AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी में वैश्विक निवेश तेजी से बढ़ा है, जिससे भारतीय IT कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। बड़े टेक दिग्गज डेटा सेंटर और ऑटोमेशन खुद कर रहे हैं, जिससे आउटसोर्सिंग कम हो रही है और प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है।
Indian IT: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर ने टेक इंडस्ट्री की दिशा ही बदल दी है। डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है, चिप्स की जरूरत आसमान छू रही है और बड़े क्लाउड प्लेटफॉर्म्स रिकॉर्ड निवेश कर रहे हैं। लेकिन इस तेजी के बीच भारतीय आईटी कंपनियों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की ताजा रिपोर्ट यही तस्वीर पेश करती है।
हाइपरस्केलर कंपनियों की कमाई में रिकॉर्ड बढ़त
रिपोर्ट के मुताबिक अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS), माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी क्लाउड कंपनियों की कमाई में तेज़ी देखी गई है। AWS की आय 35.6 अरब डॉलर रही, जो सालाना आधार पर 24% अधिक है। माइक्रोसॉफ्ट के इंटेलिजेंट क्लाउड कारोबार की कमाई 32.9 अरब डॉलर रही, इसमें 29% की बढ़त दर्ज हुई जबकि Azure की ग्रोथ 39% रही। गूगल क्लाउड ने सबसे तेज़ उछाल दिखाया और उसकी कमाई 17.7 अरब डॉलर तक पहुंची, जो पिछले साल की तुलना में 48% ज्यादा है। साफ है कि AI की मांग इन कंपनियों के लिए बड़ा इंजन बन गई है।
कैपेक्स में रिकॉर्ड निवेश
एंटीक की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 में ये चार बड़ी टेक कंपनियां मिलकर लगभग 630 अरब डॉलर पूंजीगत खर्च कर सकती हैं। यह 2025 के लगभग 390 अरब डॉलर से 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी है। माइक्रोसॉफ्ट ने केवल एक तिमाही में ही 37.5 अरब डॉलर खर्च किए। अमेज़न 2026 में लगभग 200 अरब डॉलर, अल्फाबेट 175-185 अरब डॉलर और मेटा 115-135 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बना रही है। इसका मतलब है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च आने वाले कई सालों तक ऊंचा रहेगा।
इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। पहले ये वैश्विक कंपनियां कई तकनीकी काम भारतीय आईटी कंपनियों को आउटसोर्स करती थीं, लेकिन अब वे खुद अपने डेटा सेंटर, AI प्लेटफॉर्म और ऑटोमेशन सिस्टम तैयार कर रही हैं। इसके कारण आईटी सेवाओं की मांग में सुस्ती आई है, प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है और आउटसोर्सिंग की तीव्रता घट रही है।
AI के कारण लंबी अवधि में जोखिम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भविष्य में एप्लिकेशन डेवलपमेंट, टेस्टिंग, मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे पारंपरिक आईटी काम AI के कारण प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल स्थिति स्थिर है, लेकिन लंबी अवधि में बिजनेस मॉडल में बदलाव की संभावना बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय आईटी कंपनियों को इन नई चुनौतियों के लिए अपने मॉडल और प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव करना होगा। AI और ऑटोमेशन पर आधारित नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करना होगा ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बनी रह सके।
मजबूत ऑर्डर बुक से मिल रही राहत
हालांकि पूरी तस्वीर निगेटिव नहीं है। क्लाउड कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है। गूगल क्लाउड का बैकलॉग 55% बढ़कर 240 अरब डॉलर हो गया है। इसका मतलब है कि AI की मांग केवल मौजूदा उछाल नहीं है, बल्कि लंबी अवधि का रुझान है। इस मजबूत बैकलॉग से भारतीय आईटी कंपनियों को कम से कम वर्तमान प्रोजेक्ट्स और आउटसोर्सिंग में कुछ स्थिरता मिल सकती है।
शेयरों पर ब्रोकरेज की नई राय
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने इन हालात को देखते हुए भारतीय आईटी कंपनियों के वैल्यूएशन में 5% से 10% तक कटौती की है और ग्रोथ अनुमान थोड़ा घटाया है। ब्रोकरेज ने इंफोसिस, टेक महिंद्रा और विप्रो पर ‘होल्ड’ की सलाह बरकरार रखी है। वहीं, टीसीएस और एचसीएल टेक की रेटिंग ‘बाय’ से घटाकर ‘होल्ड’ कर दी गई है। इसका मतलब है कि निवेशकों को इन शेयरों में फिलहाल तेजी की उम्मीद कम करनी चाहिए, लेकिन लंबी अवधि के लिए यह अभी भी भरोसेमंद क्षेत्र है।











