भारत ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष पर चिंता जताई। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया और नागरिकों पर हमले की निंदा करते हुए शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया।
New Delhi: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं, जिनमें काबुल और कंधार प्रमुख शहर शामिल हैं। इस हमले में पाकिस्तान ने दावा किया कि करीब 130 अफगान लड़ाके मारे गए हैं। वहीं अफगान तालिबान ने हमले की पुष्टि की, लेकिन किसी भी नागरिक या सैनिक के हताहत होने से इनकार किया है। इस बीच भारत ने इस संघर्ष पर अपनी गंभीर चिंता जताई है। भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि पड़ोसी देशों के बीच किसी भी तरह की हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत का समर्थन अफगानिस्तान की संप्रभुता के लिए
भारत ने पहले भी कई बार पाकिस्तान की हरकतों की निंदा की है। भारत की नीति यह रही है कि अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए। अक्टूबर 2025 में भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ा था। उस समय तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर आए थे। भारत ने तब स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देता है और पड़ोसी देशों पर आरोप लगाकर अपनी अंतरराष्ट्रीय नाकामियों को छुपाने की कोशिश करता है।
विदेश मंत्रालय का बयान

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच पहले हुए तनाव के समय तीन मुख्य बातें साफ की थीं। उन्होंने कहा कि पहली, पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है और उनके संचालन में मदद करता है। दूसरी, पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं और असफलताओं का ठीकरा पड़ोसी देशों पर फोड़ता है। तीसरी, पाकिस्तान इस बात से नाराज है कि अफगानिस्तान अपने क्षेत्रों में संप्रभु अधिकार का उपयोग कर रहा है। इस बयान से यह साफ हो गया कि भारत हमेशा अफगानिस्तान के समर्थन में खड़ा रहेगा और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों की निंदा करेगा।
रमजान के महीने में हवाई हमले पर भारत की प्रतिक्रिया
इस साल फरवरी में, रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तान ने पूर्वी अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए। इन हमलों में आम नागरिकों की जानें भी गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और इसे पाकिस्तान की अपनी आंतरिक विफलताओं को छुपाने का प्रयास बताया। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक माह में या आम नागरिकों को निशाना बनाकर हमला करना अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानवाधिकारों के खिलाफ है।
पिछले संघर्षों का प्रभाव
पिछले साल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हुई झड़पों में भी कई आम नागरिक मारे गए थे। भारत ने तब भी स्पष्ट किया था कि इस तरह की घटनाएं न केवल मानवता के खिलाफ हैं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को भी खतरे में डालती हैं। भारत का रुख हमेशा से यह रहा है कि पड़ोसी देशों में युद्ध और हिंसा के बजाय संवाद और कूटनीतिक उपाय अपनाए जाएं।












