कानपुर: भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय में नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हुई मारपीट का विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। मामले में पूर्व जिला मंत्री शिवपूजन सविता अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और FIR दर्ज करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान करीब चार घंटे तक हंगामा चलता रहा। घटना ने पार्टी के अंदर चल रहे आपसी विवाद और अनुशासन को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय में एक स्वागत समारोह आयोजित किया गया था। इसी दौरान बैठने को लेकर नेताओं के बीच विवाद शुरू हुआ। कहासुनी धीरे-धीरे गाली-गलौज में बदली और फिर दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। देखते ही देखते माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद के दौरान पहले धक्का-मुक्की हुई और इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थक भी आमने-सामने आ गए। हालात बिगड़ते देख वहां मौजूद अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव की कोशिश की। कुछ देर के लिए मामला शांत भी हुआ, लेकिन बाद में दोनों पक्ष दोबारा भिड़ गए।
बताया गया कि मारपीट के दौरान लात-घूंसे चलने के साथ चप्पलें भी चलीं। घटना में कुछ लोगों के कपड़े तक फट गए। कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं ने किसी तरह दोनों पक्षों को अलग कराया। मामले की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक भी पहुंची।
विवाद बढ़ने के बाद पूर्व जिला मंत्री शिवपूजन सविता अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस से मारपीट करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। समर्थकों के साथ धरने पर बैठने के कारण थाने के बाहर भी काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।
धरने के दौरान समर्थकों ने कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि पार्टी कार्यालय जैसी जगह पर मारपीट की घटना गंभीर है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
मामले को शांत कराने के लिए पुलिस और पार्टी के पदाधिकारियों की ओर से बातचीत की कोशिश की गई। हालांकि तत्काल FIR की मांग पर अड़े समर्थकों के कारण विवाद काफी देर तक बना रहा। करीब चार घंटे तक हंगामा चलने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
उधर, पार्टी नेतृत्व ने भी घटना को गंभीरता से लिया है। क्षेत्रीय अध्यक्ष की ओर से मारपीट और अनुशासनहीनता पर नाराजगी जताई गई है। पार्टी स्तर पर घटना की जांच के लिए पदाधिकारियों की टीम बनाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।
पार्टी की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि संगठन के कार्यक्रम में इस तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई और मारपीट में किन लोगों की भूमिका रही।
इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि मामला अब सिर्फ पार्टी के अंदरूनी स्तर तक सीमित नहीं रहा। पूर्व जिला मंत्री के समर्थकों के थाने पहुंचने और FIR की मांग को लेकर धरना देने से पुलिस के सामने भी कार्रवाई का सवाल खड़ा हो गया है।
पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है। घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान भी लिए जा सकते हैं। यदि मारपीट का कोई वीडियो सामने आया है तो उसकी जांच से भी यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि विवाद किस तरह बढ़ा।
पार्टी कार्यालय में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी जांच में अहम हो सकती है। इससे घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर मारपीट तक की पूरी तस्वीर सामने आने की संभावना है।
घटना के बाद भाजपा के स्थानीय संगठन में भी चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के कार्यक्रम में नेताओं के बीच इस तरह सार्वजनिक रूप से विवाद होना संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। वहीं, दोनों पक्षों के समर्थकों के आमने-सामने आने से विवाद के और बढ़ने की आशंका भी बनी हुई थी।
फिलहाल पुलिस और पार्टी नेतृत्व दोनों स्तर पर मामले को संभालने की कोशिश की जा रही है। एक तरफ पूर्व जिला मंत्री और उनके समर्थक FIR की मांग कर रहे हैं, वहीं पार्टी स्तर पर जांच कर दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।
अब सभी की नजर पुलिस की कार्रवाई और पार्टी की जांच रिपोर्ट पर है। यदि CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों पर कानूनी और संगठनात्मक दोनों स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।
भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय में हुई यह मारपीट पार्टी के लिए भी बड़ा सवाल बन गई है, क्योंकि जिस कार्यालय में संगठनात्मक कार्यक्रम और स्वागत समारोह होना था, वहीं नेताओं और समर्थकों के बीच हाथापाई हो गई। चार घंटे तक चले हंगामे के बाद अब मामला पुलिस और पार्टी नेतृत्व के सामने है।









