

मछुआरों की प्रमुख मांगों में से एक अल्वे बागिलु यानी मुहाने की ड्रेजिंग से संबंधित है। शिवकुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही नावों की पार्किंग से जुड़ी समस्या को भी देखने की बात कही गई है।

हार्बर के संचालन में जेटी और नावों की आवाजाही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से मौजूदा सुविधाओं और आवश्यक सुधारों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मछुआरों की मांगों को केवल तत्काल राहत तक सीमित रखने के बजाय स्थायी समाधान तलाशने की बात कही।

मुख्यमंत्री के पहुंचने पर कारोबार रुकने पर मांगी रिपोर्ट

दौरे के दौरान शिवकुमार ने यह भी पाया कि उनके पहुंचने के बाद हार्बर में नियमित व्यापारिक गतिविधियां बाधित हुई थीं। मुख्यमंत्री ने इस पर नाराजगी जताई और दक्षिण कन्नड़ के उपायुक्त तथा मंगलुरु के पुलिस आयुक्त को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि सुरक्षा व्यवस्था के कारण हार्बर की सामान्य गतिविधियों को अनावश्यक रूप से रोका गया था, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मछली कारोबार से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका जुड़ी है और नियमित गतिविधियों को बिना उचित कारण बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

रिपोर्टों के मुताबिक, शिवकुमार ने अधिकारियों से यह भी जानना चाहा कि मछली कारोबार क्यों रोका गया था। उन्होंने सामान्य गतिविधियों को जारी रखने के निर्देश दिए और मामले की रिपोर्ट मांगी।

मछुआरिनों की सुविधाओं पर भी ध्यान

मुख्यमंत्री ने मछली कारोबार से जुड़ी महिलाओं की समस्याओं को भी सुना। मछुआरा समुदाय की महिलाओं ने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए। इनमें आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता से संबंधित शिकायतें शामिल थीं।

शिवकुमार ने कहा कि मछुआरिनों के लिए सुविधाओं में सुधार, विशेष अस्पताल परीक्षण की व्यवस्था और समर्पित एंबुलेंस उपलब्ध कराने से जुड़ी मांगों की भी जांच की जाएगी। सरकार का उद्देश्य मछली पकड़ने और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए स्वास्थ्य तथा अन्य जरूरी सेवाओं को बेहतर करना है।

कैबिनेट बैठक के एक दिन बाद हुआ दौरा

मुख्यमंत्री का मंगलुरु फिशिंग हार्बर दौरा राज्य कैबिनेट की शुक्रवार को मंगलुरु में हुई बैठक के एक दिन बाद हुआ। यह बैठक तटीय कर्नाटक के विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी। कैबिनेट बैठक में पर्यटन, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, मत्स्य क्षेत्र और तटीय कनेक्टिविटी से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार किया गया।

इसी क्रम में समुद्री अध्ययन, मछली पकड़ने की संस्कृति और ब्लू इकोनॉमी पर केंद्रित एक समर्पित विश्वविद्यालय की योजना भी सामने आई है। सरकार ने समुद्री शिक्षा की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

समुद्री शिक्षा और ब्लू इकोनॉमी पर सरकार का फोकस

तटीय कर्नाटक में समुद्री अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार की योजनाओं में शिक्षा और कौशल विकास को भी शामिल किया गया है। समुद्री अध्ययन और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े संस्थानों की क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य इस क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है।

कैबिनेट की बैठक में तटीय क्षेत्र को पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। राज्य सरकार ने तटीय जिलों में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कई योजनाएं प्रस्तावित की हैं।

जल परिवहन और सी-मेट्रो परियोजना पर भी योजना

तटीय कनेक्टिविटी सुधारने के लिए सरकार ने यात्री और माल जल परिवहन से जुड़ी पहलों पर भी काम करने की बात कही है। इनमें सी-मेट्रो या वाटर मेट्रो परियोजना भी शामिल है। मंगलुरु क्षेत्र में जल आधारित सार्वजनिक परिवहन की व्यवहार्यता का अध्ययन करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

इस तरह मंगलुरु दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के सामने एक ओर मछुआरों की रोजमर्रा की समस्याएं रहीं, वहीं दूसरी ओर तटीय क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास से जुड़ी योजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

मछुआरों की मांगों पर अब सरकार की नजर

डीके शिवकुमार के हार्बर दौरे का मुख्य उद्देश्य मछुआरों, व्यापारियों और हार्बर से जुड़े अन्य लोगों की समस्याओं को सीधे समझना रहा। अल्वे बागिलु की ड्रेजिंग, नावों की पार्किंग, हार्बर सुविधाओं, महिलाओं के लिए बुनियादी सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे सरकार के सामने रखे गए हैं।

मुख्यमंत्री ने संबंधित मांगों की जांच और स्थायी समाधान की दिशा में काम करने का आश्वासन दिया है। साथ ही हार्बर में कारोबार बाधित होने के मामले में उपायुक्त और पुलिस आयुक्त से रिपोर्ट मांगी गई है। अब इन मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई और सरकार के अगले फैसलों पर नजर रहेगी।

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