Hindi Diwas: हिंदी किसी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं, राष्ट्रीय एकता की कड़ी है- अमित शाह

Hindi Diwas 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हिंदी किसी भारतीय भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली कड़ी है।

हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि देश में बोली जाने वाली अलग-अलग भाषाएं भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

नई दिल्ली: हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की भाषाई विविधता को देश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत में बोली जाने वाली अलग-अलग भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे देश के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान को भी अपने भीतर समेटे हुए हैं। अमित शाह ने लोगों, खासकर युवाओं से दुनिया की अधिक से अधिक भाषाएं सीखने की अपील की, लेकिन साथ ही अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने का संदेश भी दिया।

हिंदी दूसरी भारतीय भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी नहीं

अमित शाह ने कहा कि हिंदी का उद्देश्य देश की दूसरी भाषाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। इसके बजाय हिंदी अलग-अलग भाषाई समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता ही उसकी ‘विविधता में एकता’ की पहचान को मजबूत करती है।

गृह मंत्री के मुताबिक, देश की प्रत्येक भाषा अपने साथ एक समृद्ध इतिहास, लोक परंपरा और दुनिया को देखने का विशिष्ट दृष्टिकोण लेकर चलती है। यही विविध भाषाएं मिलकर आने वाली पीढ़ियों के विचारों और मूल्यों को आकार देती हैं। इसलिए किसी एक भाषा को दूसरी भाषा के मुकाबले खड़ा करने के बजाय सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान पर जोर दिया जाना चाहिए।

दुनिया की भाषाएं सीखें, मातृभाषा से जुड़े रहें

अमित शाह ने युवाओं से कहा कि उन्हें वैश्विक स्तर पर संवाद के लिए ज्यादा से ज्यादा भाषाएं सीखनी चाहिए, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों के साथ मातृभाषा में बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा बोलने में किसी भी व्यक्ति को हीन भावना नहीं रखनी चाहिए। मातृभाषा व्यक्ति को उसकी मां, मिट्टी, इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है। 

उनके अनुसार, अपनी भाषा का सम्मान करना केवल भाषाई पहचान बनाए रखना नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और आत्मगौरव को मजबूत करना भी है। अमित शाह ने याद दिलाया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने भाषा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति’ के आह्वान से भी जोड़ा।

गुजराती मातृभाषा, लेकिन हिंदी से आम लोगों से जुड़ाव

अमित शाह ने अपनी मातृभाषा गुजराती का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों में आम लोगों से सीधे संवाद स्थापित करने में हिंदी उनकी मदद करती है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारतीय भाषाओं ने राष्ट्र निर्माण, प्रशासन और विकास की प्रक्रिया को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं ने जनजागरण, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता के विचारों को मजबूत करने में योगदान दिया है। इसलिए भारतीय भाषाओं का सम्मान करना देश की संस्कृति और इतिहास के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है।

दयानंद सरस्वती से सुभाष चंद्र बोस तक के उदाहरण

अमित शाह ने हिंदी के विकास में गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों और व्यक्तित्वों के योगदान का उदाहरण भी दिया। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मातृभाषा गुजराती थी, लेकिन उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिंदी में लिखी। यह उदाहरण बताता है कि हिंदी के विस्तार में केवल हिंदीभाषी लोगों की ही भूमिका नहीं रही है।

उन्होंने महात्मा गांधी के योगदान का भी उल्लेख किया। शाह के अनुसार, गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना था।

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