केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने रविवार को पटना में जीतन राम मांझी के ‘तिलचट्टे-झींगुर’ वाले बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को गलत ठहराना उचित नहीं है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं।
पटना: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी की युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी पर असहमति जताई है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए पूरे युवा वर्ग को गलत बताना उचित नहीं है। चिराग ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि विरोध की आड़ में अराजकता फैलाने वालों की पहचान अलग से की जानी चाहिए।
मांझी के बयान पर चिराग पासवान ने जताई नाराजगी
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी के ‘तिलचट्टे और झींगुर’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए युवाओं के प्रति इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाए। रविवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में चिराग ने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को कमजोर और गलत साबित करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं ने समय-समय पर देश की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई आंदोलनों से ऐसे नेतृत्वकर्ता सामने आए हैं, जिन्होंने लंबे समय तक समाज और देश को प्रभावित किया। ऐसे में युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है।
चिराग की यह प्रतिक्रिया मांझी के बयान के बाद सामने आई है। दोनों नेता केंद्र सरकार में मंत्री हैं। चिराग ने अपनी बात रखते हुए युवाओं के योगदान और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को महत्व देने पर जोर दिया।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अहम हिस्सा
चिराग पासवान ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके मुताबिक, देश में समय-समय पर हुए आंदोलनों ने बदलाव लाने के साथ नए नेतृत्व को आगे आने का अवसर भी दिया है।
हालांकि, चिराग ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध और अराजक गतिविधियों में अंतर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति या समूह प्रदर्शन की आड़ में हिंसा या अव्यवस्था फैलाने की कोशिश करता है, तो उसकी पहचान करना जरूरी है।
उनके अनुसार, कुछ लोगों की गतिविधियों के आधार पर पूरे युवा वर्ग को गलत ठहराना उचित नहीं है। चिराग ने यह भी कहा कि हाल में देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की गई थी, जिसे केंद्र सरकार ने नियंत्रित किया। यह इस घटनाक्रम को लेकर उनका बयान था।
मांझी ने सोशल मीडिया पर क्या कहा था?
विवाद की शुरुआत केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। खबर के अनुसार, मांझी ने दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन के संदर्भ में टिप्पणी की थी। उन्होंने भारत को शेर पैदा करने वाली धरती बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उल्लेख किया।
मांझी ने अपनी पोस्ट में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जैसे नेताओं के सामने न तिलचट्टे टिकेंगे और न झींगुर। उन्होंने इसके साथ ‘भारत माता की जय’, ‘संविधान जिंदाबाद’ और ‘लोकतंत्र जिंदाबाद’ जैसे नारे भी लिखे थे।
मांझी की इसी टिप्पणी पर चिराग पासवान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने युवाओं को लेकर ऐसी भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और देश के आंदोलनों में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। इस बयानबाजी के बाद दोनों नेताओं के विचारों में अंतर चर्चा का विषय बन गया है।











