सुप्रीम कोर्ट ने यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों के धर्मांतरण रोधी कानूनों पर दाखिल याचिकाओं की तुरंत सुनवाई करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई दिसंबर 2025 में नियत कार्यक्रम अनुसार होगी।
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों में बनाए गए धर्मांतरण रोधी कानूनों (Anti Conversion Law) के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। मंगलवार, 11 नवंबर 2025 को याचिकाकर्ता ने इस महीने सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन शीर्ष न्यायालय ने इसे असंभव बताया और कहा कि इन याचिकाओं की सुनवाई दिसंबर में होगी।
बेंच में शामिल न्यायाधीशों ने दिया स्पष्ट बयान
मामला मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच के सामने रखा गया। याचिकाकर्ता के वकील ने अंतरिम याचिका अगले हफ्ते सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, लेकिन सीजेआई गवई ने स्पष्ट कहा कि यह संभव नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाओं को पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार दिसंबर में सूचीबद्ध किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश के रिटायरमेंट का असर
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई 23 नवंबर 2025 को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि सभी याचिकाओं की सुनवाई उनके रिटायर होने से पहले नहीं होगी। यह मामला लंबे समय से कोर्ट में लंबित है, और राज्यों से पहले ही उनके रुख स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
राज्यों से मांगा गया जवाब
16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्यों को निर्देश दिए थे कि वे धर्मांतरण रोधी कानूनों पर अपना रुख स्पष्ट करें। तब कोर्ट ने यह कहा था कि जब तक राज्य जवाब नहीं देंगे, तब तक कानूनों के कार्यान्वयन पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। बेंच ने राज्यों को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया और इसके बाद याचिकाकर्ताओं को दो हफ्ते में अपना उत्तर दाखिल करने की अनुमति दी।
याचिकाकर्ताओं का अनुरोध
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह दावा किया था कि कानूनों के कारण अंतरधार्मिक विवाहों और व्यक्तिगत धर्म परिवर्तन के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि कानूनों पर तुरंत रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि सुनवाई तय कार्यक्रम के अनुसार दिसंबर में होगी।
कानूनों की संवैधानिक वैधता पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक द्वारा बनाए गए धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच करेगी। इन कानूनों में अंतरधार्मिक विवाहों और धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कानून
उत्तर प्रदेश का धर्मांतरण रोधी कानून न केवल अंतरधार्मिक विवाहों से जुड़ा है, बल्कि सभी तरह के धर्म परिवर्तन पर लागू होता है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म को अपनाना चाहता है, तो उसके लिए विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की गई है। वहीं, उत्तराखंड के कानून में यह प्रावधान है कि जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन करने पर दो साल तक की जेल का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाई
6 जनवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों द्वारा लाए गए विवादास्पद कानूनों की जांच पर सहमति जताई थी। तब अदालत ने अंतरधार्मिक शादियों और धर्मांतरण की प्रक्रिया पर इन कानूनों की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करने का निर्णय लिया था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि कानूनों पर तुरंत रोक लगाई जाए ताकि फिलहाल कोई व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस समय ऐसा करना संभव नहीं है और यह मामला नियत कार्यक्रम अनुसार दिसंबर में सूचीबद्ध किया जाएगा।









