OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला: पिता या पति की आय बनेगी आधार?

OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला: पिता या पति की आय बनेगी आधार?

कर्नाटक की एक महिला से जुड़ा OBC क्रीमी लेयर का विवाद इस समय सुप्रीम कोर्ट में बहस का विषय बन गया है। मामला यह है कि महिला के माता-पिता की पेंशन को उनकी इनकम में जोड़ा गया, जबकि महिला का तर्क है कि उनकी माता-पिता की पेंशन को उसकी योग्यता का आधार नहीं माना जाना चाहिए। 

नई दिल्ली: कोई OBC महिला creamy layer में आती है या नहीं, यह तय करने के लिए परिवार की आय का मूल्यांकन किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर बहस चल रही है कि महिला की योग्यता तय करते समय उसके पति की आय को जोड़ना चाहिए या पिता की आय को आधार मानना चाहिए। यह मामला कर्नाटक में सामने आया है, जहां एक महिला, जो हिंदू नामधारी कम्युनिटी से आती है, ने Judicial Officer बनने के लिए आवेदन किया है। 

वह रिज़र्व्ड कैटेगरी II-A के अंतर्गत आती हैं। इस बहस का निर्णय यह स्पष्ट करेगा कि OBC महिलाओं के लिए “क्रीमी लेयर” का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा—पति की आय या पिता की आय—जो रिजर्वेशन और सरकारी भर्तियों में उनके अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण है।

मामला क्या है?

कर्नाटक की महिला, जो हिंदू नामधारी कम्युनिटी से आती हैं, ने ज्यूडिशियल ऑफिसर बनने के लिए आवेदन किया। वह कैटेगरी II-A (OBC) के तहत रिजर्वेशन में आती हैं। अप्रैल 2018 में उन्होंने कैटेगरी III-B से एक व्यक्ति से शादी की और तब से अपने माता-पिता से अलग, अपने पति के साथ रह रही हैं।महिला ने सिविल जज की पोस्ट के लिए आवेदन किया, जिसमें कुल 57 पदों में से केवल 6 पद कैटेगरी II-A के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। उन्होंने जाति प्रमाणपत्र वेरिफिकेशन के दौरान पति की आय के आधार पर क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की।

लेकिन जिला जाति और इनकम वेरिफिकेशन कमेटी ने उनका आवेदन खारिज कर दिया और कहा कि महिला अपने माता-पिता की आय के आधार पर क्रीमी लेयर में आती हैं, इसलिए वह रिजर्वेशन के लिए पात्र नहीं हैं।

पति की आय पर महिला का तर्क

महिला ने हाई कोर्ट में दलील दी कि शादीशुदा महिला की क्रीमी लेयर योग्यता उसके पति की आय के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि उसके माता-पिता की आय के आधार पर। उन्होंने बताया कि उनके पति की सालाना आय उन्हें क्रीमी लेयर डिसक्वालिफिकेशन से बाहर रखती है। महिला के माता-पिता पेशे से सरकारी कर्मचारी रहे हैं। उनकी मां कर्नाटक ज्यूडिशियल सर्विस से रिटायर हुईं और पिता असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के पद से रिटायर हुए।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने महिला की दलीलों को खारिज कर दिया और निर्णय दिया कि माता-पिता की पेंशन और आय को भी परिवार की कुल आय में शामिल किया जाएगा। राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि माता-पिता की पेंशन भी उम्मीदवार की आय का हिस्सा मानी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान सीनियर वकील संजय एम नूली ने बेंच के समक्ष तर्क प्रस्तुत किए। 

उन्होंने सवाल उठाया कि शादीशुदा महिला उम्मीदवार की क्रीमी लेयर योग्यता के लिए पति की आय को मान्यता दी जानी चाहिए या पिता की आय को आधार बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी पूछा कि माता-पिता की पेंशन को आय में शामिल किया जाना चाहिए या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया और दो हफ्ते के अंदर जवाब देने का आदेश दिया। अपीलकर्ता को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने की अनुमति दी गई। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। इस फैसले से OBC क्रीमी लेयर की नीति में संभावित बदलाव हो सकता है, क्योंकि यह निर्णय शादीशुदा महिलाओं के रिजर्वेशन और क्रीमी लेयर गणना के लिए दिशा-निर्देश तय करेगा।

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