तरुण तेजपाल ने गोवा कोर्ट में किया सरेंडर, 10 साल की सजा के बाद जेल भेजे गए

गोवा: तरुण तेजपाल ने 2013 यौन हिंसा मामले में गोवा कोर्ट के सामने सरेंडर किया। बॉम्बे हाईकोर्ट की 10 साल की सजा के बाद उन्हें कोलवाले जेल भेजा गया।

तरुण तेजपाल ने 2013 के यौन हिंसा मामले में 14 सितंबर 2026 को गोवा की अदालत में सरेंडर किया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील पर 22 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।

पणजी: तहलका के संस्थापक और पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के यौन हिंसा मामले में सोमवार, 14 सितंबर 2026 को गोवा के मापुसा स्थित अदालत के सामने सरेंडर कर दिया। अदालत की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया। तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 6 अगस्त 2026 को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। तेजपाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन्हें सरेंडर से छूट देने से इनकार किया है और उनकी आपराधिक अपील को 22 सितंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, बशर्ते वह निर्धारित समय के भीतर सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करें।

सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से छूट की मांग ठुकराई

बॉम्बे हाईकोर्ट से 10 साल की सजा मिलने के बाद तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से अदालत से सरेंडर से छूट देने और अपील पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को सरेंडर से छूट की अर्जी खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह का समय देते हुए सरेंडर करने और उसका प्रमाणपत्र दाखिल करने की अनुमति दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, यदि सरेंडर सर्टिफिकेट 21 सितंबर तक दाखिल किया जाता है, तो उनकी आपराधिक अपील पर 22 सितंबर को नियमित पीठ के सामने सुनवाई हो सकती है।

इस आदेश के बाद तेजपाल ने 14 सितंबर को मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया, जहां उन्हें हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा काटनी होगी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा था बरी किए जाने का फैसला

इस मामले में कानूनी घटनाक्रम करीब 13 साल से जारी है। गोवा की ट्रायल कोर्ट ने 21 मई 2021 को तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी।

लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया और तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उन पर कुल 10.21 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और यह राशि सर्वाइवर को मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद तेजपाल ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी अपील अभी विचाराधीन है।

2013 में महिला पत्रकार ने लगाए थे यौन हिंसा के आरोप

यह मामला नवंबर 2013 का है। तेजपाल के साथ काम करने वाली एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा में तहलका के एक कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में उनके साथ यौन हिंसा की गई।

महिला पत्रकार ने 18 नवंबर 2013 को तहलका प्रबंधन के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 20 नवंबर को तेजपाल ने पत्रिका के एडिटर-इन-चीफ पद से इस्तीफा दे दिया। 21 नवंबर को गोवा पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की और 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया गया।

मामला सामने आने के बाद यह देश के सबसे चर्चित यौन अपराध मामलों में शामिल हो गया। इसके साथ ही कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही और पीड़ितों की शिकायतों से जुड़े सवालों पर भी व्यापक बहस हुई।

2021 में ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी

मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली। 21 मई 2021 को गोवा की सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने मामले की दोबारा समीक्षा की और अगस्त 2026 में ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में ट्रायल कोर्ट के साक्ष्यों के आकलन पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि यौन हिंसा के मामलों में शिकायतकर्ता से किसी तरह के ‘परफेक्ट विक्टिम’ जैसा व्यवहार करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में दी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती

हाईकोर्ट के फैसले के बाद तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। उनकी ओर से मामले में साक्ष्यों और दोषसिद्धि को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट में अगस्त में हुई सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से यह दलील भी दी गई कि मामले में इस्तेमाल किए गए साक्ष्य, जिसमें सीसीटीवी फुटेज शामिल है, शिकायतकर्ता के बयानों के साथ पूरी तरह मेल नहीं खाते। ये दलीलें अब उनकी मुख्य अपील की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने होंगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी तत्काल सरेंडर से छूट की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील पर सुनवाई के लिए पहले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सरेंडर करना आवश्यक है।

गोवा सरकार ने उम्रकैद की मांग की

इस मामले में केवल तेजपाल की अपील ही सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं है। गोवा सरकार ने भी हाईकोर्ट द्वारा दी गई 10 साल की सजा को चुनौती देते हुए सजा बढ़ाने की मांग की है।

राज्य सरकार का तर्क है कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए 10 साल की सजा पर्याप्त नहीं है और मामले में उम्रकैद की सजा दी जानी चाहिए। अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के सामने सरकार ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा था।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट के सामने मामले से जुड़े दो प्रमुख कानूनी पक्ष हैं। तेजपाल अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दे रहे हैं, जबकि गोवा सरकार सजा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग कर रही है।

22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम 22 सितंबर 2026 को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई है। सुप्रीम कोर्ट के 25 अगस्त के आदेश के अनुसार, 21 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल होने पर आपराधिक अपील को 22 सितंबर को नियमित पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा।

इस सुनवाई में तेजपाल की दोषसिद्धि, 10 साल की सजा और मामले से जुड़े साक्ष्यों पर कानूनी बहस आगे बढ़ सकती है। साथ ही गोवा सरकार की ओर से सजा बढ़ाने की मांग भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रहेगी।

फिलहाल तेजपाल कोलवाले सेंट्रल जेल में हैं और हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार 10 साल की सजा का सामना कर रहे हैं। उनकी सुप्रीम कोर्ट अपील पर होने वाली सुनवाई से इस मामले की आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।

2013 से 2026 तक मामले की टाइमलाइन

  • 7-8 नवंबर 2013: महिला पत्रकार ने गोवा के एक होटल की लिफ्ट में यौन हिंसा के आरोप लगाए।
  • 18 नवंबर 2013: महिला पत्रकार ने तहलका प्रबंधन के सामने शिकायत की।
  • 20 नवंबर 2013: तरुण तेजपाल ने एडिटर-इन-चीफ पद से इस्तीफा दिया।
  • 21 नवंबर 2013: गोवा पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की।
  • 30 नवंबर 2013: गोवा पुलिस ने तेजपाल को गिरफ्तार किया।
  • जुलाई 2014: बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने उन्हें जमानत दी।
  • 21 मई 2021: गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तेजपाल को बरी किया।

मई 2021: गोवा सरकार ने बरी किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

6 अगस्त 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 10.21 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

25 अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से छूट की मांग खारिज की और तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया।

14 सितंबर 2026: तेजपाल ने गोवा की अदालत में सरेंडर किया और उन्हें कोलवाले सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

22 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट में तेजपाल की आपराधिक अपील पर सुनवाई प्रस्तावित है।

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