भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा: कोलकाता में एक साथ शामिल होंगे 3 युद्धपोत

भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होने जा रहा है, जहां कोलकाता में एक साथ तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों को शामिल किया जाएगा। इससे नौसेना की समुद्री सुरक्षा

भारतीय नौसेना जून के तीसरे सप्ताह में कोलकाता में एक औपचारिक समारोह के दौरान अपने बेड़े में तीन नए युद्धपोत शामिल करने जा रही है। ये जहाज Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) द्वारा निर्मित हैं और इन्हें आधिकारिक रूप से नौसेना में कमीशन किया जाएगा।

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना जून 2026 के तीसरे सप्ताह में एक महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि हासिल करने जा रही है, जब एक ही समारोह में तीन स्वदेशी युद्धपोतों को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह कदम न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region - IOR) में रणनीतिक संतुलन पर भी प्रभाव डाल सकता है।

सूत्रों के अनुसार, यह समारोह कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में आयोजित किया जाएगा, जहां इन युद्धपोतों का निर्माण किया गया है। इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं और संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें भाग ले सकते हैं।

एक साथ तीन युद्धपोतों का शामिल होना क्यों महत्वपूर्ण है?

भारतीय नौसेना द्वारा एक साथ तीन युद्धपोतों का कमीशन किया जाना देश की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। इससे समुद्री सीमाओं की निगरानी, तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी अभियानों में नौसेना की क्षमता कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में विभिन्न वैश्विक शक्तियों की समुद्री गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

कौन-कौन से युद्धपोत होंगे शामिल?

इस कमीशनिंग के तहत जिन तीन प्रमुख युद्धपोतों को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा, वे हैं:

INS दूनागिरी (Project 17A फ्रिगेट)

भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा: कोलकाता में एक साथ शामिल होंगे 3 युद्धपोत

INS दूनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट है। यह इस श्रेणी का पांचवां जहाज है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित दूसरा फ्रिगेट है। इस युद्धपोत की विशेषताएं:

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली
  • सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
  • क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS)
  • डीजल या गैस आधारित संयुक्त प्रोपल्शन सिस्टम
  • इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम

यह फ्रिगेट आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में उच्च गति, सटीक हमला क्षमता और बेहतर स्टेल्थ विशेषताओं के लिए जाना जाता है। INS दूनागिरी को लगभग 80 महीनों में तैयार किया गया, जबकि इसके पहले लीड शिप INS नीलगिरी को तैयार होने में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट 17A के तहत अभी दो और फ्रिगेट—INS महेंद्रगिरि और INS विंध्यगिरि—भी निर्माण और कमीशनिंग के विभिन्न चरणों में हैं।

INS अग्रय: पनडुब्बी रोधी युद्ध में मजबूत कड़ी

INS अग्रय, 16 जहाजों वाले ‘अरणाला-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट’ कार्यक्रम का हिस्सा है। यह श्रृंखला विशेष रूप से तटीय और उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन की गई है। इसकी प्रमुख विशेषताएं:

  • हल्के टॉरपीडो सिस्टम
  • स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर
  • उन्नत सोनार सिस्टम
  • तटीय निगरानी और रक्षा क्षमता

यह पोत विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रभावी है जहां दुश्मन पनडुब्बियां छिपकर संचालन कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र में हाल के वर्षों में समुद्री प्रतिस्पर्धा और निगरानी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। चीन और पाकिस्तान सहित कई देशों द्वारा समुद्री ताकत बढ़ाने के प्रयासों के बीच भारत का यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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