Vikata Sankashti Chaturthi 2026: पूजा विधि और शुभ समय के साथ व्रत की जानकारी

Vikata Sankashti Chaturthi 2026 5 अप्रैल को है। शाम 06:20 से 08:06 बजे पूजा, रात 09:58 बजे चंद्रमा अर्घ्य से व्रत का पूर्ण लाभ मिलता है।

Vikata Sankashti Chaturthi 2026 इस वर्ष 5 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह विशेष व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए रखा जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:20 से रात 08:06 बजे तक रहेगा और चंद्रोदय रात 09:58 बजे होगा। व्रत और पूजा विधि सरल है, जिसमें पंचामृत, फूल, मोदक और दूर्वा अर्पित किए जाते हैं।

Vikata Sankashti Chaturthi 2026: इस वर्ष वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि अनुसार विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। व्रती इस दिन सुबह स्नान कर पूजा के लिए साफ वस्त्र धारण करेंगे और शाम 06:20 से रात 08:06 बजे तक शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं। चंद्रोदय रात 09:58 बजे होगा, जिस समय व्रती चंद्रमा को अर्घ्य देंगे।

विकट संकष्टी चतुर्थी कब और क्यों मनाई जाती है

विकट संकष्टी चतुर्थी हर मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है, लेकिन वैशाख मास की यह तिथि विशेष रूप से “विकट” संकष्टी के रूप में जानी जाती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से माना जाता है कि भगवान गणेश की कृपा से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और शुभ कार्यों में सफलता मिलती है।

इस वर्ष 5 अप्रैल 2026 को सुबह 11:59 बजे से तिथि प्रारंभ होगी और अगले दिन दोपहर 02:10 बजे समाप्त होगी। इस समय के बीच व्रती अपने पूजा और व्रत का पालन करेंगे।

पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

व्रती सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और पूजा के लिए लाल या पीले वस्त्र की चौकी तैयार करें। गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने के बाद उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं और साफ जल से शुद्ध करें।
इसके बाद सिंदूर, अक्षत, फूल, फल और दूर्वा अर्पित करें। व्रती मोदक और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और गणेश जी के मंत्रों का जाप करें। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:20 से रात 08:06 बजे तक रहेगा।

इस विधि से व्रती भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं और व्रत का संपूर्ण लाभ उठा सकते हैं।

Vikata Sankashti Chaturthi 2026: पूजा विधि और शुभ समय के साथ व्रत की जानकारी

चंद्रोदय का समय और अर्घ्य

व्रत के दौरान चंद्रमा को अर्घ्य देना भी आवश्यक माना जाता है। इस वर्ष चंद्रोदय रात 09:58 बजे होगा। इस समय व्रती चंद्रमा को जल अर्पित कर अपने व्रत और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे। चंद्रमा को अर्घ्य देने से व्रत पूर्ण माना जाता है और शुभ परिणाम मिलते हैं।

व्रत का पालन करते समय व्रती को संयम और श्रद्धा बनाए रखना चाहिए, जिससे पूजा और व्रत का पूरा लाभ प्राप्त होता है।

Vikata Sankashti Chaturthi 2026 का महत्व

विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत सभी बाधाओं को दूर करने और जीवन में सफलता, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने का माना जाता है। भगवान गणेश के विशेष आशीर्वाद से छात्रों, व्यवसायियों और गृहस्थों को उनके कार्यों में सफलता मिलती है।

व्रत का पालन करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसलिए यह व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

पूजा और व्रत की तैयारी

व्रती सुबह से ही अपने मन और घर को शुद्ध करें। पूजा की सामग्री जैसे फूल, दूर्वा, मोदक, फल, बेसन के लड्डू और पंचामृत पहले से तैयार रखें।
पूजा के दौरान सभी सामग्रियों का सही उपयोग और मंत्रों का जाप व्रती की भक्ति और श्रद्धा को बढ़ाता है।

शुभ मुहूर्त में पूजा और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

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