बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में गरमाहट मतदान केंद्रों से कहीं अधिक नजर आ रही है।मतदान के बीच, मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अचानक केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के पटना आवास पर मुलाकात की।
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान जारी है, लेकिन इस बीच राजनीतिक हलचल मतदान केंद्रों से ज्यादा पटना के गलियारों में नजर आ रही है। मंगलवार सुबह अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के पटना स्थित आवास का दौरा किया।
दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में लंबी और महत्वपूर्ण बातचीत हुई, जो राज्य की सियासी स्थितियों और आगामी सत्ता समीकरण को लेकर चर्चा का विषय बन गई।
नीतीश कुमार का अचानक दौरा
जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार की यह मुलाकात अचानक हुई। चुनाव के दौरान ऐसे दौरे आम तौर पर सियासी रणनीति और संगठन में सुधार को लेकर किए जाते हैं। दोनों नेताओं ने इस मुलाकात में विधानसभा चुनाव के नतीजों, उम्मीदवारों की स्थिति और एनडीए गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री सीधे JDU के पटना कार्यालय में बने 'वॉर रूम' पहुंचे।
वहां उन्होंने कार्यालय का निरीक्षण किया और एक बैठक की जिसमें प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और वरिष्ठ नेता विजय चौधरी भी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में मतदान की स्थिति, बूथ स्तर की तैयारियों और चुनाव प्रचार के अंतिम रणनीतिक कदमों पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी असमंजस
इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से लगातार सवाल उठ रहे हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है, लेकिन नतीजों के बाद विधायक दल मुख्यमंत्री का फैसला करेगा। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को जन्म दिया कि क्या नीतीश कुमार ही फिर से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रहेंगे।
ललन सिंह ने इस पर स्पष्ट किया कि शाह के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा, “विधानसभा में नेता चुनने की परंपरा हमेशा से रही है और 2020 में भी इसी प्रक्रिया के तहत नीतीश कुमार को नेता चुना गया। चुनाव परिणाम के बाद विधायक दल की ओर से नेता चुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
JDU के 'वॉर रूम'
JDU का वॉर रूम सिर्फ चुनाव अभियान का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पार्टी की रणनीति, बूथ प्रबंधन और गठबंधन समन्वय का भी प्रमुख केंद्र है। नीतीश कुमार के इस दौरे को पार्टी के भीतर एकजुटता और मजबूती का संकेत माना जा रहा है। साथ ही यह संकेत भी देता है कि मुख्यमंत्री पद के आसपास उठ रहे सवालों के बीच पार्टी नेतृत्व स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मतदान के दौरान नेताओं का यह दौरा कार्यकर्ताओं और बूथ स्तर पर लगे लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए भी किया गया। चुनाव नतीजों की घोषणा 14 नवंबर को होने वाली है, और इसके पहले यह दौरा JDU की तैयारियों और रणनीतिक दृष्टिकोण को उजागर करता है।











