भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए जीवनदायी पहल: विप्र फाउंडेशन ने झुंझुनूं में शुरू किया 101 परिंडों का अभियान

राजस्थान झुंझुनूं में विप्र फाउंडेशन ने 101 परिंडे लगाने का अभियान शुरू किया। भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था की जा रही है।

झुंझुनूं में विप्र फाउंडेशन ने भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पक्षियों के लिए 101 परिंडे लगाने का अभियान शुरू किया है। पहले चरण में 21 परिंडे लगाए गए और नियमित रूप से दाना-पानी की व्यवस्था भी की जाएगी।

झुंझुनू: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पक्षियों के लिए पानी और भोजन की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। ऐसे समय में विप्र फाउंडेशन ने एक सराहनीय पहल करते हुए जिलेभर में पक्षियों के लिए परिंडे (मिट्टी के जलपात्र) लगाने और नियमित दाना-पानी उपलब्ध कराने का विशेष अभियान शुरू किया है।

इस अभियान का उद्देश्य गर्मी के मौसम में पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें जीवनदायी संसाधन उपलब्ध कराना है।

101 परिंडों का लक्ष्य, पहले चरण में 21 लगाए गए

विप्र फाउंडेशन ने झुंझुनूं जिले में कुल 101 परिंडे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अभियान की शुरुआत प्रथम चरण में 21 परिंडों के साथ की गई, जिन्हें विभिन्न सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर स्थापित किया गया है।

इन परिंडों में नियमित रूप से पानी भरकर पक्षियों के लिए राहत सुनिश्चित की जाएगी, ताकि गर्मी के कारण किसी भी पक्षी को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए परिंडे

अभियान के तहत परिंडे जिले के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • बिबाणी धाम बालाजी मंदिर प्रांगण
  • इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर (मंडेला रोड)
  • अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थल

इन स्थानों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां लोगों की आवाजाही अधिक रहती है, जिससे परिंडों की नियमित देखभाल और निगरानी आसान हो सके।

5 क्विंटल अनाज की व्यवस्था, नियमित दाना-पानी का प्रबंधन

अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि निरंतर चलने वाला सेवा कार्य बनाया गया है। विप्र फाउंडेशन ने इस पहल के तहत 5 क्विंटल अनाज की व्यवस्था की है, जिसे पक्षियों के लिए नियमित रूप से उपयोग किया जाएगा।

फाउंडेशन के कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करेंगे कि परिंडों के साथ-साथ पक्षियों के लिए सुबह और शाम दोनों समय दाना डाला जाए, ताकि उन्हें भोजन की तलाश में भटकना न पड़े। यह व्यवस्था अभियान को स्थायी और प्रभावी बनाती है।

अभियान का नेतृत्व और संगठनात्मक संरचना

यह पूरा अभियान विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक सुशील ओझा के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। झुंझुनूं जिले में इसका संचालन जिला संयोजक उमाशंकर महमिया और पंडित हरिकृष्ण शुक्ला के सानिध्य में किया जा रहा है।

जिला कोषाध्यक्ष राकेश सहल और जिला मंत्री विकास पुरोहित के सहयोग से अनाज और संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

सामाजिक सहभागिता और सामूहिक प्रयास

इस अभियान में संगठन के कई सदस्यों और समाजसेवियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान जिला संगठन महामंत्री रामगोपाल महमिया, जिला मंत्री रमेश चौमाल, गोपीराम पुरोहित, श्यामसुंदर दाधीच, तहसील अध्यक्ष अनिल जोशी, राकेश व्यास, एडवोकेट रवि शुक्ला और गुड्डू पुरोहित सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सभी ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और जीवदया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और इसे निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

पर्यावरण संरक्षण और जीवदया की दिशा में पहल

विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों के लिए प्राकृतिक जल स्रोत कम होते जा रहे हैं। ऐसे में परिंडे अभियान जैसे प्रयास न केवल पक्षियों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक हैं।

यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

स्थानीय स्तर पर सकारात्मक प्रभाव

झुंझुनूं जिले में इस अभियान को स्थानीय लोगों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे लगाए जाने से लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और कई नागरिक भी इस अभियान से जुड़ने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं।

लोगों का मानना है कि इस तरह की पहलें समाज में सेवा भावना को मजबूत करती हैं और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव बढ़ाती हैं।

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