भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चीन की महत्वाकांक्षी निवेश योजना को रोककर वैश्विक मंच पर अपनी ताकत और स्थिर रुख दिखाया है। इसके बाद चीन ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की इच्छा जताई है।
बिजनेस न्यूज़: भारत और चीन के द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। हाल ही में सामने आई खबरों के मुताबिक, भारत ने चीन की एक महत्वपूर्ण योजना को सिरे से खारिज कर दिया। यह मामला विश्व व्यापार संगठन के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) से जुड़ा था। भारत ने चीन के नेतृत्व वाले ‘इनवेस्टमेंट फेसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट (IFD)’ समझौते को WTO के कानूनी ढांचे में शामिल होने से रोक दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि इस मुद्दे पर भारत अकेला देश था जिसने अंत तक अपने रुख पर डटा रहा। भारत का स्पष्ट कहना था कि यह समझौता WTO के मूल सिद्धांतों को कमजोर करेगा और विकासशील देशों के हितों के खिलाफ होगा। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में अपने रुख को मजबूती से पेश कर रहा है और अपने आर्थिक हितों की सुरक्षा पर जोर दे रहा है।
WTO में भारत का कड़ा रुख
हाल ही में हुई WTO की 14वीं मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) में चीन के नेतृत्व वाले ‘Investment Facilitation for Development (IFD)’ समझौते को WTO के कानूनी ढांचे में शामिल करने का प्रयास किया गया। भारत ने इस योजना को सिरे से खारिज कर दिया। भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कहा कि यह समझौता WTO के मूल सिद्धांतों के विपरीत है और इसे मंजूरी देना वैश्विक व्यापार के संतुलन को कमजोर करेगा। भारत ने अकेले ही इस मामले में अपनी पोजीशन पर डटे रहने का साहस दिखाया।
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चीन का रुख बदला
WTO सम्मेलन के दौरान चीनी वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ के साथ मुलाकात में, भारत ने संतुलित व्यापार और निवेश पर जोर दिया। इसके बाद चीन ने संकेत दिया कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करना चाहता है। चीनी मंत्री ने कहा कि भारत के साथ सहयोग एक “संतुलनकारी तत्व” (ballast) की तरह काम कर सकता है, जिससे दोनों देशों को वैश्विक व्यापार में लाभ होगा।
पीयूष गोयल ने इस मुलाकात के बाद कहा कि भारत का फोकस केवल व्यापार बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उसे संतुलित और स्थिर बनाने पर है। भारत ने निर्यातकों के लिए विशेष अवसरों की मांग की, जिसमें दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद, मछली और कृषि उत्पाद शामिल हैं।
भारत-चीन व्यापार का आंकड़ा
मौजूदा समय में भारत और चीन के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच, चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए। इस अवधि में भारत-चीन व्यापार 137 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अमेरिका के साथ यह आंकड़ा 127.8 अरब डॉलर रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापार में वृद्धि मुख्यतः आयात की वजह से हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष के 11 महीनों में $119.5 अरब तक पहुंच गया। इसके कारण व्यापार घाटा $102.1 अरब तक बढ़ गया। GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, यह असंतुलन भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों, सोलर सेल्स, मशीनरी, ऑर्गेनिक केमिकल्स और फार्मा सामग्री पर चीन की निर्भरता को दर्शाता है।









