पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर रीपोलिंग के दौरान सुबह 11 बजे तक 43% मतदान हुआ। EVM विवाद के बाद चुनाव आयोग ने दोबारा वोटिंग कराई है। 285 बूथों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। रिजल्ट 24 मई को घोषित होगा।
फलता: West Bengal की फालता विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान कराया गया। सुबह 11 बजे तक करीब 43% मतदान दर्ज किया गया। चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त रखा है, क्योंकि पिछले मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में कथित गड़बड़ी और छेड़छाड़ के आरोप सामने आए थे।
फालता विधानसभा क्षेत्र में कुल 285 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जहां शाम 6 बजे तक मतदान होगा। मतगणना 24 मई को की जाएगी। यह सीट इस समय पश्चिम बंगाल की राजनीति और चुनावी पारदर्शिता पर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनी हुई है।
क्यों करानी पड़ी दोबारा वोटिंग
फालता सीट पर पहली बार मतदान 29 अप्रैल को हुआ था। मतदान के बाद विपक्षी दल Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली भाजपा ने आरोप लगाया कि कई बूथों पर EVM मशीनों में भाजपा के चुनाव चिन्ह वाले बटन पर टेप चिपकाया गया था।
इसके अलावा कई मतदान केंद्रों से EVM में तकनीकी खराबी और वेब कैमरा फुटेज के साथ छेड़छाड़ की शिकायतें भी सामने आईं। चुनाव पर्यवेक्षकों द्वारा जांच के बाद कथित तौर पर करीब 60 बूथों में अनियमितताओं के संकेत मिले।
इन आरोपों को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग ने फालता विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने का फैसला किया।
हर बूथ पर दोगुनी सुरक्षा
चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में काफी मजबूत कर दी है। पहले जहां प्रत्येक बूथ पर चार सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते थे, वहीं अब हर पोलिंग स्टेशन पर आठ जवानों की ड्यूटी लगाई गई है।
अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ-साथ संवेदनशील बूथों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
भीषण गर्मी के बावजूद मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला और सुबह से ही कई बूथों पर लंबी कतारें नजर आईं।
मुख्य मुकाबला TMC और भाजपा के बीच
फालता सीट पर मुख्य चुनावी मुकाबला All India Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (भाजपा) के बीच माना जा रहा है।
हालांकि चुनाव से ठीक पहले TMC उम्मीदवार Jahangir Khan ने मौखिक रूप से चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी थी। इसके बावजूद चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार उनका नाम और चुनाव चिन्ह EVM में बरकरार है, क्योंकि नाम वापसी की कानूनी समयसीमा पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
इस राजनीतिक स्थिति ने चुनाव को और अधिक जटिल बना दिया है।
EVM में क्यों नहीं बदला उम्मीदवार का नाम
चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, नामांकन और नाम वापसी की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद EVM में उम्मीदवार का नाम या पार्टी चिन्ह नहीं बदला जा सकता।
ऐसे में फालता सीट पर EVM में TMC के प्रतीक चिन्ह के साथ जहांगीर खान का नाम और तस्वीर बनी हुई है। हालांकि TMC ने औपचारिक रूप से चुनाव प्रचार से दूरी बना ली है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उम्मीदवार केवल मौखिक रूप से पीछे हटे हैं और चुनाव आयोग ने इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है, तो ज्यादा वोट मिलने पर वे जीत का दावा भी कर सकते हैं।
फालता सीट का राजनीतिक इतिहास
Falta विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। कभी यह सीट CPI(M) का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, लेकिन पिछले एक दशक में यहां TMC का प्रभाव बढ़ा।
TMC ने पहली बार 2001 में यह सीट जीती थी। 2006 में वामपंथी दलों ने वापसी की, लेकिन 2011 के बाद से TMC लगातार यहां जीत दर्ज करती रही है।
भाजपा अब तक इस सीट पर कभी जीत हासिल नहीं कर सकी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने दक्षिण 24 परगना जिले में अपनी स्थिति मजबूत की है।
दक्षिण 24 परगना में भाजपा की बढ़ती पकड़
फालता विधानसभा क्षेत्र दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आता है। जिले में कुल 31 विधानसभा सीटें हैं। पिछले चुनावों में भाजपा ने इनमें से 10 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत की थी।
सागर, काकद्वीप, गोसाबा और सोनारपुर जैसे क्षेत्रों के अलावा जादवपुर और बेहला जैसे शहरी इलाकों में भी भाजपा ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था।
हालांकि बासंती, कुलतली और रायदीघी जैसी सीटों पर TMC अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही थी।
बंगाल की सत्ता में बड़ा बदलाव
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगभग 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली TMC को बड़ा झटका लगा है।
राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 293 सीटों में से 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं TMC केवल 80 सीटों तक सीमित रह गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फालता जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना नई सरकार और चुनाव आयोग दोनों के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।
मतदान प्रक्रिया पर देशभर की नजर
फालता में दोबारा मतदान केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह चुनावी पारदर्शिता और EVM सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है।
चुनाव आयोग के लिए यह जरूरी हो गया था कि वह मतदान प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखे। इसी कारण इस बार सुरक्षा, निगरानी और तकनीकी व्यवस्थाओं को पहले से कहीं अधिक मजबूत किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुनर्मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होता है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास मजबूत हो सकता है।
मतगणना पर टिकी निगाहें
फालता विधानसभा सीट के नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि पुनर्मतदान का असर अंतिम परिणामों पर कितना पड़ता है।
भाजपा इस सीट को अपनी राजनीतिक बढ़त के प्रतीक के रूप में देख रही है, जबकि TMC के लिए यह सीट अपनी साख बचाने की चुनौती बन गई है।
फिलहाल फालता में शांतिपूर्ण मतदान कराने पर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का पूरा फोकस बना हुआ है।










