नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान गिरफ्तार, 2007 के मामले से जुड़ा है केस

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के पुराने मामले मे गिरफ्तार किया गया। ममता द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा के कुछ घंटे बाद हुई। कांग्रेस ने कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी ने इसे कानूनी बताया।

नंदीग्राम: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है। कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि बीजेपी ने कहा है कि पुलिस ने कानून के तहत कार्रवाई की है।

ममता बनर्जी के समर्थन के कुछ घंटे बाद गिरफ्तारी

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी शुक्रवार, 18 सितंबर को उस समय हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की थी। यह फैसला उनकी पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के चुनाव मैदान से हटने के बाद लिया गया।

ममता बनर्जी ने कोलकाता स्थित अपने कालीघाट आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका गुट नंदीग्राम में कोई नया उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा। उन्होंने इसे विपक्षी INDIA गठबंधन के साथ एकजुटता के तौर पर पेश किया।

इसके कुछ घंटे बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस नेताओं ने इसी समय-क्रम को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तारी एक पुराने मामले से संबंधित है और पुलिस की ओर से इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बताया गया है।

2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़ा मामला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। पार्टी का कहना है कि प्रधान का नाम 2007 के आंदोलन से संबंधित एक दर्जन से अधिक मामलों में आया है।

उन्हें पूर्व मेदिनीपुर जिले के चंडीपुर स्थित एक होटल से पकड़े जाने की जानकारी कांग्रेस नेताओं ने दी है। उनके साथ कांग्रेस नेता सुभाषिष भट्टाचार्य की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई है। आरोप है कि भट्टाचार्य ने पुलिस को प्रधान को गिरफ्तार करने से रोकने की कोशिश की।

कुछ रिपोर्टों में प्रधान की गिरफ्तारी को पुराने हत्या मामले से भी जोड़ा गया है। इंडिया टुडे ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि उनके खिलाफ 2007 से जुड़े तीन हत्या मामलों में कार्रवाई की गई। इसलिए मामले की कानूनी प्रकृति को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में विवरण अलग है।

कांग्रेस ने गिरफ्तारी पर क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इसे "वोट चोरी" और "चुनाव चोरी" बताया तथा कहा कि विपक्षी उम्मीदवार को निशाना बनाने के लिए एजेंसियों का कथित दुरुपयोग किया जा रहा है।

खड़गे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बीजेपी सरकार पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस दबाव में नहीं आएगी और विपक्षी दल मिलकर राजनीतिक रूप से जवाब देंगे।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रधान की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे "राजनीतिक बदले" की कार्रवाई बताया और आरोप लगाया कि बीजेपी निष्पक्ष चुनाव में भरोसा नहीं करती। गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी गिरफ्तारी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 19 साल पुराने मामले का इस्तेमाल करके चुनावी उम्मीदवार को गिरफ्तार किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप है। ये सभी आरोप कांग्रेस नेताओं के हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

बीजेपी का क्या कहना है?

बीजेपी ने कांग्रेस के राजनीतिक आरोपों को खारिज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी का कहना है कि पुलिस ने पुराने मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की है और गिरफ्तारी का चुनाव से संबंध जोड़ना उचित नहीं है।

इस तरह मामले में दो अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं। कांग्रेस गिरफ्तारी के समय और चुनावी संदर्भ को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि बीजेपी इसे कानूनी कार्रवाई बता रही है। अंतिम स्थिति संबंधित अदालत और जांच की प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

ममता बनर्जी ने भी गिरफ्तारी के समय पर उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने भी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा के कुछ ही समय बाद गिरफ्तारी हुई।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुराने मामले को अचानक सामने लाया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते हुए चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, ये आरोप भी राजनीतिक दावे हैं और उनके समर्थन में कोई न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

नंदीग्राम में चुनावी समीकरण तेजी से बदले

नंदीग्राम उपचुनाव पहले से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण मुकाबला बना हुआ है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट जीती थी, लेकिन बाद में उन्होंने सीट छोड़कर भवानीपुर सीट अपने पास रखी। इसके बाद नंदीग्राम में उपचुनाव की स्थिति बनी।

बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं। इसके अलावा वाम मोर्चा, इंडियन सेक्युलर फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस के एक अलग गुट की ओर से भी उम्मीदवार मैदान में हैं।

TMC उम्मीदवार ने नामांकन वापस लिया

नंदीग्राम उपचुनाव में एक और बड़ा घटनाक्रम तब हुआ जब ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया।

ममता गुट के इस फैसले ने नंदीग्राम के चुनावी समीकरण को बदल दिया है। उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख से एक दिन पहले यह घटनाक्रम सामने आया।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच विवाद का असर चुनावी पहचान पर भी पड़ा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल प्लेयर' चुनाव चिह्न दिया गया है। दूसरे गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले पर आपत्ति जताई है और इसे राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण बताया है। इन आरोपों पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी चुनौती आगे की स्थिति तय करेगी।

अब आगे क्या होगा?

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद नंदीग्राम उपचुनाव में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर घटनाक्रम तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने गिरफ्तारी के विरोध में प्रतिक्रिया दी है, जबकि बीजेपी ने इसे कानून के तहत कार्रवाई बताया है।

इस मामले में अदालत की कार्यवाही, प्रधान की जमानत और चुनावी प्रक्रिया पर इसका प्रभाव आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल नंदीग्राम उपचुनाव में 6 अक्टूबर की मतदान तारीख निर्धारित है और उम्मीदवारों से जुड़े घटनाक्रम चुनावी मुकाबले का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं।

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