बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों में बिहार में आठ से अधिक नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे।
पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार प्रत्येक नागरिक तक बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करना है, ताकि लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या अन्य राज्यों में न जाना पड़े।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य के तहत गया में महाबोधि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का उद्घाटन किया गया है, जो न केवल गया जिले बल्कि आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए भी बड़ी राहत साबित होगा।
हर जिले में मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़ा अस्पताल स्थापित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार चाहती है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक इलाज की सुविधा अपने जिले में ही मिल सके।
सम्राट चौधरी ने गया में हाल ही में शुरू हुए महाबोधि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह परियोजना सरकार की प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता का प्रमाण है। सीमित समय में तैयार हुआ यह अत्याधुनिक संस्थान न केवल गया जिले बल्कि आसपास के कई जिलों के लाखों लोगों के लिए राहत का केंद्र बनकर उभरा है।
उन्होंने बताया कि महाबोधि मेडिकल कॉलेज 650 बेड की क्षमता वाला आधुनिक अस्पताल है, जहां अनुभवी डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है। यहां चौबीसों घंटे इमरजेंसी, जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

एनडीए सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार
उपमुख्यमंत्री ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के पुराने दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1925 से 1989 के बीच राज्य में कई मेडिकल कॉलेज स्थापित हुए थे, लेकिन 1989 से 2008 के लगभग दो दशकों में एक भी नया मेडिकल कॉलेज नहीं खुल सका। इस लंबे अंतराल का असर यह हुआ कि स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर होती चली गईं और लोगों को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ और अन्य राज्यों में जाना पड़ता था।
उन्होंने दावा किया कि अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले वर्षों में बिहार के लोगों को इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सुशासन की शुरुआत के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा को विकास की धुरी बनाया गया। वर्तमान समय में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में आठ से अधिक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से बिहार का स्वास्थ्य ढांचा पहले से कहीं अधिक सशक्त होगा।
उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि महाबोधि मेडिकल कॉलेज को 100 एमबीबीएस सीटों की मान्यता मिल चुकी है और शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों का नामांकन भी पूरा कर लिया गया है। इससे बिहार के युवाओं को मेडिकल की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।










