BRICS Summit 2026: किसानों के लिए क्या है नई दिल्ली घोषणा? जानें कृषि क्षेत्र से जुड़ी चार अहम पहल

BRICS Summit 2026 में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए चार अहम पहल सामने आईं। AGRIN, Farmers’ Rights Forum, Agroecology और Digital Agriculture Network पर सहमति

भारत ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई प्रमुख वैश्विक नेता शामिल हुए।

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और तकनीक के साथ कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को हुए सम्मेलन में सदस्य देशों ने किसानों, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि क्षेत्र से संबंधित कई दिशाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।

भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए इन पहलों का महत्व काफी अधिक है। देश में बड़ी संख्या में परिवार खेती और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर हैं। बदलता मौसम, सिंचाई की चुनौतियां, खेती की बढ़ती लागत, फसल में नुकसान और बाजार तक सीमित पहुंच किसानों की आय को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए आधुनिक तकनीक, कृषि अनुसंधान और बेहतर बाजार व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, घोषणा-पत्र में किसानों के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता देने वाली किसी नई योजना का ऐलान नहीं किया गया है। प्रस्तावित पहलें मुख्य रूप से सदस्य देशों के बीच सहयोग, ज्ञान साझा करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने से जुड़ी हैं।

BRICS AGRIN: बीज, कृषि संसाधन और जानकारी का साझा नेटवर्क

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में BRICS AGRIN (Agro-Inputs, Genetic Resources and Information Network) स्थापित करने पर सहमति बनी है। यह एक सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित मंच होगा। इसके माध्यम से सदस्य देश बीज, कृषि इनपुट, आनुवंशिक संसाधनों और खेती से जुड़ी जानकारी के क्षेत्र में अनुभव साझा कर सकेंगे।

इस पहल का उद्देश्य अलग-अलग देशों में मौजूद कृषि संबंधी ज्ञान और संसाधनों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इससे किसानों के लिए बेहतर बीज, नई कृषि पद्धतियों और उपयोगी तकनीकी जानकारी तक पहुंच विकसित करने के अवसर बन सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ सदस्य देशों द्वारा लागू की जाने वाली नीतियों और जमीनी स्तर पर होने वाले कार्यों पर निर्भर करेगा। 

बीजों से जुड़े किसानों के अधिकार पर वैश्विक मंच

घोषणा-पत्र में Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems शुरू करने का भी स्वागत किया गया है। इस मंच का उद्देश्य बीज प्रणाली से जुड़ी साझा चुनौतियों पर चर्चा करना, प्रभावी नीतियों को बढ़ावा देना और खेती से संबंधित पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण व आदान-प्रदान करना है। किसानों के लिए बीज केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। इस वैश्विक मंच के जरिए किसानों के अधिकार, बीज संरक्षण और पारंपरिक कृषि ज्ञान से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत को बढ़ावा मिल सकता है। 

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टिकाऊ खेती

ब्रिक्स देशों ने Agroecology and Regenerative Agriculture for Climate Resilience and Productivity से जुड़े उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क बनाने पर भी जोर दिया है। एग्रोइकोलॉजी और रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर जैसी पद्धतियां मिट्टी की गुणवत्ता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खेती की दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान देती हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण सूखा, अनियमित बारिश, अत्यधिक गर्मी और अचानक मौसम बदलाव जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में टिकाऊ कृषि पद्धतियों, जल संरक्षण और जलवायु-अनुकूल बीजों पर साझा अनुसंधान किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किसी तकनीक या पद्धति का फायदा स्थानीय जलवायु, फसल और किसान की आर्थिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। 

डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क से तकनीक को बढ़ावा

घोषणा-पत्र में BRICS Network on Digital Agriculture के जरिए डिजिटल खेती में सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। इस नेटवर्क में कृषि के साथ-साथ एग्रोफॉरेस्ट्री, मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर को भी शामिल किया गया है। डिजिटल कृषि के तहत सैटेलाइट आधारित निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जियोस्पेशियल तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

इन तकनीकों से फसल की स्थिति, मौसम संबंधी जोखिम और खेतों की निगरानी में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्थानीय भाषाओं में जानकारी और छोटे किसानों तक तकनीक की पहुंच जरूरी होगी। 

कृषि व्यापार और खाद्य सुरक्षा पर भी जोर

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में ब्रिक्स देशों के बीच कृषि उत्पादों और खेती में इस्तेमाल होने वाले इनपुट की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। सदस्य देशों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में कृषि वार्ताओं को आगे बढ़ाने और अधिक निष्पक्ष, संतुलित तथा विकास-केंद्रित कृषि व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया।

घोषणा-पत्र में ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज स्थापित करने की पहल पर आगे चर्चा जारी रखने की बात भी कही गई है। इसका उद्देश्य भविष्य में अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के व्यापार से जुड़ी संभावनाओं पर काम करना है।

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