India Capex Cycle 2026 में सरकारी खर्च से पावर ट्रांसमिशन कंपनियों को मजबूत बढ़त मिल रही है। नए ऑर्डर और मार्जिन में सुधार दिख रहा है, जबकि गैर-विद्युत औद्योगिक कंपनियों की रफ्तार अभी सीमित बनी हुई है।
Stock Market: देश में पूंजीगत खर्च यानी Capex Cycle इस समय नई दिशा में बढ़ता दिख रहा है। एक ओर पावर ट्रांसमिशन से जुड़ी हाई वोल्टेज कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर गैर-विद्युत औद्योगिक कंपनियां अभी भी सुस्त रफ्तार में आगे बढ़ रही हैं। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल इस Capex Cycle की असली ताकत सरकार है। सरकारी खर्च में तेजी ने खासकर पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई ऊर्जा दी है।
एचवी ट्रांसमिशन सेक्टर की तेज रफ्तार
हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों का प्रदर्शन इस समय बेहद मजबूत नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों के नए ऑर्डर में सालाना आधार पर 33 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। बिक्री में 39 प्रतिशत की तेजी आई है। सबसे अहम बात यह है कि इनका मुनाफा मार्जिन बढ़कर 20.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 5.40 प्रतिशत ज्यादा है।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि इस सेक्टर में मांग मजबूत बनी हुई है। सरकार की ओर से नवीकरणीय ऊर्जा और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर बड़े निवेश का सीधा फायदा कंपनियों को मिल रहा है। इससे ऑर्डर बुक मजबूत हो रही है और भविष्य की आय का भरोसा भी बढ़ रहा है।
9.15 लाख करोड़ का ट्रांसमिशन प्लान
सरकार ने 2022 से 2032 के बीच ट्रांसमिशन क्षेत्र में 9.15 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। इस अवधि में 8 से 10 बड़े हाई वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इनमें से 3 कॉरिडोर के लिए जरूरी उपकरणों का काम पहले ही तय किया जा चुका है।
यह योजना बताती है कि आने वाले वर्षों में एचवी ट्रांसमिशन कंपनियों के पास काम की कमी नहीं रहने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार 2027 तक नए ऑर्डर में और तेजी देखने को मिल सकती है। साथ ही 2030 तक मांग ऊंचे स्तर पर रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि इस सेक्टर में लंबी अवधि का ग्रोथ ट्रेंड बन सकता है।
12.2 लाख करोड़ का इंफ्रा कैपेक्स
वित्त वर्ष 2027 के बजट में सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। यह पहले के अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, रेलवे और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में यह खर्च किया जाएगा।
सरकारी Capex बढ़ने का असर सीधा उन कंपनियों पर पड़ता है जो बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करती हैं। इसके अलावा अगर अमेरिका और यूरोप के साथ व्यापार समझौते होते हैं तो निर्यात में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे औद्योगिक गतिविधि को और सहारा मिल सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक फैक्ट्रियों की क्षमता उपयोग दर 77.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। आमतौर पर जब यह दर 75 प्रतिशत से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती है तो निजी कंपनियां भी नए निवेश की योजना बनाने लगती हैं। यह संकेत देता है कि आगे चलकर Private Capex भी बढ़ सकता है।
गैर-विद्युत कंपनियों की धीमी चाल
जहां पावर ट्रांसमिशन कंपनियां तेजी दिखा रही हैं, वहीं गैर-बिजली औद्योगिक कंपनियों की तस्वीर उतनी मजबूत नहीं है। इन कंपनियों की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 9 प्रतिशत की ही बढ़त हुई है। मुनाफा मार्जिन घटकर 11.7 प्रतिशत रह गया है।
हालांकि राहत की बात यह है कि इन कंपनियों को मिलने वाले नए ऑर्डर 26 प्रतिशत बढ़े हैं। यह बढ़त धातु, तेल और गैस जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ डाटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे नए सेक्टर से आई है।
फिर भी पारंपरिक फैक्ट्री लगाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाला निवेश अभी धीमा है। निजी कंपनियां बड़े स्तर पर निवेश शुरू करने से पहले मांग में स्थिरता देखना चाहती हैं।
सरकारी नीतियों से उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार सरकार की कर कटौती, जीएसटी सुधार, प्रोत्साहन योजनाएं और ब्याज दरों में नरमी जैसे कदम आगे चलकर निजी निवेश को बढ़ा सकते हैं। यदि आर्थिक माहौल स्थिर रहता है और मांग में सुधार जारी रहता है तो Private Sector Capex में भी तेजी आ सकती है।
फिलहाल तेजी कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है, खासकर पावर और ट्रांसमिशन से जुड़ी कंपनियों में। यही वजह है कि ब्रोकरेज हाउस इन सेक्टर पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
किन शेयरों पर ब्रोकरेज का दांव
नुवामा ने जिन कंपनियों को अपनी टॉप पिक बताया है, उनमें BHEL, Hitachi Energy, GVT and D और CG Power शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार थर्मल उपकरण और बिजली ट्रांसमिशन से जुड़ी कंपनियों में मजबूती बनी हुई है।
इन कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत है और मार्जिन में सुधार दिख रहा है। सरकारी प्रोजेक्ट्स में इनकी भागीदारी से आने वाले वर्षों में राजस्व बढ़ने की संभावना है। हालांकि पूरे निजी क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश की लहर अभी शुरू नहीं हुई है, इसलिए निवेशकों को चयनित सेक्टर पर ध्यान देना चाहिए।










