BMC मेयर रेस में सियासी उलटफेर की संभावना: उद्धव ठाकरे गुट का दावा- 'हम सिर्फ 6 सीटें पीछे'

BMC मेयर चुनाव में सियासी समीकरण बदल सकते हैं। उद्धव ठाकरे गुट ने दावा किया है कि वह सिर्फ 6 सीटें पीछे है। जानिए मुंबई की राजनीति से जुड़ी पूरी खबर।

कई वर्षों के लंबे इंतजार के बाद देश की सबसे बड़ी नगर पालिका, बीएमसी के चुनाव संपन्न हुए। 89 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और महायुति ने मिलकर बहुमत का आंकड़ा भी पार कर लिया है।

मुंबई: देश की सबसे बड़ी नगर पालिका बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव नतीजों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुंबई का अगला मेयर कौन होगा। चुनाव के नतीजों ने जहां महायुति (बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना) को स्पष्ट बढ़त दी है, वहीं उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) ने मेयर रेस को लेकर बड़ा सियासी दावा कर मुंबई की राजनीति में हलचल मचा दी है।

227 सीटों वाली BMC में मेयर चुनने के लिए 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है। चुनाव परिणामों के मुताबिक, बीजेपी ने 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर अपनी स्थिति मजबूत की है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। इस तरह महायुति गठबंधन के पास कुल 118 सीटें हैं, जो मेयर पद के लिए जरूरी बहुमत से ज्यादा हैं।

उद्धव सेना का बड़ा दावा

हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने मेयर चुनाव को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है। उनका कहना है कि विपक्षी गठबंधन के पास कुल 108 सीटें हैं और वे बहुमत से सिर्फ 6 सीटें पीछे हैं। संजय राउत ने दावा किया कि यदि कुछ निर्दलीय या अन्य दलों के पार्षदों का समर्थन मिल जाता है, तो विपक्ष भी मेयर पद पर कब्जा कर सकता है।

संजय राउत ने कहा, हमारे पास इस वक्त 108 पार्षदों का समर्थन है। मेयर के लिए 114 का आंकड़ा चाहिए और हम सिर्फ 6 सीटें पीछे हैं। मुंबई की राजनीति में कुछ भी संभव है, इसलिए इंतजार कीजिए।

विपक्ष का सीट गणित

चुनाव नतीजों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिली हैं। उनके साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी गठबंधन किया था, जिसे 6 सीटें हासिल हुई हैं। कांग्रेस ने वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ मिलकर 24 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 8 सीटें जीती हैं। समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिली हैं। अजित पवार की एनसीपी को 3 सीटें और शरद पवार गुट की एनसीपी को 1 सीट मिली है। 

गौरतलब है कि अजित पवार फिलहाल महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन उन्होंने BMC चुनाव अलग लड़ने का फैसला किया था। इन सभी दलों को मिलाकर विपक्ष का दावा है कि उनके पास कुल 108 पार्षदों का समर्थन है। ऐसे में केवल 6 पार्षदों के इधर-उधर होने से मेयर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

दूसरी ओर, महायुति गठबंधन खुद को पूरी तरह आश्वस्त बता रहा है। 118 सीटों के साथ उनके पास न सिर्फ बहुमत है, बल्कि अतिरिक्त समर्थन का भी कुशन मौजूद है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मेयर चुनाव में महायुति की स्थिति फिलहाल मजबूत दिखती है, लेकिन उद्धव ठाकरे गुट की रणनीति सियासी जोड़-तोड़ को जन्म दे सकती है।

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