भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को 94.29 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर मजबूती, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और एफआईआई की बिकवाली ने घरेलू मुद्रा और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया।
Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 94.29 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.18 पर खुला और फिर फिसलकर 94.29 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 33 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। इससे पहले बुधवार को रुपया 93.96 पर बंद हुआ था।
विशेषज्ञों के अनुसार रुपया गिरने के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया संकट का समाधान न होना स्थानीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा रहा है। डॉलर की मजबूती ने वैश्विक बाजारों में निवेशकों को सुरक्षित विकल्प की ओर आकर्षित किया है, जिससे रुपया कमजोर हुआ।
एफआईआई बिकवाली और घरेलू शेयर बाजार पर असर
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार निकासी ने रुपया और कमजोर किया है। बुधवार को एफआईआई ने शुद्ध रूप से 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार में दबाव बढ़ गया।
इस बिकवाली के चलते शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 926.92 अंक गिरकर 74,346.53 पर और निफ्टी 280.95 अंक टूटकर 23,025.50 पर आ गया। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि विदेशी निवेशक वर्तमान बाजार परिस्थितियों में अपने निवेश को सुरक्षित मान रहे हैं।
डॉलर की मजबूती का असर
डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.08 प्रतिशत बढ़कर 99.67 पर पहुंच गया। यह छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाता है। डॉलर में बढ़त के कारण अन्य मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है और रुपया भी कमजोर हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर की मजबूती लंबे समय तक बनी रहने पर घरेलू मुद्रा पर दबाव और बढ़ सकता है। निवेशकों को इस समय रुपये के उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
कच्चे तेल के दाम और बाजार पर प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव वायदा कारोबार में 0.78 प्रतिशत गिरकर 107.1 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयातक देश की मुद्रा पर दबाव डालती हैं क्योंकि तेल आयात के लिए डॉलर की मांग बढ़ जाती है।
पश्चिम एशिया संकट का समाधान न निकलने के कारण तेल की कीमतें स्थिर नहीं हैं। इससे विदेशी मुद्रा बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है और रुपया कमजोर होता है।
घरेलू बाजार में निवेशकों की स्थिति
स्थानीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही महत्वपूर्ण स्तर पर टूट गए हैं। निवेशक इस समय जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं और बड़ी बिकवाली से बच रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार में सुधार तब आएगा जब विदेशी निवेशक वापस आएंगे और डॉलर की मजबूती कम होगी। इसके अलावा तेल की कीमतों में स्थिरता और वैश्विक संकट का समाधान भी बाजार को राहत देगा।









