BRICS Summit 2026: भारत ने बनाई आम सहमति, जयशंकर ने गिनाईं बड़ी उपलब्धियां

BRICS Summit 2026: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ध्रुवीकृत दुनिया के बीच भारत ने BRICS में आम सहमति बनाने में सफलता हासिल की। जानिए समिट की बड़ी उपलब्धियां।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे भारत की बड़ी कामयाबी बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया कई हिस्सों में बंटी हुई है और युद्ध व देशों के बीच गहरे मतभेद जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

नई दिल्ली: नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शिखर सम्मेलन की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव, युद्ध और देशों के बीच गहरे मतभेदों के बावजूद भारत सदस्य देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर आम सहमति बनाने में सफल रहा। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की मजबूत आयोजन और संवाद क्षमता का उदाहरण बताया।

जयशंकर के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में BRICS Summit का सफल आयोजन अपने आप में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय गहरे ध्रुवीकरण, संघर्ष और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाकर साझा मुद्दों पर बातचीत और सहमति तैयार करना भारत की कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।

32 प्रतिनिधिमंडलों ने लिया हिस्सा

विदेश मंत्री ने बताया कि BRICS Summit में कुल 32 डेलीगेशन ने भाग लिया। इनमें 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के अलावा चार क्षेत्रीय संगठनों तथा सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेता पहुंचे।

इसके अलावा इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों की मौजूदगी ने भी सम्मेलन के महत्व को बढ़ाया।

ध्रुवीकृत दुनिया में सहमति बनाना बड़ी चुनौती

जयशंकर ने कहा कि BRICS Summit ऐसे समय में हुआ जब दुनिया कई गंभीर संघर्षों और मतभेदों से जूझ रही है। विभिन्न देशों के रणनीतिक और आर्थिक हितों में अंतर होने के बावजूद भारत साझा सहमति बनाने में सफल रहा। उनके अनुसार, यह सम्मेलन केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नेताओं के बीच खुले और सहज संवाद के लिए भी मंच बना।

उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को सम्मेलन के सामने मौजूद सबसे कठिन मुद्दों में से एक बताया। इसके बावजूद BRICS देशों के बीच एक साझा बयान जारी किया गया, जिसमें शांति, सुरक्षा और स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया गया।

ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन पर जोर

BRICS नेताओं के बीच वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। जयशंकर के अनुसार, इन मुद्दों पर साझा रुख सामने आना बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच महत्वपूर्ण संदेश है।

ग्लोबल साउथ की आवाज को प्राथमिकता

विदेश मंत्री ने कहा कि सम्मेलन का एजेंडा केवल भू-राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं था। इसमें अर्थव्यवस्था, विकास, तकनीक और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को प्रमुख स्थान दिया गया। विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों, तकनीकी सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में उनकी भूमिका जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे।

जयशंकर ने कहा कि BRICS Summit की सफलता ने यह दिखाया कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत विभिन्न देशों को संवाद के लिए एक मंच पर ला सकता है। साथ ही, यह वैश्विक आर्थिक विकास, तकनीकी सहयोग और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।

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