Bihar UCC Controversy: अमित शाह के बयान से NDA में मतभेद, जानें नेताओं का रुख

Bihar UCC Controversy: समान नागरिक संहिता को लेकर अमित शाह के बयान के बाद बिहार NDA में चर्चा तेज है। जानें नीतीश कुमार, चिराग पासवान, मांझी और कुशवाहा का रुख।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code- UCC) को लेकर घोषणा के बाद बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर अलग-अलग रुख सामने आने लगे हैं।

पटना: Bihar UCC Controversy के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी है। शाह ने NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। इसके बाद बिहार में गठबंधन के सहयोगी दलों के रुख पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

बिहार में NDA के प्रमुख घटकों में जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। इन दलों के नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है कि UCC पर गठबंधन के भीतर अभी पूरी तरह एकराय नहीं बनी है।

JDU का रुख सबसे स्पष्ट

बिहार में UCC को लेकर सबसे कड़ा रुख JDU की ओर से सामने आया है। पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि बिहार में UCC को लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के पुराने रुख का हवाला देते हुए कहा कि JDU लंबे समय से इस मुद्दे पर अपनी अलग राय रखता रहा है।

हालांकि, JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद की ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि संजय झा इस विषय पर अमित शाह से बातचीत करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि अंतिम राजनीतिक रुख तय करने से पहले NDA के भीतर संवाद की कोशिश की जा रही है।

चिराग पासवान ने ड्राफ्ट को बनाया आधार

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी UCC पर तत्काल समर्थन या विरोध करने से परहेज किया है। उनका कहना है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रस्तावित कानून का मसौदा सार्वजनिक होना चाहिए। चिराग के मुताबिक, उनकी पार्टी समानता के साथ देश की विविधता को भी महत्व देती है। 

इसलिए UCC के ड्राफ्ट का अध्ययन, विभिन्न वर्गों पर उसके संभावित प्रभाव का आकलन और व्यापक चर्चा जरूरी है। इसके बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।

उपेंद्र कुशवाहा भी देखेंगे प्रस्ताव

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी फिलहाल अपना रुख खुलकर किसी एक पक्ष में नहीं रखा है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से वास्तविक प्रस्ताव या ड्राफ्ट सामने आने के बाद उस पर पार्टी के भीतर चर्चा की जाएगी। इस रुख से स्पष्ट है कि कुशवाहा की पार्टी केवल राजनीतिक घोषणा के आधार पर फैसला लेने के बजाय प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को देखने के बाद अपनी स्थिति तय करना चाहती है।

मांझी की पार्टी UCC के समर्थन में

दूसरी ओर, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने UCC को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक रुख अपनाया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि अगर केंद्रीय गृह मंत्री ने UCC को लेकर बात कही है तो इसके पीछे व्यापक हित की सोच होगी। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी पार्टी को UCC लागू करने में फिलहाल कोई बड़ी आपत्ति नहीं दिखती, लेकिन NDA के घटक दलों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा जरूरी है। उनके मुताबिक, समान नागरिक संहिता का दीर्घकालिक प्रभाव देश के लिए सकारात्मक हो सकता है।

गिरिराज सिंह के बयान से बढ़ी राजनीतिक गर्मी

UCC को लेकर NDA के भीतर अलग-अलग सुरों के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि आजादी के समय तुष्टीकरण की राजनीति के कारण समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो सकी। गिरिराज सिंह ने दावा किया कि UCC को लागू होने से रोकने से देश को नुकसान हुआ। उनके बयान के बाद उन NDA सहयोगी दलों के लिए स्थिति कुछ असहज हो गई है, जो अभी ड्राफ्ट देखने और चर्चा के बाद फैसला लेने की बात कर रहे हैं।

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